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क्या GST सुधार और S&P ग्लोबल अपग्रेड से विदेशी निवेशक फिर लौटेंगे भारतीय शेयर बाजार में?

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NSDL के डेटा के मुताबिक, साल 2025 (CY25) में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में से करीब ₹1.17 लाख करोड़ की भारी बिकवाली की है।

Last Updated- August 19, 2025 | 12:16 PM IST
Stock Market outlook

हाल ही में भारत को दो बड़े पॉजिटिव मिले हैं। जीएसटी (GST) रेट में बदलाव की तैयारी और एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भारत की लंबी अवधि की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को BBB- से बढ़ाकर BBB कर दिया है, जो इन्वेस्टमेंट ग्रेड में एक स्तर ऊपर है और आउटलुक भी “स्टेबल” रखा गया है। लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सिर्फ इनसे विदेशी निवेशक (FIIs) तुरंत भारतीय शेयर बाजार की तरफ लौटेंगे, ऐसा अभी नहीं दिख रहा।

विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेशकों की वास्तविक वापसी तभी होगी जब कंपनियों की कमाई (Corporate Earnings) सुधरे और पॉलिसी माहौल स्थिर हो, चाहे वह भारत में हो या ग्लोबल स्तर पर (जैसे टैरिफ़ का मुद्दा)।

सरकार की कोशिशें और बाजार की स्थिति

जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार ने कहा कि जीएसटी पर सरकार के नए रिफॉर्म्स के संकेतों ने मार्केट सेंटिमेंट तो सुधारे हैं, लेकिन असली बदलाव तब होगा जब कंपनियों के प्रॉफिट में उछाल आएगा। उनका मानना है कि लगातार और मजबूत रैली तभी संभव है जब अर्निंग्स का सुधार साफ दिखे।

विदेशी निवेशकों की सेलिंग जारी

NSDL के डेटा के मुताबिक, साल 2025 (CY25) में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में से करीब ₹1.17 लाख करोड़ की भारी बिकवाली की है। जनवरी 2025 में सबसे बड़ा सेल-ऑफ देखा गया, करीब ₹78,000 करोड़ का। अगस्त तक भी वे ₹22,200 करोड़ के शेयर बेच चुके थे।

कोटक अल्टरनेट एसेट मैनेजर्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट जितेंद्र गोहिल का कहना है कि इस समय विदेशी निवेशक उभरते बाजारों (Emerging Markets) की तरफ देख रहे हैं, क्योंकि अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित रैली ने वहां के शेयरों को बहुत महंगा बना दिया है।

आगे की तस्वीर: कॉरपोरेट अर्निंग्स अहम

गो‍हिल कहते हैं कि भारत पिछली तिमाहियों में थोड़ा कमजोर रहा है, लेकिन 2025-26 की दूसरी छमाही में सरकार से और नीतिगत फैसले आ सकते हैं और कंपनियों की कमाई त्योहार सीजन और आरबीआई की ब्याज दर कटौती से सुधर सकती है। रेटिंग अपग्रेड लंबे समय के लिए विदेशी निवेशकों के लिए पॉजिटिव है, लेकिन टैरिफ (आयात शुल्क) की स्थिति ही फिलहाल सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर है।

कंपनियों की परफॉर्मेंस

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) के अनुसार, निफ्टी कंपनियों का प्रॉफिट 8% सालाना (YoY) बढ़ा, जबकि उनकी उम्मीद सिर्फ 5% की थी। सबसे ज्यादा योगदान भारती एयरटेल, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एसबीआई, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक का रहा, जिन्होंने 77% तक अर्निंग्स ग्रोथ दी। वहीं दूसरी ओर कोल इंडिया, टाटा मोटर्स, इंडसइंड बैंक, ओएनजीसी, एचसीएल टेक, कोटक बैंक, एक्सिस बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर और नेस्ले जैसी कंपनियों ने नकारात्मक असर डाला।

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का मानना है कि निफ्टी-50 का नेट प्रॉफिट FY26 में करीब 9.6% और FY27 में 17.5% बढ़ सकता है।

निवेशकों के लिए सलाह

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर टैरिफ से जुड़ा कोई फैसला भारतीय शेयरों को नीचे लाता है तो इसे लॉन्ग-टर्म खरीदारी का मौका मानना चाहिए।

CLSAs के क्रिस्टोफर वुड ने कहा कि भारत पर ट्रंप की 50% टैरिफ पॉलिसी को बेचने का कारण नहीं मानना चाहिए, बल्कि इसे खरीदने का मौका समझना चाहिए। वे मानते हैं कि ट्रंप इस स्टैंड से पीछे हटेंगे। फिलहाल भारतीय शेयरों का वैल्यूएशन 10 साल के औसत के आसपास आ चुका है, इसलिए अब भारत से निवेश घटाना देर से लिया गया कदम होगा।

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First Published - August 19, 2025 | 12:16 PM IST

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