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अंबानी से चार गुना ज्यादा दान, शिव नादर और परिवार ने FY25 में दिए ₹2,708 करोड़ रुपये

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एचसीएल टेक्नॉलजीज के संस्थापक शिव नादर और उनके परिवार ने शिक्षा, कला और संस्कृति के लिए दिया रिकॉर्ड दान; मुकेश अंबानी और बजाज परिवार क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर

Last Updated- November 07, 2025 | 9:18 AM IST
Shiv Nadar

एचसीएल टेक्नॉलजीज के संस्थापक Shiv Nadar और उनके परिवार ने वित्त वर्ष 2025 में 2,708 करोड़ रुपये दान किए हैं। शिव नादर फाउंडेशन की ओर से रोजाना 7.8 करोड़ रुपये की रकम दान की गई है। दान की इतनी भारी भरकम रकम के साथ शिव नादर और उनका परिवार इस साल के एडलगिव हुरुन इंडिया परोपकारियों की सूची में भी शीर्ष स्थान पर बरकरार है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि Shiv Nadar और उनके परिवार ने वित्त वर्ष 2024 के मुकाबले 26 फीसदी ज्यादा दान किया है। उनका दान शिक्षा, कला एवं संस्कृति पर केंद्रित है। दूसरे स्थान पर रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुकेश अंबानी और उनका परिवार है। अंबानी परिवार ने 2025 में 626 करोड़ रुपये का दान किया है, जो एक साल पहले के मुकाबले 54 फीसदी अधिक है। 446 करोड़ रुपये के दान के साथ बजाज परिवार तीसरे स्थान पर है। बजाज परिवार ने एक साल पहले के मुकाबले इस साल 27 फीसदी दान दिया है।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘अगर सिर्फ व्यक्तिगत दानदाता की बात करें तो शिव नादर और उनका परिवार 2,537 करोड़ रुपये के दान के साथ पहले स्थान पर हैं। उनके बाद नंदन नीलेकणि और रोहिणी नीलेकणि का स्थान है।’ वित्त वर्ष 2025 में कुल 191 व्यक्ति इस सूची में शामिल हुए, जबकि एक साल पहले परोपकारियों की सूची में 203 लोग शामिल थे। मगर औसत दान राशि वित्त वर्ष 2024 के 43 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 54 करोड़ रुपये हो गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह भारत में धन सृजन में कुल मिलाकर हुई वृद्धि का नतीजा है, जहां पिछले पांच वर्षों में इस सूची में शामिल होने की सीमा में 160 फीसदी की वृद्धि हुई है। भारत के शीर्ष 10 परोपकारी व्यक्तियों में शामिल होने की सीमा दोगुनी से भी अधिक हो गई है, जो 2020 में 74 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 173 करोड़ रुपये हो गई है।

हुरुन इंडिया के संस्थापक और मुख्य शोधकर्ता अनस रहमान जुनैद ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि पिछले साल के मुकाबले कुल दान में 15 से 20 फीसदा का इजाफा हुआ है और पिछले तीन वर्षों के मुकाबले 85 फीसदी की वृद्धि के साथ लगभग दोगुना हो गया है। कुल मिलाकर, सूची में शामिल 191 लोगों ने वित्त वर्ष 2025 में 10,380 करोड़ रुपये का दान दिया है।

जुनैद ने कहा, ‘चीन के मुकाबले भारत का प्रदर्शन काफी बेहतरीन है। अगर आप 100 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े दान-पुण्य कार्यों को देखें तो भारत में यह संख्या 18 है, जो करीब-करीब चीन के बराबर है। अब सोचिए कि चीन की जीडीपी लगभग 20 लाख करोड़ डॉलर है और भारत की सिर्फ 4 लाख करोड़ डॉलर है। फिर भी हम बड़े दान-पुण्य कार्यों में चीन की बराबरी कर रहे हैं। मुझे पूरा यकीन है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक दान-पुण्य के लिए एक आदर्श बनेगा।’

एडलगिव हुरुन इंडिया परोपकारियों की सूची 2025 में शामिल शीर्ष 25 लोगों द्वारा पांच वर्षों में 50,000 करोड़ रुपये दान करने के बाद यह जानकारी मिली है। इस लिहाज से देखें तो हर दिन औसतन 46 करोड़ रुपये दान किए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2017 से दान में चार गुना वृद्धि हुई है, जो देश में बड़े पैमाने पर परोपकार में निरंतर वृद्धि को दर्शाता है। इसके अलावा, खुद से बने परोपकारियों की संख्या इस वर्ष बढ़कर 101 हो गई है, जो 2023 (वित्त वर्ष 2023) में 36 थी।

सबसे बड़े परोपकारियों में चौथे स्थान पर कुमार मंगलम बिड़ला और उनका परिवार रहा, जिन्होंने कुल 440 करोड़ रुपये का दान दिया। उसके बाद गौतम अदाणी और उनके परिवार का नाम है, जो वित्त वर्ष 25 में 386 करोड़ रुपये के दान के साथ पांचवें स्थान पर रहे।

लेखिका और रोहिणी नीलेकणि फिलैंथ्रोपीज की चेयरपर्सन रोहिणी नीलेकणि 204 करोड़ रुपये के दान के साथ महिला परोपकारियों की सूची में शीर्ष पर रहीं। उनके बाद बायोकॉन की किरण मजूमदार-शॉ का नाम है, जिन्होंने कुल 83 करोड़ रुपये का दान दिया। शॉ ने मुख्य रूप से विज्ञान, अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में दान किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जीरोधा के निखिल कामथ (39 वर्षीय) एडलगिव हुरुन इंडिया परोपकारियों की सूची में चौथी बार सबसे कम उम्र के परोपकारी व्यक्ति बने।

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First Published - November 7, 2025 | 9:08 AM IST

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