facebookmetapixel
Stock Market Today: वेनेजुएला संकट के बीच एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख, जानें कैसी होगी शेयर बाजार की शुरुआतStocks To Watch Today: ONGC से Adani Power तक, आज बाजार में इन स्टॉक्स पर रहेगी नजरमजबूत फंडामेंटल के साथ शेयर बाजार में बढ़त की उम्मीद, BFSI क्षेत्र सबसे आगे: रमेश मंत्रीअमेरिकी प्रतिबंधों से वेनेजुएला की तेल अर्थव्यवस्था झुलसी, निर्यात पर गहरा असर; भारत का आयात भी घटाबांग्लादेश ने IPL के प्रसारण पर लगाया प्रतिबंध, एक्सपर्ट बोले: इस फैसले से कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगादिल्ली दंगा साजिश केस में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकारGrok विवाद में X को सरकार ने दी 72 घंटे की और मोहलत, महिलाओं व बच्चों की तस्वीरों पर केंद्र सख्तकेंद्रीय बजट से पहले IVCA की मांग: AIF ने प्राइवेट क्रेडिट फंड्स के लिए टैक्स में समानता की मांग कीSMC बिल पर एम. दामोदरन की चेतावनी: सेबी का निवेशकों की सुरक्षा पर फोकस कमजोरविश्व आर्थिक मंच की सलाना बैठक में दावोस जाएंगे भारतीय नेतागण, चौहान और वैष्णव करेंगे अगुआई

मजबूत FPI फ्लो से तेजड़ियों में उत्साह बरकरार, बाजार में उतार-चढ़ाव के आसार

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दर वृद्धि पर विराग लगाए जाने से कुछ राहत मिली है

Last Updated- June 25, 2023 | 11:36 PM IST
Clearing Corporation should be separated from the stock exchange: SEBI स्टॉक एक्सचेंज से अलग हो क्लियरिंग कॉरपोरेशन: सेबी

पूरे भारतीय इ​क्विटी बाजार में सूचकांक (Indices) पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में छोटी मोटी गिरावट से जूझने से पहले अपनी नई रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छूने में सफल रहे। NSE के निफ्टी ने पिछले एक साल में करीब 20 प्रतिशत, मिडकैप ने 33 प्रतिशत, स्मॉलकैप ने 31 प्रतिशत, और माइक्रोकैप ने 44 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की है। कई कारकों की वजह से यह तेजी दर्ज की गई है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा ब्याज दर वृद्धि पर विराग लगाए जाने से कुछ राहत मिली है। आ​र्थिक सुधार के संकेत बने हुए हैं, भले ही कर-बाद मुनाफा वृद्धि में सुस्ती आई है, राजस्व वृद्धि लगातार मजबूत दिख रही है। ज्यादातर कॉरपोरेट अनुमान आशाजनक हैं। मुद्रास्फीति में कुछ हद तक नरमी आई है, मुख्य तौर पर कच्चे तेल और गैस की कीमतें पिछले पांच-छह महीने से नरम पड़ी हैं। व्यापार घाटा भी कम हुआ है।

लेकिन अभी भी बाजार की चाल को लेकर कुछ आशंकाएं बनी हुई हैं।

RBI गवर्ननर ने बार बार यह चेतावनी दी है कि यदि मुद्रास्फीति स्वीकार्य स्तरों से ऊपर जाती है तो केंद्रीय बैंक दरें फिर से बढ़ा सकता है। इसके अलावा, रूस में ताजा घटनाक्रम से कच्चे तेल और गैस कीमतों में आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका में तेजी आ सकती है, जिससे मुद्रास्फीति की चाल बदल सकती है।

वित्त वर्ष 2024 में, फिलहाल संस्थागत और खुदरा निवेशकों का रुख अनुरूप रहा है, हालांकि आंकड़ों से कुछ दिलचस्प रुझानों का खुलासा हुआ है।

डायरेक्ट रिटेल खरीदारी में तेजी आई है, माइक्रो-कैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में खुदरा निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी से मदद मिली है और खासकर माइक्रो-कैप को संस्थागत समर्थन का अभाव दिखा है। हालांकि अप्रैल और मई में इ​क्विटी फंडों में म्युचुअल फंड (MF) प्रवाह सिर्फ 9,720 करोड़ रुपये रहा। यह सामान्य से कम है, हालांकि कुछ हद तक सकारात्मक है।

घरेलू संस्थागत निवेशकों (MF को छोड़कर) ने अप्रैल-जून में 4,933 करोड़ रुपये की शुद्ध इ​क्विटी खरीदारी की। वहीं मार्च 2023 में घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 30,548 करोड़ रुपये की खरीदारी की।

तेजी के बाजार का बड़ा वाहक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) का प्रवाह रहा है। 2022-23 में 37,632 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली के बाद, उन्होंने वित्त वर्ष 2024 में 86,133 करोड़ रुपये की खरीदारी की। उम्मीद है कि FPI की दिलचस्पी बनी रहेगी, क्योंकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने भी दर वृद्धि पर विराम लगा दिया है।

वै​श्विक अर्थव्यवस्था को चीन से राहत मिल सकती है, जो नीतिगत दरों में कटौती कर रहा हैऔर तरलता की राह आसान बना रहा है। जहां तक भूराजनीतिक उतार-चढ़ाव से बाजारों पर प्रभाव पड़ने का सवाल है, तो रूस में हालात एक बार फिर से अनिश्चित हो गए हैं।

Also read: 2000 के दो तिहाई से ज्यादा नोट बैंकों में वापस आए: RBI गवर्नर

तकनीकी तौर पर, व्यापक बाजार पूंजीकरण (mcap) वाले सूचकांक अपने 200-दिन के मूविंग एवरेज (DMA) से ऊपर कारोबार कर रहे हैं, जिससे दीर्घाव​धि तेजी के रुझान का संकेत मिलता है। हालांकि सूचकांक अपने अल्पाव​धि मूविंग एवरेज (जैसे 20-डीएमए) से नीचे हैं।

निफ्टी को 18,575 (200-DMA स्तरों) और फिर 18,300 पर समर्थन हासिल है। यदि यह स्तर टूटा तो अगला समर्थन 18,000 के आसपास मिलेगा।

मई में, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी हेल्थकेयर अच्छा प्रदर्शन करने वालों में शामिल रहे। पिछले साल में, निफ्टी FMCG और निफ्टी PSU बैंक सूचकांकों ने शानदार प्रदर्शन किया। पिछले साल सिर्फ निफ्टी मी​डिया इंडेक्स ने मामूली नुकसान दर्ज किया। निफ्टी मेटल और निफ्टी ऑटो पिछले महीने में मजबूत हुए, क्योंकि निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में तेजी आई। मूल्यांकन ऐ​तिहासिक स्तरों के लिहाज से ​उचित दिख रहे हैं।

Also read: SBI वेल्थ मैनेजमेंट बिजनेस को बेहतर बनाने पर दे रहा जोर, नियुक्त होंगे सलाहकार

सकारात्मक संस्थागत प्रवाह और मजबूत रिटेल धारणा को देखते हुए तेजी की रफ्तार अल्पाव​धि गिरावट के बाद भी बनी रह सकती है। लेकिन यदि FPI धारणा में बदलाव आता है या DII शुद्ध बिकवाल बनते हैं तो चुनौती पैदा हो सकती है।

यदि ऐसा होता है तो वित्त वर्ष 2024 तक, म्युचुअल फंड प्रवाह FPI की भारी बिकवाली की भरपाई करने के लिहाज से अपर्याप्त है। यदि निफ्टी 18,000 के स्तर से नीचे गया तो उसमें बड़ी गिरावट देखी जा सकती है।

First Published - June 25, 2023 | 6:30 PM IST

संबंधित पोस्ट