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नए परिसंपत्ति वर्ग को सेबी बोर्ड दे सकता है मंजूरी

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30 सितंबर को होगी बाजार नियामक सेबी के निदेशक मंडल की बैठक, चेयरपर्सन माधवी पुरी बुच पर हितों के टकराव के आरोपों के बाद पहली बैठक

Last Updated- September 24, 2024 | 11:08 PM IST
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बाजार नियामक सेबी म्युचुअल फंडों और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज के बीच का अंतर कम करने के लिए एक नई परिसंपत्ति श्रेणी को मंजूरू दे सकता है। सूत्रों ने बताया कि पैसिव फंड कंपनियों को म्युचुअल फंड लाइट के मसौदे को भी मंजूरी मिल सकती है। ये फैसले 30 सितंबर को सेबी बोर्ड की आगामी बैठक में हो सकते हैं।

इस बैठक पर बारीक नजर रहेगी। सेबी की चेयरपर्सन माधवी पुरी बुच पर विपक्षी दल कांग्रेस और शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च के हितों के टकराव के आरोपों के बाद यह पहली बैठक हो रही है। इसके बाद कर्मचारियों के असंतोष का मामला भी उभरा, जिन्होंने वित्त मंत्रालय को भी अपनी मांगों की सूची सौंपी है।

आमतौर पर सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के प्रतिनिधित्व वाला सेबी का निदेशक मंडल हर तिमाही में एक बार बैठक कर प्रतिभूति बाजार से जुड़े सुधारों को मंजूरी देता है। नई श्रेणी उन निवेशकों को सेवाएं देगी जो जोखिम वाले दांव लगाने के इच्छुक होंगे।

इसमें निवेश का न्यूनतम मूल्य 10 लाख रुपये होगा जो पीएमएस की 50 लाख की न्यूनतम सीमा से काफी कम है। हालांकि नई श्रेणी के लिए स्पष्ट अंतर और अग्रिम डिस्क्लोजर अनिवार्य बनाए जाएंगे ताकि निवेशकों में किसी तरह की दुविधा न हो। इस बारे में सेबी को भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला।

मौजूदा म्युचुअल फंड कंपनियों को नया परिसंपत्ति वर्ग पेश करने की इजाजत मिलेगी। सूत्रों ने कहा कि नए नियमों की संभावना भांपकर कई कंपनियों ने पहले ही टीम बनाना शुरू कर दिया है और अपनी पेशकश की के लिए रणनीति बना रही हैं।

उद्योग की एक कंपनी ने कहा कि कई बड़े म्युचुअल फंड घराने नए परिसंपत्ति वर्ग के लिए निवेश प्रबंधकों और टीम के सदस्यों की तलाश शुरू कर चुके हैं क्योंकि ऐसी रणनीति के लिए उन्हें विशिष्टता वाली टीम की दरकार होगी।

इस बीच, एमएफ लाइट के तहत नियमों में छूट के मामले में प्रायोजकों और एएमसी के लिए नेटवर्थ और लाभ के मानकों में कमी तक शामिल है। इससे उनको कम जानकारी की आवश्यकता होगी। बोर्ड अन्य अहम प्रस्तावों पर भी विचार कर सकता है। जैसे, वायदा एवं विकल्प सेगमेंट के लिए ट्रेडिंग के सख्त नियम।

हालिया विश्लेषण में बाजार नियामक ने कहा है कि पिछले तीन वर्षों में एफऐंडओ सेगमेंट में करीब 93 फीसदी खुदरा निवेशकों ने 1.8 लाख करोड़ रुपये गंवाए हैं। इस बीच, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों और प्रोप्राइटरी ट्रेडरों ने वित्त वर्ष 24 में क्रमश: 28,000 करोड़ रुपये व 33,000 करोड़ रुपये का ट्रेडिंग लाभ कमाया।

जुलाई के परामर्श पत्र में सेबी ने एफऐंडओ सेगमेंट में सटोरिया गतिविधियों पर लगाम के लिए सात कदमों का प्रस्ताव रखा था। इन कदमों में डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट की वैल्यू पहले 15 लाख रुपये से 20 लाख रुपये के बीच रखना और छह माह बाद 30 लाख रुपये तक रखना शामिल है। अभी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट की न्यूनतम वैल्यू करीब 5 लाख रुपये है। कॉन्ट्रैक्ट का आकार बड़ा रखने की वजह छोटे निवेशकों के प्रवेश पर पाबंदी बढ़ाना है।

सेबी ने ऑप्शंस में भी खासी सख्ती का प्रस्ताव रखा है। इसमें खरीदारों से ऑप्शन प्रीमियम का अग्रिम संग्रह शामिल है ताकि लिवरेज में कमी आए। जून की पिछली बोर्ड बैठक के दौरान सेबी ने एफऐंडओ सेगमेंट के तहत शेयरों के चयन के लिए पात्रता मानकों में बदलाव किया था।

नियामक ने शोध विश्लेषकों और पंजीकृत निवेश सलाहकारों के नियमों की समीक्षा का काम हाथ में लिया है और नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है, जिसमें अनुपालन में नरमी और लोगों को पंजीकृत निवेश सलाहकार के काम के साथ जोड़ने के कदम शामिल हैं। सूत्रों ने कहा कि आगामी बैठक में बोर्ड इन प्रस्तावों पर भी विचार कर सकता है।

कारोबारी सुगमता की पहल के तहत सेबी डिस्क्लोजर और लिस्टिंग ऑब्लिगेशन के नियम आसान बना सकता है। सेबी के पूर्व पूर्णकालिक सदस्य एस के मोहंती की अध्यक्षता में गठित 21 सदस्यीय समिति ने इस पर अपनी सिफारिशें सौंपी है और इस बैठक में सेबी इन प्रस्तावों पर विचार कर सकता है।

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First Published - September 24, 2024 | 11:08 PM IST

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