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SEBI के सख्त नियम से थीमेटिक व सेक्टोरल फंडों पर असर, ओवरलैप घटाना जरूरी

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नियामक अनिवार्यताओं को पूरा करने के लिए इन योजनाओं को अगले 3 वर्षों में अपने पोर्टफोलियो में फेरबदल करना होगा

Last Updated- March 02, 2026 | 11:01 PM IST
Sebi

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा थीमेटिक और सेक्टोरल फंडों के लिए नियमों को सख्त करने से इस श्रेणी की दर्जनों योजनाओं पर असर पड़ने वाला है। इलारा सिक्योरिटीज के एक विश्लेषण से पता चलता है कि अभी 51 सेक्टोरल और थीमेटिक योजनाएं एक ही फंड हाउस के भीतर कम से कम एक अन्य योजना के साथ 50 फीसदी पोर्टफोलियो ओवरलैप की सीमा का उल्लंघन करती हैं। हालांकि, अधिकांश योजनाओं में ओवरलैप ज्यादा नहीं है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इनमें से केवल 13 योजनाओं (जिनकी परिसंपत्ति 1,000 करोड़ रुपये से कम है, उन्हें छोड़कर) में 52 फीसदी से अधिक ओवरलैप है।

नियामक अनिवार्यताओं को पूरा करने के लिए इन योजनाओं को अगले 3 वर्षों में अपने पोर्टफोलियो में फेरबदल करना होगा। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि इन योजनाओं को 50 फीसदी तक ओवरलैप कम करने के लिए 76,000 करोड़ रुपये का दोबारा आवंटन करना होगा। इलारा सिक्योरिटीज ने रिपोर्ट में कहा है कि तीन साल की अवधि को ध्यान में रखते हुए कुल असर विघटनकारी नहीं लग रहा है।

इसमें कहा गया है, महत्वपूर्ण बात यह है कि सबसे अधिक ओवरलैपिंग आवंटन मुख्य रूप से अत्यधिक लिक्विड, लार्ज-कैप नामों में केंद्रित हैं, जहां समाहित करने की क्षमता काफी मजबूत है।

जिन योजनाओं में सबसे ज्यादा ओवरलैप है उनमें क्वांट मोमेंटम फंड (क्वांट क्वांटामेंटल फंड के साथ 78 फीसदी ओवरलैप), मोतीलाल ओसवाल बिजनेस साइकल फंड (मोतीलाल ओसवाल मल्टी कैप फंड के साथ 75 फीसदी ओवरलैप) और आदित्य बिड़ला सन लाइफ बिजनेस साइकल फंड (आदित्य बिड़ला सन लाइफ फ्लेक्सीकैप फंड के साथ 63 फीसदी ओवरलैप) शामिल हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि फंड हाउस दोनों योजनाओं में से छोटी योजना के पोर्टफोलियो को फिर से आवंटित करके ओवरलैप को ठीक कर सकते हैं। व्यावहारिक पोर्टफोलियो प्रबंधन संबंधी विचारों को देखते हुए किसी भी प्रकार की दोबारा व्यवस्था छोटी योजना में होने की अधिक संभावना है क्योंकि बड़ी योजना में समायोजन की तुलना में क्रियान्वयन का प्रभाव अपेक्षाकृत कम होगा।

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First Published - March 2, 2026 | 10:26 PM IST

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