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शॉर्ट-टर्म शोर से दूर रहें, लंबी रणनीति पर ध्यान दें, कोटक MF के MD नीलेश शाह की सलाह

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नीलेश शाह के अनुसार, बाजार की उतार-चढ़ाव से परेशान न हों, फंडामेंटल्स और सही एसेट एलोकेशन पर ध्यान दें, छोटी SIP भी लंबी अवधि में निवेशकों के लिए बड़े अवसर खोलती है।

Last Updated- March 02, 2026 | 5:09 PM IST
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बाजार में उतार-चढ़ाव, सोने-चांदी में हलचल और वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब रणनीति क्या हो? कोटक म्युचुअल फंड के एमडी नीलेश शाह ने बिजनेस स्टैंडर्ड के फ्लैगशिप इवेंट बीएस मंथन के इतर अंशु के साथ बातचीत में कहा कि ऐसे माहौल में शॉर्ट टर्म शोर से दूर रहें, फंडामेंटल्स और सही एसेट एलोकेशन पर फोकस करें। छोटी एसआईपी के जरिए निवेशकों के लिए भी बड़े अवसर खुल रहे हैं, जबकि एआई जैसे नए टूल निवेश की दुनिया को तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में समझदारी इसी में है कि रुझानों का पीछा करने के बजाय अपनी रणनीति को मजबूत बनाया जाए। मुख्य अंश:

बाजार और सोने-चांदी जैसी कमोडिटीज में उठा-पटक के बीच एएमसी की आगे क्या रणनीति होगी?

हमारी रणनीति बिल्कुल वही रहेंगी जो पहले थी। बैक टू बेसिक्स की, फंडामेंटल्स के ऊपर आप मूल्याकंन कीजिए। कल रिटर्न आया या नहीं आया, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। आगे क्या होने वाला है, उस पर नजर रखियें। दुनियाभर में अनिश्चितता के बादल छाये हुए है। बाजार में उठा-पटक ज्यादा है। इसलिए फंडामेंटल्स पर फोकस करना ज्यादा जरूरी हो जाता है।

खुदरा और एसआईपी निवेशक मौजूदा माहौल में फंड एलोकेशन कैसे करें?

कल भी ये कह रहे थे, आज भी यही कह रहे हैं और आगे भी यही कहेंगे कि आप अपने एसेट एलोकेशन का ध्यान रखियें। बाजार कहां जाएगा यह तो शायद भगवान को भी नहीं मालूम, तो एक मनुष्य कैसे समझ पाएगा। बाजार की दिशा पकड़ने से ज्यादा समझदारी इसमें है कि उसकी चाल के अनुसार अपनी पोजिशन तय करें। और इसके लिए सही एसेट एलोकेशन बेहद जरूरी है। पिछले 18 महीनों से निफ्टी ने कोई रिटर्न नहीं दिया है। इंडेक्स 26,000 के आसपास फ्लैट है। उसी समय एसआईपी करने वाले निवेशकों का रिटर्न 6-7 फीसदी है। बाजार किधर जाएगा ये सोचने से बेहतर है- आपका पोर्टफोलियो सही दिशा में है या नहीं, इस पर फोकस करें।

छोटी एसआईपी से भारत के निवेश तंत्र को कैसे मजबूती मिलेगी?

फाइनैंस में लोग भरोसे पर काम करते हैं। लोग कहते हैं कि म्युचुअल फंड पैसा मैनेज करता है। मैं उन्हें समझता हूं कि हम लोगों का विश्वास मैनेज करते हैं। छोटी एसआईपी एक कनेक्टर है जो नीचे से नीचे तबके के लोगों को पूंजी बाजार से जोड़ती है। छोटी एसआईपी करने वाले निवेशक यह सोचे कि मैं टाटा, बिरला, अंबानी, अदाणी और जिंदल जैसे भारत के सबसे बड़े उद्योगपतियों के साथ साझेदारी कर रहा हूं। हां, यह जरूर है कि उनका मार्केट शेयर बहुत छोटा है जबकि प्रमोटर्स का हिस्सा बहुत बड़ा है।

लेकिन पूंजी बाजार एक ऐसी जगह है, जहां पर आप भारत के सबसे अमीर और अच्छे से अच्छे उद्योगपतियों से जुड़ सकते हैं।

एआई फंड मैनेजर्स का स्मार्ट साथी या सबसे बड़ी चुनौती?

एआई वही फर्क लाएगा जो कभी इंटरनेट ने लाया था- जो इसे अपनाएगा, वही आगे निकलेगा; जो दूरी बनाएगा, वो पीछे छूट जाएगा। आखिर में खेल टेक्नॉलजी का नहीं, उसके इस्तेमाल का है। आप एआई को कैसे प्रयोग करते हैं, उसी से आपका नतीजा तय होगा।

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First Published - March 2, 2026 | 8:03 AM IST

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