भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) कमोडिटी डेरिवेटिव बाजार में भागीदारी बढ़ाने के मकसद से कई उपायों पर विचार कर रहा है। इनमें कृषि कमोडिटी वर्गीकरण की परिभाषा में संशोधन, बाजार-व्यापी पोजीशन लिमिट में बदलाव और मार्जिन ढांचे की समीक्षा शामिल है। सूत्रों ने यह जानकारी दी। इन प्रस्तावों पर हाल में सेबी की कमोडिटी डेरिवेटिव सलाहकार समिति (सीडीएसी) में चर्चा की गई। समिति ने मौजूदा वितरण और निपटान ढांचे की फिर से जांच करने के लिए गठित कई कार्य समूहों की रिपोर्टों की समीक्षा की।
चर्चा में सात प्रमुख कृषि उत्पादों – गेहूं, चना, सरसों, सोयाबीन, मूंग, गैर-बासमती धान और क्रूड पाम आॉयल – के डेरिवेटिव पर लंबे समय से लगे कारोबारी प्रतिबंधों और उन्हें ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर वापस लाने के संभावित उपायों पर भी विचार-विमर्श हुआ। डेरिवेटिव पर यह प्रतिबंध पहली बार दिसंबर 2021 में लगाया गया था और यह हर साल बढ़ाया जाता रहा है। वर्तमान में प्रतिबंध मार्च 2026 तक लागू हैं।
घटनाक्रम से अवगत लोगों के अनुसार, प्रमुख प्रस्तावों में से एक कृषि-वस्तुओं की परिभाषा को अपडेट करना है, जिन्हें वर्तमान में उत्पादन स्तर, आपूर्ति क्षमता और सरकारी हस्तक्षेप की संभावना के आधार पर संवेदनशील, व्यापक या संकीर्ण श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। ये वर्गीकरण पोजीशन सीमा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
नियामक सदस्य-स्तर की पोजीशन लिमिट का भी मूल्यांकन कर रहा है और उल्लंघन के लिए दंड के ढांचे पर फिर से विचार कर सकता है। एक सूत्र ने बताया, मार्जिन प्रणाली में कुछ कमियां हैं, जिनमें सुधार की जरूरत है। कई कृषि जिंसों में सदस्यों और ग्राहकों के लिए उपलब्ध बाजार-व्यापी पोजीशन लिमिट अपेक्षाकृत कम है। इसलिए महीने के दौरान बार-बार और अक्सर अनजाने में उल्लंघन होते हैं। ऐसे अनजाने उल्लंघनों के लिए दंड पर फिर से विचार किया जा सकता है।
उम्मीद है कि सेबी जल्द ही प्रस्तावित परिवर्तनों की रूपरेखा पेश करते हुए परामर्श पत्र जारी कर सकता है। उद्योग जगत के हितधारकों के साथ चर्चा के बाद मसौदा प्रस्तावों को आमतौर पर मंजूरी के लिए बोर्ड के सामने पेश करने से पहले सार्वजनिक राय के लिए रखा जाता है। इस बारे में सेबी को ईमेल के जरिये भेजे गए सवालों का जवाब नहीं मिला।
फरवरी में सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा था कि नियामक कृषि-जिंसों के डेरिवेटिव पर जारी प्रतिबंध की समीक्षा के लिए संबंधित मंत्रालयों के साथ काम कर रहा है। सूत्रों ने संकेत दिया है कि मौजूदा विस्तार मार्च 2026 तक ही है और अगली समीक्षा के दौरान इसमें कुछ राहत पर विचार किया जा सकता है।
बाजार के एक प्रतिभागी ने बताया, ये उपाय सेबी चेयरमैन द्वारा कमोडिटी बाजार का विस्तार करने और संरचनात्मक समस्याओं को दूर करने के लिए शुरू की गई व्यापक पहलों का हिस्सा हैं। इस क्षेत्र में भागीदारी बढ़ाने के लिए कई कार्य समूहों का गठन किया गया है।
इसके अलावा सेबी ने गैर-कृषि कमोडिटी डेरिवेटिव को नियंत्रित करने वाले मानदंडों की समीक्षा के लिए एक समिति भी बनाई है, जहां विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की भागीदारी मुख्य रूप से ऊर्जा और नकद-निपटान अनुबंधों में केंद्रित है।