भारत ने मंगलवार को कहा कि वह पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को जल्द से जल्द समाप्त करने के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद कर रहा है। खाड़ी क्षेत्र में लगभग 1 करोड़ भारतीय नागरिकों के रहने और काम करने के कारण इस संघर्ष ने काफी चिंता पैदा कर दी है। भारत ने कहा कि उनकी सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
विदेश मंत्रालय द्वारा मंगलवार शाम को जारी बयान में कहा गया है कि भारत का व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति संकटग्रस्त भौगोलिक क्षेत्र से होकर गुजरती है, और किसी भी बड़े व्यवधान का भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। बयान में कहा गया है, ‘सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखेगी और राष्ट्रीय हित में उचित निर्णय लेगी।’
विदेश मंत्रालय का मंगलवार शाम का बयान विपक्षी दलों की इस मांग के मद्देनजर आया है कि भारत को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त सैन्य हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की निंदा करनी चाहिए।
बयान में ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या का उल्लेख नहीं किया गया। बयान में कहा गया है कि इस क्षेत्र में काम करने और रहने वाले 1 करोड़ भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और भलाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसमें कहा गया है, ‘हम किसी भी ऐसे घटनाक्रम के प्रति उदासीन नहीं रह सकते जो उन्हें नकारात्मक रूप से प्रभावित करता हो।’
व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों में भारतीय नागरिकों की जान जाने का जिक्र करते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘वैश्विक कार्यबल में जिनके नागरिक प्रमुख भूमिका निभाते हैं, ऐसे देश के रूप में भारत व्यापारिक जहाजों पर हमलों का कड़ा विरोध करता है।’
मंत्रालय ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में ऐसे हमलों के परिणामस्वरूप कुछ भारतीय नागरिक मारे गए हैं या लापता हैं। सरकार के सूत्रों का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी चिंता 90 लाख से 1 करोड़ भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों (पीआईओ) की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, जिनमें से अधिकांश उन खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं, जिन पर ईरान द्वारा हमले किए गए हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि 57 सदस्यीय इस्लामी देशों के संगठन (ओआईसी) के अधिकांश देशों ने ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या पर कोई बयान जारी करने से परहेज किया है। इस क्षेत्र में रहने वाले 90 लाख अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) में से अधिकांश सऊदी अरब (24 लाख), संयुक्त अरब अमीरात (35 लाख), बहरीन (323,908), कुवैत (993,284), ओमान (684,771), कतर (835,175) और जॉर्डन (16,897) में रहते हैं। इनमें से किसी ने भी खामेनेई की मृत्यु पर कोई बयान जारी नहीं किया है।
ईरान में 10,320, इराक में 17,100 और इजरायल में 20,000 एनआरआई हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत की व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाएं इस क्षेत्र से होकर गुजरती हैं। मंत्रालय ने कहा, ‘किसी भी बड़े व्यवधान का भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।’ मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले एक निकटवर्ती पड़ोसी के रूप में, पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रम ‘गहरी चिंता’ पैदा करते हैं।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने 28 फरवरी को ईरान और खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष शुरू होने पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। मंत्रालय ने कहा, ‘उस समय भी भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव को बढ़ने से रोकने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया था।’ विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित देशों में भारतीय दूतावास भारतीय नागरिकों और सामुदायिक संगठनों के साथ लगातार संपर्क में हैं और आवश्यकतानुसार नियमित सलाह जारी कर रहे हैं। मंत्रालय ने यह भी कहा कि उन्होंने संघर्ष में फंसे लोगों को हरसंभव सहायता प्रदान की है।
भारत सरकार क्षेत्रीय सरकारों के साथ-साथ अन्य प्रमुख साझेदारों के संपर्क में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने समकक्षों के साथ चर्चा की है।
मंगलवार को प्रधानमंत्री ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक, कुवैत के युवराज शेख सबह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबह और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से बात की। उन्होंने कुवैत, ओमान और कतर की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के किसी भी उल्लंघन की निंदा की। टेलीफोन पर हुई बातचीत में मोदी ने दोनों नेताओं से वहां रहने वाले भारतीय समुदाय के कल्याण और सुरक्षा पर भी चर्चा की।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को इस बात का जवाब देना होगा कि क्या वह विश्व व्यवस्था को परिभाषित करने के तरीके के रूप में किसी राष्ट्राध्यक्ष की हत्या का समर्थन करते हैं।