पिछले एक साल में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) शेयरों में आई भारी गिरावट के बावजूद अधिकांश टेक म्युचुअल फंड (एमएफ) योजनाओं ने निवेशकों के नुकसान को काफी हद तक कम करने में कामयाबी हासिल की है। ऐक्टिव टेक फंडों में एक साल की अवधि में औसतन 5.8 फीसदी की गिरावट आई है जबकि निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 17 फीसदी लुढ़क गया। विशेषज्ञों के अनुसार ऐक्टिव योजनाओं को उनकी विविधता वाली प्रकृति से लाभ हुआ है। डिजिटल और आईटी कंपनियों के अलावा नई पीढ़ी की कंपनियां इन योजनाओं का मूल आधार हैं।
टेक फंडों और आईटी सूचकांकों के प्रदर्शन में व्यापक अंतर का कारण निफ्टी इंडिया डिजिटल सूचकांक की संरचना से स्पष्ट होता है। यह सूचकांक भारत में प्रौद्योगिकी क्षेत्र का व्यापक प्रतिनिधित्व करता है। सूचकांक की 10 सबसे बड़ी होल्डिंग में से छह- इटर्नल, भारती एयरटेल, पीबी फिनटेक, इन्फो एज (इंडिया), वन97 कम्युनिकेशंस और स्विगी- गैर-आईटी कंपनियां हैं। पिछले एक वर्ष में लगभग 3.5 फीसदी की गिरावट दर्ज करने वाले इस सूचकांक का प्रदर्शन ऐक्टिव टेक फंडों के प्रदर्शन के समान रहा है।
फंड मैनेजर तुलनात्मक रूप से टेक फंडों की मजबूती का श्रेय उनके विविध पोर्टफोलियो को देते हैं। इन्वेस्को फंड में प्रबंधक हितेन जैन ने कहा, हमारी योजना (इन्वेस्को इंडिया टेक फंड) आईटी सेवाओं और उन कारोबारों में निवेश करती है, जहां प्रौद्योगिकी मुख्य विषय है जैसे उपभोक्ता प्रौद्योगिकी, फिनटेक, औद्योगिक प्रौद्योगिकी, हार्डवेयर और दूरसंचार। यह फंड उन कंपनियों में निवेश करता है, जिनमें प्रौद्योगिकी में शुरुआती और पर्याप्त निवेश के कारण विकास की अपार संभावनाएं हैं। यह मुख्य रूप से विकासोन्मुखी फंड है, जिसकी संरचना में मूल्य करीब 25 फीसदी है।
एडलवाइस टेक्नॉलजी जैसे कुछ फंडों को अपने अंतरराष्ट्रीय विस्तार से भी लाभ हुआ है। एडलवाइस फंड के अध्यक्ष और सीआईओ (इक्विटीज) त्रिदीप भट्टाचार्य ने कहा, हमारे वैश्विक पोर्टफोलियो की पोजिशनिंग टेक फंड के बेहतर प्रदर्शन का महत्त्वपूर्ण कारक साबित हुई है। पिछले दो वर्षों में हमने आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) प्रौद्योगिकी चक्र के विकास के अनुरूप अमेरिकी प्रौद्योगिकी में रणनीतिक रूप से 20-30 फीसदी का अतिरिक्त निवेश बनाए रखा। इससे हमें अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों में एआई से संबंधित खर्च में हुई वृद्धि का प्रभावी ढंग से लाभ उठाने में मदद मिली। साथ ही भारतीय आईटी क्षेत्र में बदलाव को अनुशासित और समयबद्ध तरीके से प्रबंधित करने में भी सहायता मिली।
बाजार में आई गिरावट से मूल्यांकन में नरमी आ गई है। ऐसे में टेक्नॉलजी फंडों में आईटी शेयरों का वेटेज बढ़ सकता है। जैन ने कहा, हम आकर्षक मूल्यांकन के आधार पर आईटी शेयरों में अपना निवेश बढ़ा सकते हैं। हालांकि मौजूदा हालात में भी फंड की समग्र रणनीति नहीं बदलेगी। भारतीय आईटी शेयरों पर दबाव बना हुआ है। ऐसी आशंकाएं हैं कि एआई में तेजी से हो रही प्रगति से इस क्षेत्र के पारंपरिक, मानव-प्रधान व्यापार मॉडल में व्यवधान आ सकता है। वैश्विक ग्राहकों द्वारा विवेकाधीन तकनीकी खर्च को पर अनिश्चितता ने बाजार का मनोबल और कमजोर कर दिया है, जिससे पिछले एक साल में आईटी शेयरों में गिरावट आई है।
मोतीलाल ओसवाल एएमसी ने नवीनतम आउटलुक में कहा, यह स्पष्ट है कि एआई का प्रभाव कोडिंग जैसी निचले स्तर की तकनीकी नौकरियों पर पड़ना लगभग तुरंत शुरू हो जाएगा। हालांकि, यह गतिविधि अभी भारतीय आईटी के कुल कार्य का एक छोटा सा हिस्सा है। सबसे संभावित परिदृश्य यह है कि ग्राहक सामान्य से अधिक छूट की मांग कर सकते हैं। भारतीय आईटी सेवाएं संभवतः स्वयं के एआई टूल्स का उपयोग करके इसका जवाब दे सकती हैं। इससे श्रम में कमी आ सकती है और कुछ लाभ ग्राहकों तक पहुंचाया जा सकता है, लेकिन लाभ मार्जिन सीमित दायरे में ही रहेगा।