facebookmetapixel
Advertisement
Anti Paper Leak Law: अमेरिका, चीन, जापान समेत दुनिया के देशों में परीक्षा में नकल पर क्या है सजा? जानिए नियमदिल्ली लक्ष्मी योजना के लिए कैसे करें आवेदन? महिलाओं के खातें में हर महीने आएंगे ₹2,500Ambuja Cements Share: कमजोर Q1 नतीजों के बावजूद ब्रोकरेज बुलिश, BUY रेटिंग बरकरार; ₹568 तक टारगेटक्या UPI, NEFT या RTGS से पैसे भेजने पर भी आ सकता है Income Tax का नोटिस?Anti Paper Leak Bill 2026: लोकसभा से पास एंटी पेपर लीक बिल, दोषियों को 10 साल की जेल और ₹50 लाख जुर्मानाCWG 2026: भारत को अब तक 2 स्वर्ण, 7 रजत पदक मिले; पदक तालिका में 9वें स्थान परITR e-Verification: रिटर्न फाइल करने के 30 दिनों के भीतर जरूर कर लें वेरिफिकेशन, जानें 5 आसान तरीकेFD Rates: सीनियर सिटीजन को मिल रहा 8.5% तक ब्याज, जानिए किस बैंक में मिल रहा सबसे ज्यादा रिटर्नविजय केडिया, मधुसूदन केला या आशीष धवन… जुलाई में किसके पोर्टफोलियो ने दिया सबसे ज्यादा रिटर्न?Indo-MIM IPO Listing: 72 गुना सब्सक्रिप्शन, अब लिस्टिंग पर कितनी होगी कमाई? GMP ने दिया बड़ा संकेत

MSCI Emerging Markets Index: तीसरे पायदान पर फिसला भारत

Advertisement

ताइवान के बाजार में तेजी और अदाणी समूह के शेयरों में गिरावट से भारत के भारांक पर चोट

Last Updated- February 06, 2023 | 10:11 PM IST
MSCI EM Index
BS

अदाणी समूह के शेयरों में भारी गिरावट के बीच पिछले महीने बाजार के कमजोर प्रदर्शन के चलते एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट इंडेक्स में भारत की रैंकिंग कम हो गई है। बताया जाता है कि इसे 350 अरब डॉलर से ज्यादा की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों वाले पैसिव फंड ट्रैक करते हैं। 12.97 फीसदी के भारांक के साथ भारत की रैंकिंग अब चीन व ताइवान के बाद है, जिनका भारांक क्रमश: 33.49 फीसदी व 14.42 फीसदी है। वैश्विक सूचकांक का संकलन करने वालों की तरफ से जारी फैक्टशीट से यह जानकारी मिली।

दिसंबर के आखिर में भारत का भारांक 14.44 फीसदी था और वह पहली बार दूसरे पायदान पर काबिज हुआ था। इसकी वजह कैलेंडर वर्ष 2022 के दौरान उभरते बाजारों के समूह में भारत का उम्दा प्रदर्शन था। एमएससीआई इंडिया में 8 फीसदी की गिरावट आई जबकि एमएससीआई ईएम इंडेक्स में 20 फीसदी की ​फिसलन दर्ज हुई (दोनों ही डॉलर के लिहाज से)।

साल 2023 में किस्मत में पलटाव हुआ है और एमएससीआई इंडिया जनवरी में 2 फीसदी टूटा जबकि एमएससीआई ईएम में 8 फीसदी का इजाफा हुआ। उभरते बाजारों में एमएससीआई ताइवान इंडेक्स सबसे उम्दा प्रदर्शन करने वाला रहा है और पिछले महीने उसमें करीब 13 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई।

स्मार्टकर्मा के प्रकाशक व विश्लेषक ब्रायन फ्रिएटस ने कहा, भारत की रैंकिंग में गिरावट की दो मुख्य वजह है। एमएससीआई ताइवान में जनवरी में काफी तेजी आई, जिसकी वजह ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी में आई 16.4 फीसदी की उछाल है। ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी का एमएससीआई इंडेक्स में करीब 45 फीसदी भारांक है। दूसरी ओर, एमएससीआई इंडिया में जनवरी में करीब 4 फीसदी की गिरावट आई, जिसमें से 1.7 फीसदी का योगदान अदाणी समूह के शेयरों में आई गिरावट का रहा।

पिछले चार कारोबारी सत्रों के दौरान (24 जनवरी से 31 जनवरी के बीच) अदाणी समूह की कंपनियों ने 5.6 लाख करोड़ रुपये यानी 29 फीसदी गंवाए, जब हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट सामने आई। इस रिपोर्ट में समूह पर कई आरोप लगाए गए हैं।

इस महीने भी अदाणी समूह के शेयरों की बाजार कीमत में गिरावट जारी है, जिससे एमएससीआई ईएम इंडेक्स में भारत के भारांक पर और दबाव बढ़ सकता है। एमएससीआई इंडेक्स में ज्यादा भारांक से वैश्विक ईटीएफ से अरबों डॉलर का निवेश हासिल करने में मदद मिल सकती है।

नुवामा रिसर्च के प्रमुख (ऑल्टरनेटिव ऐंड क्वांटिटेटिव रिसर्च) अभिलाष पगारिया ने कहा, भारांक अब मौजूदा स्तर के करीब एकीकृत हो सकता है। उन्होंने कहा, भारत का भारांक नवंबर में रिकॉर्ड स्तर तक चढ़ गया था, जब यहां अन्य उभरते बाजारों के मुकाबले खासी तेजी आई थी। तब से हमारे बाजारों ने कमजोर प्रदर्शन किया है। भारत का मूल्यांकन अभी भी अन्य उभरते बाजारों के मुकाबले प्रीमियम पर है और एतिहासिक स्तर के मुकाबले भी। ऐसे में मौजूदा स्तर से भारांक में खासी बढ़ोतरी चुनौतीपूर्ण होगी।

यह भी पढ़ें: Adani Group stocks: अदाणी समूह की कंपनियों का कंबाइंड मार्केट कैप हुआ आधा

करीब एक दशक तक एमएससीआई ईएम इंडेक्स में भारत का भारांक 8 फीसदी से नीचे रहा है। पिछले दो वर्षों मे भारत का भारांक दोगुना हो गया क्योंकि बाजारों का आकार बढ़ा और देसी कंपनियों में एफपीआई के लिए निवेश की खासी गुंजाइश बनी, जब सरकार ने नियमों में बदलाव किया।

एक विदेशी बैंक के विश्लेषक ने कहा, पिछले साल हमने चीन में बेची और भारत में खरीदो का नजरिया देखा। कई वैश्विक फंडों ने चीन की जगह भारत का रुख किया क्योंकि वहां नियामकीय समस्या थी। इस साल चीन में काफी सुधार हुआ है, वहीं भारत में एफपीआई के लिए घटनाक्रम पर चिंता है। पिछले हफ्ते सबसे ऊंचे बाजार पूंजीकरण के मामले में भारतीय बाजार पांच अग्रणी देशों की सूची से बाहर हो गए।

Advertisement
First Published - February 6, 2023 | 10:01 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement