कार बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी मारुति सुजूकी का शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 4.1 फीसदी बढ़कर 3,879 करोड़ रुपये हो गया। मगर नई श्रम संहिता के मद्देनजर तिमाही के दौरान 593.9 करोड़ रुपये के एकमुश्त प्रावधान से मुनाफा प्रभावित हुआ।
इस दौरान कंपनी की आय 28.7 फीसदी बढ़कर 49,904 करोड़ रुपये हो गई जो अब तक की उसकी सर्वाधिक तिमाही आय है। इसे मुख्य तौर पर रिकॉर्ड बिक्री से बल मिला। तिमाही के दौरान घरेलू बाजार में कंपनी ने 5,64,669 वाहनों की बिक्री की।
मारुति ने कहा कि भारतीय कार बाजार में और विशेष रूप से छोटी कारों की बिक्री में जबरदस्त सुधार हुआ है। एक साल पहले की समान तिमाही में कंपनी ने 4,66,993 कारों की बिक्री की थी। इस प्रकार चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में कंपनी ने एक साल पहले की समान तिमाही के मुकाबले 97,676 अधिक कारों की बिक्री की। इसमें 18 फीसदी जीएसटी वाली छोटी कारों का योगदान 68,328 वाहनों का रहा।
तिमाही के दौरान कंपनी का निर्यात भी बढ़कर 1,03,100 वाहन हो गया जो एक साल पहले 99,220 वाहन रहा था। मारुति का शेयर बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर बुधवार को 2.3 फीसदी फिसल गया।
आय और शुद्ध लाभ दोनों मामले में मारुति के नतीजे ब्लूमबर्ग के विश्लेषकों के अनुमान से कमतर रहे। कंपनी ने कहा कि तिमाही के दौरान प्लैटिनम समूह की धातुओं, एल्युमीनियम और तांबे जैसी धातुओं के मामले में कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
मारुति सुजूकी के वरिष्ठ कार्याधिकारी (कॉरपोरेट मामले) राहुल भारती ने कहा कि सभी श्रेणियों में दमदार मांग दिख रही है। उन्होंने कहा, ‘हमें सभी श्रेणियों में अच्छी मांग दिख रही है। छोटी कार श्रेणी पहले नकारात्मक वृद्धि दायरे में थी, लेकिन अब वह सकारात्मक दायरे में आ गई है और उसकी वृद्धि बड़ी कार श्रेणी के मुकाबले अधिक है।’
कुल बिक्री में पहली बार कार खरीदने वालों की हिस्सेदारी बढ़ रही है। भारती ने कहा, ‘हमने पहली बार कार खरीदने वालों की 6 से 7 फीसदी हिस्सेदारी दर्ज की है जो एक दमदार संकेत है। बड़ी तादाद में दोपहिया वाहन चलाने वाले लोग कार खरीद रहे हैं।’
साल 2025 मारुति के लिए ऐसा दूसरा कैलेंडर वर्ष रहा जब उसका सालाना उत्पादन 20 लाख वाहन के पार पहुंच गया। कंपनी ने उम्मीद जताई है कि सालाना 2.5 लाख वाहनों की उत्पादन क्षमता वाले उसके दो नए कारखाने जल्द ही चालू हो जाएंगे। भारती ने कहा कि पूंजीगत खर्च के मोर्चे पर सालाना रफ्तार 10,000 करोड़ रुपये की है। उन्होंने कहा, ‘अगर मांग दिखेगी तो हम यह सुनिश्चित करेंगे कि आपूर्ति में कोई कमी न होने पाए। नए कारखाने लगाने के लिए हमारे पास रकम की कोई कमी नहीं है।’
जहां तक दुर्लभ मैग्नेट की आपूर्ति का सवाल है तो मारुति का कहना है कि उसका असर मामूली रहा। कंपनी ने दोहराया कि वह जल्द ही बाजार में अपना इलेक्ट्रिक वाहन लाने की तैयारी कर रही है।
वित्त वर्ष 2026 की अप्रैल से दिसंबर की अवधि में मारुति ने 9 महीनों का अब तक का सर्वाधिक वॉल्यूम, शुद्ध बिक्री और शुद्ध लाभ दर्ज किया। इस दौरान उसने 17,46,504 वाहनों की बिक्री की जो एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 7 फीसदी अधिक है। इसी प्रकार शुद्ध बिक्री में 16.7 फीसदी और शुद्ध मुनाफे में करीब 4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।