PhonePe IPO: फोनपे (PhonePe) के आगामी आईपीओ में उसके मौजूदा शेयरधारक वॉलमार्ट, टाइगर ग्लोबल और माइक्रोसॉफ्ट ग्लोबल फाइनेंस करीब ₹10,115 करोड़ की हिस्सेदारी बेचेंगे। यह जानकारी फिनटेक कंपनी की ओर से फाइल अपडेटेड ड्राफ्ट दस्तावेजों (UDRHP) में सामने आई है।
फोनपे का यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर-फॉर-सेल (OFS) होगा, यानी इसमें कंपनी कोई नया प्राथमिक पूंजी (फ्रेश कैपिटल) नहीं जुटाएगी। इस आईपीओ के जरिए केवल मौजूदा निवेशक ही अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे।
प्रस्तावित आईपीओ (IPO) में कुल 5.06 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री शामिल है। यह पूरा इश्यू ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। इसमें मौजूदा निवेशक अपने शेयर बेचेंगे। फोनपे के प्रमोटर WM Digital कॉमर्स होल्डिंग्स (जो वॉलमार्ट इंटरनेशनल होल्डिंग्स के स्वामित्व में है) करीब 4.6 करोड़ शेयर बेचने की योजना बना रहे हैं। इसके अलावा टाइगर ग्लोबल करीब 10.39 लाख शेयर और माइक्रोसॉफ्ट करीब 36.78 लाख शेयर बेचेंगे। बेंगलुरु स्थित फोनपे में वॉलमार्ट की हिस्सेदारी 71.77% है। वहीं जनरल अटलांटिक के पास 8.98% और हेडस्टेड के पास 5.73% हिस्सेदारी है।
कंपनी के सह-संस्थापक समीऱ निगम और राहुल चारी के पास फोनपे में 2.55-2.55 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यह फाइलिंग ऐसे समय आई है, जब एक दिन पहले ही फोनपे को सेबी से आईपीओ की मंजूरी मिल चुकी है। खबरों के मुताबिक, फोनपे इस आईपीओ के जरिए करीब ₹12,000 करोड़ (लगभग 1.35 अरब डॉलर) जुटाना चाहता है। कंपनी का अनुमानित वैल्यूशन करीब 15 अरब डॉलर बताया जा रहा है।
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फोनपे भारत के डिजिटल पेमेंट्स बाजार में UPI लेनदेन के मामले में 45 फीसदी से ज्यादा की हिस्सेदारी के साथ लीड कर रही है। NPCI के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में कंपनी ने 9.8 अरब ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए।
वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का रेवेन्यू 7,115 करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर 40% की बढ़ोतरी दर्शाता है। इस दौरान कंपनी फ्री कैश फ्लो पॉजिटिव भी हो गई, जिसमें 1,202 करोड़ रुपये का ऑपरेटिंग कैश फ्लो रहा। कंपनी का एडजस्टेड मुनाफा (ESOP लागत को छोड़कर) बढ़कर 630 करोड़ रुपये हो गया, जो तीन गुना से भी अधिक है।
फोनपे की पब्लिक लिस्टिंग भारत के डिजिटल पेमेंट्स सेक्टर के लिए एक अहम बेंचमार्क तय करेगी और इससे पब्लिक मार्केट में उतरने की तैयारी कर रहे अन्य फिनटेक यूनिकॉर्न्स के लिए भी रास्ता खुल सकता है।