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साइबर खतरों के बीच जरूरी है डेटा संरक्षण कानून : मेघवाल

Last Updated- December 11, 2022 | 5:01 PM IST

कोरोना महामारी के दौरान इंटरनेट जितना काम आया उतने ही साइबर खतरे भी लोगों के सामने आए हैं। निजता में सेंध का खतरा इसमें सबसे बड़ा है, जिसका अहसास लॉकडाउन के दौरान लगभग सभी को हुआ। इस तरह के खतरों से बचाने के लिए पेश निजी डेटा संरक्षण विधेयक संयुक्त संसदीय समिति की आपत्तियों के बाद बेशक वापस लेना पड़ा है मगर लगातार बढ़ते साइबर खतरों को देखते हुए सरकार जल्द ही इसे फिर पेश करेगी। केंद्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने शुक्रवार को कहा कि जरूरी संशोधन जल्द से जल्द कर यह अहम विधेयक पेश किया जाएगा क्योंकि यह मौजूदा दौर के सबसे जरूरी कानूनों में एक है।
चार साल की चर्चा और मशक्कत के बाद सरकार ने 3 अगस्त को निजी डेटा संरक्षण विधेयक, 2019 एकाएक वापस ले लिया। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संयुक्त संसदीय समिति द्वारा 81 संशोधनों की सिफारिश को इसकी वजह बताया।
मेघवाल ने साइबर दुनिया के विभिन्न पहलुओं पर एक सम्मेलन में इसी की जिक्र करते हुए कहा कि साइबर जगत पर लोगों की निर्भरता जितनी बढ़ती जा रही है, खतरे भी उतने ही बड़े होते जा रहे हैं। आए दिन आने वाली डेटा चोरी की घटनाओं की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि इससे बचने के लिए कानून को चाकचौबंद होना चाहिए।
‘डायनैमिक्स ऐंड पैराडाइम्स ऑफ साइबर वर्ल्ड’ विषय पर आज शुरू दो दिन के सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ अधिकारी इंद्रेश कुमार ने कहा युद्ध अब जमीन पर कम और साइबर दुनिया में ज्यादा लड़े जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस देश को ताकतवर बनना है उसे साइबर खतरों का ध्यान रखते हुए उससे लगातार लड़ना होगा। कार्यक्रम में आए देश-विदेश के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की राय थी कि भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश में आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे साइबर अपराधों के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के साथ ठोस रणनीति भी अपनानी होगी।

 

First Published - August 6, 2022 | 2:33 AM IST

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