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भारत को सीख लेनेे की जरूरत

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Last Updated- December 12, 2022 | 12:12 AM IST

चीन ने संकट से घिरे बिजली क्षेत्र के लिए बड़े नीतिगत बदलाव की घोषणा करते हुए कोयला से चलने वाले बिजली संयंत्रों को अपन औद्योगिक और वाणिज्यिक ग्राहकों से बाजार से जुड़े दाम लेने की अनुमति दे दी है।
चीन के राष्ट्रीय विकास और सुधार आयोग (एनडीआरसी) ने कहा है कि कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों से उत्पादित बिजली की कीमत 15 अक्टूबर से बाजार में कारोबार के मुताबिक तय होगी।  इसके माध्यम से कोयले की ज्यादा लागत का बोझ बिजली की अंतिम कीमत पर डाला गया है और इसे चीन के बिजली क्षेत्र में बड़ा सुधार माना जा रहा है।
भारत भी कोयला और बिजली संकट से गुजर रहा है, जिसे चीन के कदमों से सीखने की जरूरत है क्योंकि घरेलू कोयले की कमी सिर्फ बिजली क्षेत्र के लिए चिंता का विषय नहीं है। अगर ईंधन के वैश्विक दाम में तेजी होने पर बिजली की खरीद और बिक्री में इस तरह के लचीलेपन की अनुमति दी जाती है, तो क्या बिजली उत्पादक और गैर घरेलू और गैर कृषि उपभोक्ता बेहतर स्थिति में होंगे और क्षमता का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा? उदाहरण के लिए टाटा पावर के मुंद्रा बिजली संयंत्र की क्षमता 4,000 मेगावॉट है, जो आयातित कोयले का इस्तेमाल करता है, लेकिन वैश्विक दाम में तेजी की वजह से ऐसी स्थिति पैदा हो गई कि खरीदारों ने बढ़ी लागत या ईंधन की लागत का भुगतान कंपनी को करने से इनकार कर दिया।  टाटा पावर के मुख्य कार्याधिकारी और एमडी प्रवीर सिन्हा ने सितंबर में एक साक्षात्कार में कहा था कि नियत मूल्य समझौते में कुछ आयातित कोयले पर आधारित संयंत्रों का कारोबार पूरी तरह अव्यावहारिक हो गया है।
केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि स्थिति में सुधार तक आयातित कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को बिजली एक्सचेंजों के माध्यम से परिचालन और आपूर्ति की अनुमति दी जा सकती है। सिन्हा ने कहा कि यह अंतरिम समाधान है, लेकिन इसके लिए स्थाई समाधान निकालने की जरूरत है।
सोमवार को कंपनी ने बिजली खरीदने वाले 5 राज्यों को 5.5 रुपये प्रति यूनिट के भाव बिजली देने की पेशकश की। राज्य में बिजली की कमी की वजह से पंजाब इस दर पर खरीदने को राजी हो गया, लेकिन उसकी खरीद की मात्रा 500 मेगावॉट है, जो टाटा संयंत्र की 4,000 मेगावॉट क्षमता का महज 12.5 प्रतिशत है। कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक सबसे बड़ा खरीदार गुजरात है, जो 47.5 प्रतिशत बिजली खरीदता है। अगला महाराष्ट्र है, जिसे 20 प्रतिशत बिजली मिलती है।
बिजली खरीदने वाले एक प्रमुख राज्य, जो एक दिन के आगे के बाजार से 13 रुपये प्रति यूनिट के भाव बिजली खरीद रहा है, के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अंतरिम उपाय 14 साल के बिजली खरीद समझौतों (पीपीए) के बारे में तय नहीं कर सकते। हमें 5.5 रुपये के भाव बिजली खरीदने का फैसला अभी करना है, लेकिन हम पूरक पीपीए पर भी काम कर रहे हैं।

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First Published - October 16, 2021 | 12:12 AM IST

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