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संसद के शीतकालीन सत्र में 18 विधेयक सूचीबद्ध, वक्फ संशोधन और तटीय नौवहन विधेयक प्रमुख

एक देश, एक चुनाव को लेकर राम नाथ कोविंद समिति की रिपोर्ट पर आधारित विधेयक, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पहले ही मंजूरी दे दी थी, इस सत्र में कार्यसूची में शामिल नहीं है।

Last Updated- November 21, 2024 | 11:36 PM IST
Parliament

सरकार सोमवार को शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में पांच नए विधेयक पेश करेगी। उसने वक्फ संशोधन विधेयक को भी विचार-विमर्श के बाद दोनों सदनों से पारित कराने के वास्ते इसी सत्र में पेश करने के लिए सूचीबद्ध किया है। इस विधेयक से संबंधित रिपोर्ट संयुक्त संसदीय समिति द्वारा संसद में रखी जाएगी।

एक देश, एक चुनाव को लेकर राम नाथ कोविंद समिति की रिपोर्ट पर आधारित विधेयक, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पहले ही मंजूरी दे दी थी, इस सत्र में कार्यसूची में शामिल नहीं है। हालांकि सूत्रों ने दावा किया कि सरकार इस विधेयक को भी इसी सत्र के दौरान पेश कर सकती है। शीतकालीन सत्र के दौरान 19 बैठकें होंगी और यह 20 दिसंबर को समाप्त होगा।

शीतकालीन सत्र के लिए सरकार ने लोक सभा और राज्य सभा सचिवालयों के कामकाज की अपनी अस्थायी सूची में 18 विधेयक सूचीबद्ध किए हैं, जिनमें 13 पहले से लंबित हैं। इस सूची में जो नए विधेयक शामिल हैं, उनमें तटीय नौवहन भी है। इसका उद्देश्य तटीय व्यापार को बढ़ावा देना और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा वाणिज्यिक जरूरतों के लिए भारतीय नागरिकों द्वारा संचालित जहाजों को प्रोत्साहित करना है।

इसके अलावा भारतीय बंदरगाह विधेयक भी सूची में नया विधेयक है, जिसका मकसद भारत के अंतरराष्ट्रीय दायित्वों एवं वैधानिक बाध्यताओं के अनुरूप बंदरगाहों के संरक्षण, सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण के उपाय तलाशना है। मर्चेंट शिपिंग विधेयक और राष्ट्रीय सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना से संबंधित विधेयक भी सूची में है।

पंजाब अदालत (संशोधन) विधेयक भी कतार में है। इसके तहत पंजाब अदालत अधिनियम 1918 के अनुच्छेद 39(1)(ए) में संशोधन किया जाएगा। इसका उद्देश्य दिल्ली जिला न्यायालयों के आर्थिक अपील क्षेत्राधिकार को मौजूदा 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करना है। यही नहीं, केंद्र सरकार 2024-25 के लिए अनुदान की पूरक मांगों के पहले बैच के लिए संसद की मंजूरी इसी सत्र में चाहेगी।

वक्फ संशोधन विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति की गुरुवार को हुई बैठक में विपक्षी सदस्यों ने समिति का कार्यकाल बढ़ाए जाने पर जोर दिया। उनका तर्क था कि मसौदा कानून में किए गए बदलावों का अध्ययन करने के लिए उन्हें अभी कुछ और समय चाहिए। सरकार ने इस विधेयक को मॉनसून सत्र में पेश किया था, जिसे लोक सभा ने संयुक्त संसदीय समिति के पास विचारार्थ भेज दिया था। समिति से कहा गया था कि वह इससे संबंधित अपनी रिपोर्ट संसद के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन पेश करे।

गुरुवार की बैठक में समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने ऐलान किया कि यह इस समिति की अंतिम बैठक होगी और इससे संबंधित मसौदा रिपोर्ट सदस्यों को जल्द ही मिल जाएगी। आपदा प्रबंधन (संशोधन ) विधेयक, गोवा के विधान सभा क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति के प्रतिनिधित्व का पुनर्समायोजन विधेयक, समुद्र द्वारा माल की ढुलाई विधेयक 2024, रेलवे (संशोधन) विधेयक और बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक भी लंबित हैं। तीन विधेयक राज्य सभा में भी पास होने का इंतजार देख रहे हैं।

First Published - November 21, 2024 | 11:30 PM IST

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