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मूंगफली की खेती को बढ़ावा देगी योगी सरकार, झांसी को क्लस्टर के रूप में विकसित करने की तैयारी

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि मूंगफली का तेल निकाला जाता है इसका उपयोग खाना पकाने और सौंदर्य उत्पादों में किया जाता है।

Last Updated- September 11, 2024 | 9:35 PM IST

देश दुनिया में अपने सॉफ्ट टॉय के लिए मशहूर उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड का झांसी जिला अब मूंगफली (Groundnut) के लिए भी जाना जाएगा।

उन्नत खेती के लिए विश्व बैंक (World Bank) की मदद से चलाई जा रही यूपी एग्रीज योजना (UP Agris Scheme) के तहत झांसी को मूंगफली क्लस्टर के रूप में विकसित करने की योजना है। इसके बाद झांसी की मूंगफली न सिर्फ देश के प्रमुख बाजारों में उपलब्ध होगी,बल्कि विदेशों खासकर दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में इसका निर्यात हो सकेगा।

इससे पहले योगी सरकार झांसी में बनने वाले सॉफ्ट टॉयज को एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) के तहत लाकर इसके निर्माण को बढ़ावा दे चुकी है।

कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बहुपयोगी होने के नाते पिछले एक दशक में उत्तर प्रदेश के किसानों ने मूंगफली की खेती के प्रति रुचि भी दिखाई है। इसका असर प्रति हेक्टेयर, प्रति किलोग्राम उत्पादन पर पड़ा है। साथ ही मूंगफली के रकबे में भी अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।

डायरेक्टर ऑफ इकोनॉमिक्स एंड स्टेट मिनिस्ट्री ऑफ एग्रीकल्चर एंड फार्मर वेलफेयर के 2013-14 से 2015-16 के औसत के मुताबिक भारत में प्रति हेक्टेयर मूंगफली की उपज 1542 किलोग्राम थी। इसकी तुलना में उत्तर प्रदेश की उपज मात्र 809 किलोग्राम थी। उस समय देश के के कुल 49.3 लाख हेक्टेयर रकबे पर मूंगफली की खेती होती थी। तब कुल रकबे में उत्तर प्रदेश का योगदान सिर्फ 2 फीसदी था।

करीब एक दशक में हालात तेजी से बदले हैं। इस दौरान उत्तर प्रदेश में मूंगफली का का रकबा बढ़कर करीब 4.7 फीसदी हो गया। यह वृद्धि ढाई गुना से अधिक की है।

गौरतलब है कि देश में सर्वाधिक मूंगफली का उत्पादन गुजरात में होता है। यहां करीब 20 लाख हेक्टेयर में देश के कुल उत्पादन का 47 फीसदी मूंगफली होती है। इसके बाद राजस्थान और तमिलनाडु का नंबर आता है। मूंगफली उत्पादन में इन राज्यों की हिस्सेदारी क्रमशः 16 और 10 फीसदी है।

किसानों के इसी रुझान और बहुउपयोगी मूंगफली की स्थानीय बाजार और इंडोनेशिया, वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया, फिलीपींस आदि दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में इसकी मांग को देखते हुए सरकार विश्व बैंक की मदद से यूपी एग्रीज योजना के तहत झांसी को मूंगफली के क्लस्टर के रूप में विकसित करना चाहती है।

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि मूंगफली का तेल निकाला जाता है इसका उपयोग खाना पकाने और सौंदर्य उत्पादों में किया जाता है। मूंगफली के तेल में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन ई होता है। इसलिए यह स्किन और बालों के लिए फायदेमंद है। प्रोटीन और ऊर्जा का बेहतर स्रोत होने की वजह से इसका उपयोग पशु आहार में भी किया जाता है। इससे पीनेट चीज और बटर भी बनती है साथ ही करी, चटनी, सलाद और स्नैक्स के रूप में भी मूंगफली का उपयोग होता है।

इसके छिलके का उपयोग ईंधन के रूप में भी होता है। कुछ कंपनियां इसे प्रति किलोग्राम की दर से खरीद भी लेती हैं। इस तरह किसानों को मूंगफली के साथ उसके छिलके के भी दाम मिलेंगे। सरकार को अनुमान है कि इसकी एक्स फैक्ट्री कीमत प्रति किलोग्राम 5 रुपए तक होगी।

First Published - September 11, 2024 | 3:54 PM IST

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