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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन 5 साल और बढ़ा, भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव

मातृत्व एवं शिशु मृत्यु दर में कमी और कोविड टीकाकरण में अहम भूमिका। 2030 तक एसडीजी स्वास्थ्य लक्ष्यों को समय से पहले हासिल करने की उम्मीद।

Last Updated- January 22, 2025 | 11:16 PM IST
2.5% of GDP will be spent on health by 2025

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) को 5 साल और बढ़ाने का फैसला किया है। मंत्रिमंडल ने पिछले 3 साल के दौरान योजना की प्रगति की समीक्षा करने के बाद योजना की अवधि बढ़ाई है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनएचआरएम) की शुरुआत 2005 में की गई थी, जिसे कई बार बढ़ाया गया। एनएचएम की अवधि आखिरी बार 2021 में बढ़ाकर 2026 तक के लिए कर दिया गया था।

मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य पर योजना के असर को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। सरकार ने एक बयान में कहा है, ‘भारत में स्वास्थ्य सुधारों, खासकर कोविड-19 महामारी के दौरान में मिशन की भूमिका अहम रही है। इसने स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंच के भीतर बनाने और गुणवत्तायुक्त स्वास्थ सेवाएं देने में मदद पहुंचाई है।’ गोयल ने कहा कि एनएचएम की चल रही कवायदों की वजह से भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में अहम बदलाव हुआ है और भारत 2030 तक के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के तहत स्वास्थ्य लक्ष्यों पर सही दिशा और समय से आगे चल रहा है।

पिछले 3 साल के दौरान योजना के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए गोयल ने कहा कि एनएचएम से विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जिसमें मातृत्व एवं शिशु देखभाल, बीमारी उन्मूलन और स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचा शामिल है। मातृत्व मृत्यु अनुपात (एमएमआर) 2014-16 के 1 लाख पर 130 से 25 प्रतिशत घटकर 2018-20 में 1 लाख पर 97 रह गया है। वहीं शिशु मृत्यु दर 2014 में 1,000 पर 39 था, जो 2020 में घटकर 1,000 पर करीब 28 रह गया है। बयान में कहा गया है, ‘इन सुधारों से संकेत मिलता है कि भारत मातृत्व, शिशु, नवजात मृत्यु दर के मामले में एसडीजी रे 2030 तक के लक्ष्यों को समय से पहले पूरा करने की दिशा में है।’

बयान में कहा गया है कि एनएचएम में 2021-22 से 2023-24 के दौरान 12 लाख से ज्यादा अतिरिक्त स्वास्थ्य कर्मियों ने काम किया। इसमें जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर्स, स्पेशलिस्ट्स, स्टाफ नर्स, एएनएम, आयुष चिकित्सक, सहायक स्वास्थ्य कर्मी और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधक शामिल हैं।

बयान में कहा गया है कि स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं और कर्मचारियों के मौजूदा नेटवर्क के माध्यम से कोविड-19 टीके की 2.2 अरब से ज्यादा खुराक जनवरी 2021 से मार्च 2024 के बीच दी गई। गोयल ने कहा कि एनएचएम से गैर संचारी रोगों (एनसीडी) को घटाने और उनकी निगरानी रखने में मदद मिली है। गोयल ने कहा, ‘राष्ट्रीय क्षयरोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत क्षय रोग के मामले 2015 के 1 लाख आबादी पर 237 से घटकर 2023 में 195 रह गए हैं।’

First Published - January 22, 2025 | 11:16 PM IST

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