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पद छोड़ने की तैयारी में कोश्यारी

महाराष्ट्र के राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पद छोड़ने की इच्छा जताई

Last Updated- January 23, 2023 | 9:54 PM IST
Koshyari in preparation to quit
BS

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने अपने पद से मुक्त होने की इच्छा जताई है। उनकी इस घोषणा के साथ ही राज्यपाल का एक और पद खाली हो सकता है। उन्होंने घोषणा की है कि वह अपने पद से मुक्त होना चाहते हैं और राजनीति से अलग होकर ‘लेखन और पढ़ने’ का काम करना चाहते हैं। कोश्यारी ने रविवार को मुंबई में कहा कि उन्होंने अपने फैसले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अवगत करा दिया जब वह पिछले सप्ताह कुछ समय के लिए मुंबई में थे।

एक राज्यपाल के पांच साल के सामान्य कार्यकाल के उलट कोश्यारी ने लगभग तीन साल (उन्हें 2019 में राज्यपाल नियुक्त किया गया था) तक सेवाएं दी हैं। हालांकि वह तीन साल काफी सुर्खियों में भी रहे और कुछ दिन पहले तक विपक्षी दल, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना उन्हें वापस बुलाने या इस्तीफे की मांग कर रहा था।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद टकराव के कई मोड़ सामने आए, जब तत्कालीन संयुक्त शिवसेना ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा, लेकिन राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा), कांग्रेस और अन्य के साथ समझौता करने के बाद अपने रास्ते अलग कर लिए। ऐसे में शिवसेना के चुनावी सहयोगी को काफी झटका लगा।

ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने के बाद कई मौकों पर कोश्यारी ने एड़ी-चोटी का जोर लगाया कि महाराष्ट्र के विधानपरिषद चुनाव टले और यहां तक कि उन्होंने कोविड का हवाला भी दे दिया। उस वक्त ठाकरे अधर में लटके हुए थे क्योंकि उन्हें छह महीने की अवधि के भीतर ही मुख्यमंत्री बने रहने के लिए विधान परिषद का विधायक बनना था।

मई 2020 में आखिरकार महाराष्ट्र विधान परिषद के चुनाव हुए और ठाकरे निर्विरोध चुने गए। लेकिन इसके लिए कोश्यारी के पास राज्य कैबिनेट (20 और 27 अप्रैल, 2020) से दो सिफारिशें मिलीं कि उद्धव को उच्च सदन में नामित किया जाना चाहिए। आखिरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत रूप से उद्धव के एक कॉल का जवाब दिया और फिर राज्यपाल को निर्वाचन आयोग से चुनाव कराने की सिफारिश करने के लिए राजी किया।

महाराष्ट्र अकेला ऐसा राज्य नहीं है जहां राज्यपाल का पद खाली होने वाला है। मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक का कार्यकाल पिछले साल सितंबर में समाप्त हो गया था और अक्टूबर से अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल ब्रिगेडियर बीडी मिश्रा दोहरा प्रभार संभाल रहे हैं। उनका अपना कार्यकाल भी अक्टूबर में समाप्त हो गया था।

मेघालय में मार्च में नई सरकार देखने को मिलेगी और संभवत: तब नए राज्यपाल की नियुक्ति की जाएगी। असम और सिक्किम के राज्यपाल का कार्यकाल भी समाप्त हो गया है। असम के राज्यपाल जगदीश मुखी नगालैंड का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं जहां चुनाव होने वाले हैं और ये चुनाव मेघालय के चुनाव के साथ ही होंगे। सिक्किम के राज्यपाल गंगा प्रसाद को अगस्त 2018 में राज्यपाल के पद पर नियुक्त किया गया था, लेकिन इससे पहले उन्होंने पहली बार अक्टूबर 2017 में मेघालय के राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। उन्होंने मणिपुर के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला था।

यह भी पढ़ें: मोदी मुंबई को देंगे 38,000 करोड़ रुपए की चुनावी सौगात, दौरा सफल बनाने के लिए भाजपा ने झोंकी अपनी पूरी ताकत

तेलंगाना के राज्यपाल, तमिलसाई सुंदरराजन, फरवरी 2021 से पुदुच्चेरी के उपराज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं, जब किरण बेदी को उनका कार्यकाल पूरा होने से पहले ही हटा दिया गया था। ओडिशा के राज्यपाल गणेशी लाल का कार्यकाल इस साल मई में खत्म होगा।

पंजाब के वर्तमान राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने पहली बार अगस्त 2016 में असम के राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। तब से लगभग छह वर्षों की अवधि के दौरान उन्होंने मेघालय और तमिलनाडु के राज्यपाल के रूप में कार्य किया है। आचार्य देवव्रत के साथ भी कुछ ऐसा ही मामला है, जिन्होंने पहली बार अगस्त 2015 में राज्यपाल की शपथ ली थी, जब उन्हें हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। जुलाई 2019 में उन्हें उसी पद पर गुजरात स्थानांतरित कर दिया गया था।

First Published - January 23, 2023 | 9:53 PM IST

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