केंद्र सरकार व भारतीय जनता पार्टी ने मंत्रियों व प्रमुख नेताओं से विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार ऐंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) या वीबी-जी राम जी कानून के खिलाफ जारी विपक्ष के अभियान का जवाब देने के लिए कहा है। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने इस कानून के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है।
केंद्रीय मंत्री व लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने रविवार को पटना में कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह सरकारी योजनाओं के खिलाफ लोगों को गुमराह कर रही है। कांग्रेस खासतौर पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलने के खिलाफ लोगों को बहका रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन नई योजना वीबी-जी राम जी के नाम के बजाय इसके गुणों पर बहस करने के लिए तैयार है।
प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार पासवान ने कहा, ‘कांग्रेस और आरजेडी का दावा है कि वीबी-जी राम जी अधिनियम ने योजना के लिए समग्र बजट में उनके योगदान को बढ़ाकर राज्यों पर अतिरिक्त बोझ डाला है। क्या उन्हें थोड़ा ही एहसास कि यह देश के संघीय ढांचे की तर्ज पर सामूहिक जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।’
सूत्रों के अनुसार अन्य मंत्री और नेता आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कांग्रेस के अभियान का मुकाबला करने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। कांग्रेस ने शनिवार को हर जिले में 45 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान – मनरेगा बचाओ संग्राम शुरू किया। कांग्रेस देश के हर जिले में ग्रामीण रोजगार कानून को निरस्त करने के खिलाफ संवाददाता सम्मेलन करेगी। कांग्रेस काम करने के अधिकार और पंचायतों के अधिकार के रूप में मनरेगा बहाल करने की मांग करेगी। कांग्रेस का यह आंदोलन 25 फरवरी तक जारी रहेगा।
कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट में कहा, ‘कांग्रेस इस संघर्ष को तब तक जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है जब तक कि काम करने के अधिकार, आजीविका व जवाबदेही के अधिकार को बहाल नहीं कर लेते। इस (नरेंद्र) मोदी सरकार ने मनरेगा को खत्म कर दिया है।’
कांग्रेस नेतृत्व वाले राज्यों पंजाब और तेलंगाना ने शनिवार को बजट पूर्व बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से बजट 2026-27 में केंद्र सरकार से अतिरक्त धन की मांग की थी। उन्होंने कहा कि संसाधन के मामले में चुनौतियों का सामना कर रहे राज्यों को प्रस्तावित वीबी-जी राम जी योजना में 60:40 के अनुपात में वित्तीय बोझ सहना पड़ेगा।