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टैक्स पारदर्शिता बढ़ाने के लिए AIF, रीट्स और इनविट्स पर सरकार के नए नियम

सीबीडीटी ने रिपोर्टिंग प्रक्रिया में किया संशोधन, आय विवरण दाखिल करने की समयसीमा 15 जून तय

Last Updated- February 26, 2025 | 11:17 PM IST
income tax

ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंडों (एआईएफ), रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (रीट्स) और इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनविट्स) जैसे ट्रस्टों की तरफ से वितरित की गई आय की जानकारी देने के मामले में पारदर्शिता बढ़ाने की खातिर सरकार ने आयकर नियमों में संशोधन किया है।

24 फरवरी की अधिसूचना में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने रिपोर्टिंग का नया फॉर्म जारी किया है, जिसके तहत आय के विस्तृत खुलासे की दरकार होगी। सीबीडीटी ने आय विवरण जमा कराने की समयसारणी 30 नवंबर से बदलकर 15 जून कर दी है।

नांगिया एंडरसन एलएलपी के पार्टनर सुनील गिडवानी ने कहा, चूंकि निवेशकों को दी जाने वाली आय के आंकड़े निवेश माध्यम की कुल आय से जुड़े होते हैं और निवेशक का फॉर्म सरकारी पोर्टल से डाउनलोड करना होता है, इसलिए निवेशकों को जानकारी देने से पहले सरकार के पास फाइलिंग की तारीख को आगे बढ़ाने का मतलब बनता है।

कर उद्देश्यों के लिए, रीट्स, इनविट्स और कुछ एआईएफ जैसे व्यावसायिक ट्रस्टों को पास थ्रू दर्जा प्राप्त है और उनके द्वारा अर्जित आय पर कर नहीं लगाया जाता है। ऐसे निवेशों के मामले में निवेशकों को सीधे उनकी आय के हिस्से पर कर लगाया जाता है जबकि व्यावसायिक ट्रस्ट उनकी आय का खुलासा करते हुए एक प्रमाण पत्र जारी करता है।

संशोधित मानदंडों में कहा गया है कि आय का विवरण भी ऑनलाइन दाखिल किया जाना है और यूनिटधारकों को दिया जाने वाला फॉर्म भी ऑनलाइन तैयार किया जाना है। इसके अलावा, नए मानदंडों में यूनिटों पर वितरित लाभांश और आय का अलग-अलग खुलासा करना भी अनिवार्य किया गया है।

गिडवानी ने कहा, धारा 10 (23एफसी) में उल्लिखित लाभांश का खुलासा नए फॉर्म में लाभांश भुगतान करने वाली कंपनियों व अन्य कंपनियों को करना आवश्यक है, जिन्होंने 22 फीसदी की कम कर की दर का विकल्प चुना है। इसी तरह, धारा 56(2)(12) में उल्लिखित इकाइयों पर वितरित आय को अलग से खुलासा किया जाना है। यह पिछले वित्त वर्ष में प्रभावी कर के लिए लाई गई यूनिट लागत से अधिक वितरण से संबंधित है।

उद्योग विशेषज्ञों ने कहा कि ये संशोधन वित्त अधिनियम के तहत पूंजीगत लाभ कर प्रावधानों में किए गए बदलावों को दर्शाते हैं और भाषा और खुलासा मानदंडों को सरल बनाते हैं। ये मानदंड 24 फरवरी से प्रभावी हो गए हैं।

 

First Published - February 26, 2025 | 11:12 PM IST

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