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मानवयुक्त विमानों की बनी रहेगी अहमियत : वायु सेना प्रमुख

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वायु सेना रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन द्वारा विकसित किए जा रहे ‘घातक’ मानव रहित लड़ाकू हवाई वाहन का पूरी तरह से समर्थन कर रही है

Last Updated- October 03, 2025 | 10:53 PM IST
file photo

वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने दुनिया में युद्ध के बदलते तौर-तरीकों को ध्यान में रखते हुए एक तकनीकी एवं क्षमतागत कार्य योजना तैयार की है। सिंह ने कहा कि ‘विजन 2047’ शीर्षक नाम की इस कार्य योजना को वास्तविक शक्ल देने के लिए वायु सेना सक्रियता के साथ कदम बढ़ा रही है। वायु सेना प्रमुख ने यह भी कहा कि निकट भविष्य में मानव रहित प्रणाली का मानव चालित लड़ाकू विमानों की पूरी तरह जगह ले पाना मुमकिन नहीं होगा।

उन्होंने 93वें वायु सेना दिवस से पहले राष्ट्रीय राजधानी में संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘हम स्वयं को एक बहु-आयामी अंतरिक्ष बल (एरोस्पेस फोर्स) में तब्दील कर रहे हैं। यह एक ऐसी ताकत होगी जो जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में सक्षम होगी और संघर्ष में एक सक्षम सैन्य प्रणाली के रूप में काम करेगी।’ सिंह ने स्पष्ट किया कि अंतिम रूप से तैयार कार्य योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि यह आने वाले समय में नई तकनीक एवं क्षमताओं के प्रभाव के भारतीय वायु सेना के इस आकलन को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि वायु सेना दुनिया में हवाई मारक क्षमता हो रही प्रगति पर गंभीरता से नजरें टिकाए हुए है।

सिंह ने इस कार्य योजना की गूढ़ बातों का खुलासा करने से इनकार किया मगर उन्होंने वायु सेना की भविष्य की प्राथमिकताओं के बारे में जरूर संकेत दिए। उन्होंने कहा कि फिलहाल दुनिया में छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों पर चल रहे कार्यक्रम मानवयुक्त प्रणाली पर आधारित हैं। उन्होंने कहा, ‘मानवयुक्त प्लेटफॉर्म का महत्त्व कम होने वाला नहीं है। मैं केवल आठ से दस वर्षों की नहीं बल्कि उससे भी आगे की बात कर रहा हूं। मानव युक्त प्रणाली का प्रभाव फीका पड़ने वाला नहीं है।’

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वायु सेना रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित किए जा रहे ‘घातक’ मानव रहित लड़ाकू हवाई वाहन (यूसीएवी) का पूरी तरह से समर्थन कर रही है। उन्होंने कहा, ‘हां, हमें मानव रहित प्रणालियों की दिशा में भी काम करना होगा। कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां आप मानव जीवन को जोखिम में नहीं डाल सकते और वहां मानव रहित तकनीक अधिक प्रभावी हो सकते हैं। इस दिशा में भी काम हो रहा है और कई शोध एवं विकास परियोजनाएं चल रही हैं।’

उन्होंने कहा कि पारंपरिक मानव रहित यान के अलावा लड़ाकू और हथियार-चालित यूएवी हासिल करने की व्यवस्था भी मौजूद हैं। सिंह ने कहा, ‘यूसीएवी कार्यक्रम पहले से ही चल रहा है और हम इसका पूरी तरह समर्थन कर रहे हैं। हम समझते हैं कि यह हमारी समग्र बल संरचना का हिस्सा बनेगा। विजन 2047 दस्तावेज में भी इस बात का जिक्र है। मगर मानवयुक्त लड़ाकू विमानों की जरूरत बनी रहेगी।’

देश की उत्तरी सीमाओं पर पेश चुनौतियों पर वायु सेना प्रमुख ने कहा कि सीमा से सटे इलाकों में लगभग हर दिन नए ढांचे का निर्माण हो रहा है। ‘नए उन्नत लैंडिंग ग्राउंड, नए एयरबेस तैयार किए जा रहे हैं। इस पर भी गंभीरता से विचार चल रहा है कि हम अपने सैन्य संसाधन सीमा से सटे इलाकों तक तेजी से कैसे ले जा सकते हैं। इसके अलावा, हम उन क्षेत्रों में मौजूद चुनौतियां भी दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। ये चुनौतियां पश्चिमी मोर्चे पर मौजूद चुनौतियों से काफी अलग है।’

ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान को हुए नुकसान पर पूछे गए सवाल पर वायु सेना प्रमुख ने कहा कि पाकिस्तान वायु सेना ने लगभग चार दिनों के टकराव के दौरान अमेरिकी एफ-16 लड़ाकू जेट विमानों सहित अपने 12 सैन्य साजो-सामान गंवा दिए। उन्होंने कहा कि भारतीय वायु सेना के हमलों ने कम से कम चार स्थानों पर रेडार, दो जगहों पर आदेश एवं नियंत्रण केंद्र (कमांड ऐंड कंट्रोल सेंटर) और दो स्थानों पर हवाई पट्टी (रनवे) तबाह कर दिए।

उन्होंने कहा कि तीन अलग-अलग स्टेशनों के बीच पाकिस्तान वायु सेना के तीन हैंगरों को भी निशाना बनाया गया, जिनमें एक अमेरिकी सी-130 परिवहन विमान और कम से कम चार से पांच लड़ाकू विमान क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गए। सिंह ने कहा कि उनमें अधिकांश संभवतः एफ-16 थे जिनकी जमीन पर मरम्मत चल रही थी। भारतीय वायु सेना के अनुसार सतह से हवा में मार करने वाली एक पाकिस्तानी मिसाइल  प्रणाली भी नष्ट हो गई।

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First Published - October 3, 2025 | 10:52 PM IST

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