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लुढ़कता रुपया 90 के पार पहुंचा, व्यापार करार में अनि​श्चितता, FPI की निकासी से बढ़ा दबाव

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इस साल डॉलर के मुकाबले रुपया 5 फीसदी से ज्यादा गिरा है और यह सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली ए​शियाई मुद्रा रही है

Last Updated- December 03, 2025 | 10:53 PM IST
Rupee vs Dollar

डॉलर के मुकाबले रुपया आज 90 प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया। लगातार पूंजी निकासी, अमेरिका के साथ व्यापार करार पर अनि​​​श्चितता और पिछले हफ्ते डॉलर की मजबूत मांग से रुपये में तेज गिरावट आई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मुद्रा बाजार में कम दखल से भी गिरावट को बल मिला। इस साल डॉलर के मुकाबले रुपया 5 फीसदी से ज्यादा गिरा है और यह सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली ए​शियाई मुद्रा रही है। 80 से 90 प्रति डॉलर तक पहुंचने में इसे महज 773 कारोबारी सत्र लगे।

आज कारोबार के दौरान रुपया 90.30 प्रति डॉलर के सबसे निचले स्तर पर आ गया था। इसके बाद केंद्रीय बैंक ने मुद्रा बाजार में डॉलर की बिक्री की जिससे रुपये को नुकसान थोड़ा कम करने में मदद मिली। कारोबार की सम​प्ति पर यह 90.20 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। मंगलवार को यह 89.88 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। 88.80 प्रति डॉलर के रक्षात्मक स्तर को पार करने के बाद से रुपया लगातार लुढ़कता जा रहा है।

बाजार के भागीदारों ने कहा​ कि आरबीआई द्वारा रुपये में तेज उतार चढ़ाव को रोकने के लिए दखल देने के बावजूद डॉलर की मांग बनी हुई है जिससे फिलहाल रुपये में तेज सुधार की उम्मीद कम है। मौजूदा स्तर के बाद रुपये में तेज गिरावट की आशंका भी कम है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने हाल ही में भारत के विनिमय दर व्यवस्था को ​स्थिर से क्रॉल-जैसी व्यवस्था की श्रेणी में डाल दिया है जो किसी देश और उसके व्यापार भागीदार के बीच महंगाई के अंतर को दिखाने के लिए विनिमय दर में धीरे-धीरे होने वाले समायोजन को दिखाता है। रुपये में हाल ही में आई गिरावट के बाद बार्कलेज के विदेशी मुद्रा स्ट्रेटजिस्ट ने 2026 तक के लिए रुपये का अनुमान 92 प्रति डॉलर से बढ़ाकर 94 प्रति डॉलर कर दिया।

बार्कलेज ने एक नोट में कहा है कि आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​रुपये में गिरावट को लेकर खास परेशान नहीं हैं। 21 नवंबर तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 688 अरब डॉलर था जो लगभग 11 महीने के आयात बिल की भरपाई करने के लिए पर्याप्त है।

स्टेट बैंक के समूह मुख्य आ​र्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने कहा, ‘रुपये में गिरावट भारत-अमेरिका व्यापार करार में देरी, इक्विटी बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो की बिकवाली और आरबीआई का मुद्रा बाजार में दखल देने से परहेज करने के कारण आई है।’

डीबीएस बैंक की कार्यकारी निदेशक वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव ने कहा, ‘आरबीआई के कम दखल से पता चलता है मुद्रा को अपना संतुलन बनाने दिया जाएगा ताकि आ​र्थिक बदलावों को बेहतर ढंग से दिखाया जा सके।’

आरबीएल बैंक के ट्रेजरी प्रमुख अंशुल चांडक ने कहा, ‘व्यापार कारार के बाद ही रुपये में सुधार होगा नहीं तो इस पर दबाव बना रहेगा।’

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First Published - December 3, 2025 | 10:48 PM IST

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