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भारतीय कंपनियों में IPO की होड़, 185 से ज्यादा DRHP दाखिल होने से प्राइमरी मार्केट हुआ व्यस्त

प्राइम डेटाबेस द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार पिछली बार किसी साल में इतने अधिक डीआरएचपी दा​खिल करने के मामले 1997 में देखे गए थे

Last Updated- October 03, 2025 | 10:43 PM IST
Bharat Coking Coal IPO Allotment
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय कंपनियों में आरं​भिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने की होड़ लगी है। इस साल अभी तक 185 से ज्यादा कंपनियों ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास आईपीओ विवर​णिका (डीआरएचपी) दाखिल किए हैं। यह लगभग हर कार्यदिवस में एक आईपीओ आवेदन दाखिल करने के बराबर है। इससे आगे भी प्राइमरी मार्केट काफी व्यस्त रहेगा।

प्राइम डेटाबेस द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार पिछली बार किसी साल में इतने अधिक डीआरएचपी दा​खिल करने के मामले 1997 में देखे गए थे। उस समय घरेलू आईपीओ बाजार के लिए सुनहरे दिन थे। इस साल 2023 और 2024 के पहले 9 महीनों में दा​खिल आईपओ आवेदन से भी ज्यादा डीआरएचपी दा​खिल किए गए हैं, जो कंपनियों को सूचीबद्ध कराने की होड़ को दर्शाती है। 

बाजार के भागीदारों ने आईपीओ बाजार में तेजी के ​पीछे कई कारण बताते हैं। सबसे पहले, घरेलू बाजार में घरेलू बचत से हर साल 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हो रहा है। यह पूंजी प्रवाह को खींचने के लिए नए शेयर जारी करने के लिए प्रेरित करता है। दूसरे, बाजार का दायरा विविध क्षेत्रों और भौगोलिक क्षेत्रों तक फैला हुआ है। इससे पारंपरिक उद्योगों जैसे रियल एस्टेट और स्वास्थ्य सेवा से लेकर उभरते क्षेत्रों जैसे प्रौद्योगिकी कंपनियों तक सूचीबद्धता के दायरे को व्यापक बनाता है।

प्राइम डाटाबेस के प्रबंध निदेशक प्रणव हल्दिया ने कहा कि हाल के समय में आए आईपीओ के बेहतर प्रदर्शन और छोटे-मझोले शहरों की कंपनियों की रणनीति में बदलाव से डीआरएचपी दाखिल करने के मामले बढ़े हैं। पहले छोटे शहरों में प्रवर्तक संचालित कंपनियां सूचीबद्धता में अपनी हिस्सेदारी कम करने में हिचकिचाती थीं। अब सूचीबद्ध होने के बाद प्रतिस्पर्धियों की नेटवर्थ में वृद्धि देखने के बाद अन्य फर्में भी इस ओर आक​र्षित हो रही हैं। अनुकूल बाजार मूल्यांकन भी कंपनियों को सूचीबद्ध होने के लिए और प्रोत्साहित कर रहा है।

एसबीआई कैपिटल मार्केट्स में इक्विटी कैपिटल मार्केट्स के समूह प्रमुख और कार्याकारी उपाध्यक्ष अमरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि पारंपरिक कंपनियां जो मुख्य रूप से बैंक फंडिंग पर विचार कर रही थीं वे भी अपना कुछ हिस्सा बेचकर इक्विटी पूंजी जुटाने के पक्ष में नहीं हैं।

आम तौर पर आईपीओ दाखिल करने से लेकर सूचीबद्ध होने में 5 से 12 महीने का समय लग जाता है।  आईपीओ आवेदनों की बाढ़ को देखते हुए 2026 भारतीय आईपीओ बाजार के लिए शानदार साल होने वाला है। इस साल बाजार में उठापटक के बावजूद कंपनियों ने अभी तक आईपीओ से 1.1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा जुटा चुकी हैं और 2024 के 1.6 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने के लिए तैयार है। 

दा​​खिल किए गए 185 डीआरएचपी से करीब 2.72 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है। हालांकि इन आवेदनों में मुख्य रूप से छोटी कंपनियां शामिल हैं लेकिन कई बड़े निर्गम भी पाइपलाइन में हैं। इनमें आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी, लेंसकार्ट, फोनपे, फिजिक्सवाला, पाइन लैब्स और फ्रैक्टल एनालिसिस​ शामिल हैं। लोग विशेष रूप से टाटा कैपिटल और एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के निर्गम पर नजर रख रहे हैं क्योंकि इससे बड़े आकार की लिस्टिंग के लिए माहौल तैयार हो सकता है।

First Published - October 3, 2025 | 10:43 PM IST

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