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BFSI Summit 2025: भारत बन रहा ग्लोबल बैंकों का पसंदीदा बाजार, लुभा रहे नियामकीय सुधार

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BFSI Summit 2025: बैंकरों ने यह भी कहा कि भारत का नियामकीय ढांचा अब विकास के लिहाज से ज्यादा बेहतर हो गया है

Last Updated- October 29, 2025 | 6:20 PM IST
BFSI
बाएं से दाएं- सिटी इंडिया के सीईओ के. बालासुब्रमण्यन, एचएसबीसी इंडिया के सीईओ हितेंद्र दवे और स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के भारत एवं दक्षिण एशिया के सीईओ पी.डी. सिंह

BFSI Summit 2025: दुनियाभर के दिग्गज बैंक भारत को अपने सबसे आशाजनक बाजारों में से एक के रूप में देख रहे हैं। बुधवार को मुंबई में आयोजित बिज़नेस स्टैंडर्ड बीएफएसआई इनसाइट समिट 2025 के पहले दिन एक पैनल चर्चा में सिटी, एचएसबीसी और स्टैंडर्ड चार्टर्ड के टॉप अधिकारियों ने कहा कि भारत अब दुनिया के सबसे संभावनाशील बाजारों में से एक बनता जा रहा है। उन्होंने बताया कि नियामकीय स्थिरता (regulatory predictability), अधिग्रहण फाइनेंसिंग (acquisition financing) में नए अवसर और घरेलू पूंजी बाजारों (domestic capital markets) में तेजी इसके प्रमुख कारण हैं।

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बैंकरों ने नियामकीय सुधारों का स्वागत किया

बैंकरों ने यह भी कहा कि भारत का नियामकीय ढांचा अब विकास के लिहाज से ज्यादा बेहतर हो गया है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के भारत और दक्षिण एशिया के सीईओ पी. डी. सिंह ने कहा, “हमारा रेगुलेटर अब सकारात्मक बदलाव (positive disruption) की दिशा में काम कर रहा है। वह इस समय कारोबार करने में सुगमता (ease of doing business) को बढ़ावा देने वाले कदम उठा रहा है।”

सिटी इंडिया के सीईओ के. बालासुब्रमण्यम ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक के नए ढांचे, जो विदेशी बैंकों को अधिग्रहण फाइनेंसिंग (acquisition financing) में भाग लेने की अनुमति देता है, से सिस्टम में पूंजी (capital pool) और बढ़ेगी। उन्होंने कहा, “अगर आपको किसी एक जगह कारोबार करने के लिए चुनना हो, तो वह भारत ही होगा। यह नियामकीय बदलाव सकारात्मक प्रभाव डालेगा और नकदी (rupee liquidity) का बड़ा पूल भी तैयार करेगा। हम इस फैसले से काफी संतुष्ट हैं।”

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एचएसबीसी इंडिया के सीईओ हितेंद्र दवे ने कहा कि संशोधित नियमों से सहयोग और पूंजी का फ्लो (capital flows) के नए अवसर खुलेंगे। उन्होंने कहा, “विदेशी बैंकों को अधिग्रहण फाइनेंसिंग में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल है। आरबीआई के नए दिशा निर्देश भारतीय कंपनियों के लिए फाइनेंसिंग के नए रास्ते खोलेंगे। आने वाले समय में आप कई साझेदारियां बनते हुए देखेंगे।”

दवे ने यह भी बताया कि वैश्विक बैंकों ने भारत के बाहर होने वाले विलय एवं अधिग्रहण (M&A) सौदों में और वैश्विक उपस्थिति रखने वाली भारतीय कंपनियों को सेवाएं देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

भारत में निवेश के अवसर तलाश रही ग्लोबल पूंजी

बालासुब्रमण्यम ने यह भी बताया कि दुनिया भर में मौजूद बड़े-बड़े कैपिटल फंड अब भारत की ओर रुख कर रहे हैं, ताकि यहां लॉन्ग टर्म भागीदारी और विस्तार के अवसर तलाश सकें।

उन्होंने कहा, “जापान, मध्य पूर्व, कनाडा और कुछ अन्य देशों में भारी मात्रा में पूंजी उपलब्ध है। ये निवेशक अब ऐसे बाजारों की तलाश में हैं, जहां वे विकास में भाग ले सकें और बड़े पैमाने पर निवेश कर सकें। भारत ऐसा एकमात्र बाजार है, जहां अगले 10 से 20 वर्षों के लिए विकास की संभावनाएं जनसांख्यिकीय कारणों से बेहद सकारात्मक दिखती हैं।”

दवे ने भारत के व्यापक आर्थिक लचीलेपन को निरंतर आशावाद का एक कारण बताया। उन्होंने कहा, “जीडीपी वृद्धि, जनसांख्यिकीय, राजनीतिक और वित्तीय स्थिरता, और एक सुव्यवस्थित वित्तीय प्रणाली को देखते हुए, किसी को भी आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि भारत फॉर्च्यून 500 की सूची में बना रहेगा।”

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First Published - October 29, 2025 | 6:03 PM IST

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