भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारियों की संख्या में 5 वर्षों में पहली बार वृद्धि हुई, जबकि इस दौरान निजी क्षेत्र के बैंकों में कर्मचारियों की संख्या में गिरावट आई है। सरकारी बैंकों में कर्मचारियों की संख्या 31 मार्च 2025 के […]
आगे पढ़े
कॉर्पोरेट बॉन्ड और बैंक ऋण के बीच ब्याज दर का अंतर कम होने के कारण आने वाली तिमाहियों में कंपनियां बैंकों से अधिक कर्ज ले सकती हैं। विश्लेषकों का कहना है कि इसके अलावा अधिग्रहण के लिए धन मुहैया कराने को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा हाल में किए गए नीतिगत सुधार से भी बैंकों […]
आगे पढ़े
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस साल अर्थव्यवस्था को पटरी पर दौड़ाने के लिए खूब हाथ-पैर मारे। नए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पद संभालते ही फरवरी में पहली मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर दी। महंगाई के रिकॉर्ड नीचे स्तर पर पहुंचने से बैंक को ग्रोथ को सपोर्ट करने […]
आगे पढ़े
भारत का बैंकिंग क्षेत्र मजबूत बना हुआ है और फंसा हुआ कर्ज 10 साल के निचले स्तर पर है। बैंकों में पूंजी भी दमदार बनी हुई है मगर उन्हें गैर-बैंक स्रोतों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। ये बातें आज जारी भारतीय रिजर्व बैंक की ‘प्रवृत्ति और प्रगति रिपोर्ट 2024-25’ में कही गई […]
आगे पढ़े
निजी क्षेत्र के भारत के बैंकों के लिए 2025 निर्णायक साल रहा है। घरेलू बैंकों में इस साल 6 अरब डॉलर से अधिक विदेशी निवेश आया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अनुकूल विनियामक वातावरण, बैंकों की साफ सुथरी बैलेंस शीट, भारत की वृद्धि की क्षमता और मझोले बैंकों की दीर्घकालिक चक्रवृद्धि संभावनाओं को लेकर […]
आगे पढ़े
मार्च 2025 के आखिर तक कुल मिलाकर गैर बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र (एनबीएफसी) की संपत्ति की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। वहीं एनबीएफसी-माइक्रोफाइनैंस संस्थान (एनबीएफसी-एमएफआई) में गिरावट आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चेतावनी दी है कि आगे चलकर माइक्रोफाइनैंस ऋणों के प्रदर्शन पर बारीकी से निगरानी की आवश्यकता है। इसके अलावा रिजर्व बैंक ने […]
आगे पढ़े
दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत फंसे कर्ज से भारतीय बैंकों की रिकवरी की दर पिछले वित्त वर्ष के 28.3 प्रतिशत की तुलना में वित्त वर्ष 2024-25 में 37 प्रतिशत हो गई है। इसके अलावा सिक्योरिटाइजेशन ऐंड रिकंस्ट्रक्शन ऑफ फाइनैंशियल असेट ऐंड इनफोर्समेंट ऑफ सिक्योरिटी इंट्रेस्ट (सरफेसी) एक्ट में भेजे गए मामलों […]
आगे पढ़े
इलाज अब सिर्फ बीमारी आने के बाद की बात नहीं रह गई है। बढ़ती मेडिकल लागत, बदलती जीवनशैली और अचानक आने वाले स्वास्थ्य खर्च ने लोगों की सोच बदल दी है। अब सवाल यह नहीं रह गया कि बीमा लेना है या नहीं, बल्कि यह हो गया है कि सही समय पर और सही कवरेज […]
आगे पढ़े
इस साल यानी FY26 में बीमा क्षेत्र की रफ्तार थोड़ी धीमी रही है, लेकिन अगले साल FY27 में फिर से तेजी आने के आसार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रोथ डबल डिजिट में पहुंच जाएगी। नियामक सुधार, GST में बदलाव, आसान बेस इफेक्ट और मुख्य प्रोडक्ट्स में बढ़ती डिमांड इसके मुख्य कारण हैं। बड़े […]
आगे पढ़े
जमा में वृद्धि की दर 12 दिसंबर को समाप्त पखवाड़े में सालाना आधार पर सुस्त होकर 9.7 प्रतिशत रह गई है, जबकि ऋण में वृद्धि बढ़कर 11.7 प्रतिशत हो गई है। इसकी वजह से ऋण और जमा के बीच वृद्धि का अंतर 200 आधार अंक हो गया है। भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों से […]
आगे पढ़े