भारत अब चीन से आने वाले निवेश और टेक्नोलॉजी को लेकर अपना पुराना सख्त रवैया थोड़ा ढीला करने की तैयारी में है। सरकार का मकसद देश में मैन्युफैक्चरिंग को तेजी से बढ़ाना और दुनिया की सप्लाई चेन में मजबूत पोजीशन बनाना है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को दिल्ली में बिजनेस स्टैंडर्ड के बड़े कार्यक्रम ‘बीएस मंथन’ में यह बात साफ की। उन्होंने कहा, “हम इंडस्ट्री वालों से लगातार बात कर रहे हैं। चीन से ज्यादा टेक्नोलॉजी और पैसा लाने के तरीकों पर हमारा दिमाग खुला है। चीजें बदल रही हैं, इसलिए नए-नए सुझावों पर विचार करने को तैयार हैं।”
गोयल ने पुराने प्रेस नोट 3 का जिक्र किया, जिसके जरिए पड़ोसी देशों से निवेश के नियम कड़े कर दिए गए थे। उन्होंने बताया कि कोविड के समय कंपनियों की कीमतें बहुत गिर गई थीं। ऐसे में किसी को सस्ते में भारतीय बिजनेस हड़पने से रोकने के लिए यह कदम उठाया गया था। अब हालात बदल रहे हैं, इसलिए सरकार नए विचारों के लिए ओपन है।
फिलहाल सरकार का सबसे बड़ा फोकस अप्रूवल प्रोसेस को तेज करना और सप्लाई चेन को मजबूत बनाना है।
अमेरिका के साथ ट्रेड नेगोशिएशन पर गोयल ने कहा कि बातें तब आगे बढ़ेंगी, जब पूरी तस्वीर साफ हो जाए। हाल ही में भारत की मुख्य ट्रेड नेगोशिएटर वाली टीम ने वॉशिंगटन जाने का प्लान टाल दिया था। वजह थी अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला, जिसमें राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के समय लगाए गए कुछ टैरिफ को गलत ठहराया गया।
पीयूष गोयल का मानना है कि दुनिया अब भारत को एक भरोसेमंद दोस्त की तरह देख रही है। गोयल ने कहा, “जब दुनिया को लगता है कि भारत पर यकीन किया जा सकता है, तो वो हमें अपनी ग्लोबल सप्लाई चेन में शामिल करना चाहती है। वो चाहती है कि भारतीय उनकी कंपनियों में काम करें।”
उन्होंने कहा कि भारत की कम मजदूरी और ज्यादा ट्रेड एक्सेस की वजह से एक्सपोर्ट के नए रास्ते खुल रहे हैं। उन्होंने कहा, “आज दुनिया के दो-तिहाई बाजार हमारे लिए खुले हैं। कम लागत होने से ढेर सारे मौके बन रहे हैं।”
सरकार खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की बातचीत तेज कर रही है। गोयल ने एक साल में डील फाइनल करने का सुझाव दिया था, जिससे GCC वाले काफी हैरान हुए। इसके अलावा चिली के साथ भी जल्द FTA होने वाला है, जिसमें क्रिटिकल मिनरल्स को सबसे ज्यादा अहमियत दी जाएगी।
गोयल ने बताया कि भारत की इंडस्ट्रियल पॉलिसी हमेशा दो चीजों पर टिकी रहेगी, जिसमें एक है हाई क्वालिटी और दूसरा सस्टेनेबिलिटी। गोयल ने कहा, “इन दोनों के बिना हम ग्लोबल लेवल पर नहीं खेल सकते।”
PLI स्कीम और रिसर्च को सपोर्ट देकर सरकार सेमीकंडक्टर और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर में तेजी लाना चाहती है। क्वालिटी स्टैंडर्ड को लेकर उन्होंने कहा कि नियम और सख्त होने चाहिए। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि सिर्फ एक क्वालिटी हो और वो अच्छी हो, क्योंकि इससे जुड़ा सबसे बड़ा पक्ष हमारे 140 करोड़ लोग हैं।”