भारत को 2047 तक एक विकसित और भविष्य के लिए तैयार राष्ट्र बनाने के लिए तेज हाईवे, सस्ती इलेक्ट्रिक गाड़ियां, 1 डॉलर प्रति किलोग्राम की दर से हाइड्रोजन, टोल प्लाजा पर जीरो लाइन और बेहतर और सुरक्षित सड़कें बेहद अहम होंगी। यह बात केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी ने मंगलवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित बिजनेस स्टैडर्ड के कार्यक्रम ‘बीएस मंथन’ में कही।
‘Making India Future Ready: On Road to 2047’ विषय पर आयोजित फायरसाइड चैट में गडकरी ने देश के लिए एक व्यापक रोडमैप पेश किया। उन्होंने कहा कि एआई-आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर, वैकल्पिक ईंधनों का विस्तार, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी और सड़क सुरक्षा में बड़े सुधार भारत की लॉन्ग टर्म ग्रोथ के प्रमुख स्तंभ होंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि आने वाले दो दशकों में तकनीक, स्केल और तेज क्रियान्वयन ही यह तय करेंगे कि भारत अपनी अर्थव्यवस्था को कितनी प्रभावी तरीके से बदल पाता है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बात करते हुए गडकरी ने कहा कि यह तकनीक पहले से ही हाईवे निर्माण और मॉनिटरिंग में शामिल हो चुकी है। उन्होंने कहा, “इनोवेशन, एंटरप्रेन्योरशिप, साइंस, टेक्नोलॉजी और रिसर्च– इन्हें हम ज्ञान कहते हैं। और ज्ञान को संपत्ति में बदलना ही भविष्य है।”
मंत्रालय एआई और सैटेलाइट इमेजरी का उपयोग डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPRs) तैयार करने, अतिक्रमण की पहचान करने और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों का पहले से पता लगाने के लिए कर रहा है। उन्होंने कहा, “इन तकनीकों के उपयोग से हम सड़क सुरक्षा में सुधार, दुर्घटनाओं में कमी, गुणवत्ता में वृद्धि और देरी को कम करना चाहते हैं। एआई गति और दक्षता को 100 फीसदी बढ़ाएगा।”
एआई का उपयोग टोल प्लाजा पर भीड़ खत्म करने के लिए भी किया जा रहा है। गडकरी ने कहा, “इस साल के अंत तक भारत में कहीं भी कतारें नहीं होंगी।” उन्होंने यह भी कहा कि 200 टोल क्रासिंग के लिए 3,000 रुपये का एनुअल पास हाईवे यात्रा को आसान बनाएगा।
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जहां हाईवे निर्माण के लक्ष्य अक्सर सुर्खियों में रहते हैं, वहीं गडकरी ने कहा कि गुणवत्ता उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “हमारी चुनौती निर्माण लागत को कम करना और गुणवत्ता में सुधार करना है। हम किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे।”
देरी को रोकने के लिए अब ठेके देने से पहले भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है। उन्होंने बताया कि पुणे में 50,000 करोड़ रुपये के मल्टी-लेयर फ्लाईओवर और नागपुर में साझा पिलर पर आधारित सड़क-मेट्रो इंफ्रास्ट्रक्चर भूमि के बेहतर उपयोग के उदाहरण हैं।
गडकरी ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में से एक है। उन्होंने कहा, “इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में पहले ही 30-40 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है। कुछ मॉडलों के लिए वेटिंग लिस्ट भी है।”
लिथियम-आयन बैटरी की लागत 150 डॉलर प्रति kWh से घटकर 55 डॉलर प्रति kWh रह गई है। उन्होंने कहा, “मेरा अनुमान है कि अगले छह महीनों में पेट्रोल, डीजल और इलेक्ट्रिक वाहनों की लागत बराबर हो जाएगी।”
उन्होंने बताया कि पेट्रोल या डीजल कारों का महीन भर चलाने का खर्च 25,000–30,000 रुपये तक होता है, जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए यह 3,000–4,000 के बीच है।
भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग अब वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। भारत से आगे अमेरिका और चीन है। उन्होंने कहा, “मेरा मिशन है कि अगले पांच वर्षों में भारत को नंबर एक बनाया जाए।” उन्होंने यह भी बताया कि इस सेक्टर ने 4.5 करोड़ नौकरियां पैदा की हैं और जीएसटी रेवेन्यू में सबसे बड़ा योगदान देता है।
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गडकरी के लॉन्ग टर्म एनर्जी विजन में हाइड्रोजन को प्रमुख स्थान मिला है। उन्होंने कहा, “मेरा सपना… मैं इसकी गारंटी नहीं दे रहा हूं और न ही कोई घोषणा कर रहा हूं… लेकिन मेरा मिशन है कि हाइड्रोजन की उपलब्धता 1 डॉलर प्रति किलोग्राम तक लाई जाए।”
10 राष्ट्रीय राजमार्गों पर चल रहे पायलट प्रोजेक्ट्स में प्रमुख ऑटोमोबाइल और एनर्जी कंपनियां शामिल हैं। गडकरी ने बताया कि हाइड्रोजन बसों और ट्रकों का ट्रायल पहले ही शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा, “हाइड्रोजन ही भविष्य है। भारत एक बड़ा और शक्तिशाली ऊर्जा स्रोत बनने जा रहा है।”
इंफास्ट्रक्चर में सुधार के बावजूद गडकरी ने माना कि सड़क दुर्घटनाएं अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। हर साल भारत में लगभग 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं और करीब 1.8 लाख लोगों की मौत होती है, जिनमें अधिकांश 18-45 वर्ष आयु वर्ग के होते हैं। मंत्री ने बताया कि हेलमेट न पहनने के कारण 54,000 से ज्यादा मौतें होती हैं, जबकि ओवरस्पीडिंग से हर साल करीब 1.2 लाख लोगों की जान जाती है।
उन्होंने कहा, “यह काफी हद तक मानव व्यवहार से जुड़ा मुद्दा है।” गडकरी ने बताया कि दुर्घटनाएं कम करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं, जिनमें छह एयरबैग अनिवार्य करना, 2,000 ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल स्थापित करना, ब्लैक स्पॉट सुधार के लिए सालाना 40,000 करोड़ रुपये खर्च और पीएम राहत सड़क दुर्घटना पीड़ित योजना शामिल है। इस योजना के तहत आपातकालीन इलाज के लिए 1.5 लाख रुपये तक की सहायता और घायलों की मदद करने वाले नेक लोगों को 25,000 रुपये का पुरस्कार दिया जाता है।