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AI रेस में चीन सबसे आगे, भारत कर रहा ‘रिवर्स AI ट्रेड’: Jefferies के क्रिस्टोफर वुड

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BS Manthan: वुड ने कहा कि एआई के मामले में यूएस से बेहतर चीन है। ऐसा इसलिए क्योंकि उनका ओपन सोर्स मॉडल है।

Last Updated- February 24, 2026 | 12:13 PM IST
Jefferies Chris Wood on Artificial Intelligence

Artificial Intelligence: जेफरीज (Jefferies) के ग्लोबल इक्विटी स्ट्रेटेजी प्रमुख क्रिस्टोफर वुड (Chris Wood) का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मामले चीन दुनिया में सबसे आगे है। उन्होंने मंगलवार को दिल्ली में आयोजित बीएसई मंथन 2026 में यह बात कही। उन्होने कहा कि एआई के लिए यूएस से बेहतर चीन है। ऐसा इसलिए क्योंकि उनका ओपन सोर्स मॉडल है।

‘भारत कर रहा है वैश्विक‘रिवर्स AI ट्रेड’

उन्होंने कहा कि जब तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बड़ी कंपनियों का खर्च (कैपेक्स) तेजी से बढ़ता रहेगा, तब तक भारत का बाजार बाकी देशों की तुलना में कमजोर प्रदर्शन कर सकता है।

वुड ने यह भी कहा कि इस साल अमेरिका के शेयर बाजार यह सवाल उठाना शुरू करेंगे कि बड़ी टेक कंपनियों (हाइपरस्केलर्स) को AI पर किए गए भारी निवेश से सच में मुनाफा मिल रहा है या नहीं।

भारतीय आईटी सेवा कंपनियों को लेकर हर कोई नकारात्मक दृष्टिकोण नहीं रखता। उन्होंने कहा कि एआई के बदलते परिदृश्य में वे कितनी प्रभावी ढंग से ढल पाएंगे, इस पर एक्सपर्ट्स की राय बंटी हुई है।

रिवर्स Artificial Intelligence ट्रेड क्या होता है?

रिवर्स AI ट्रेड का मतलब यह है कि कोई देश खुद महंगे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल तैयार करने के बजाय दूसरे देशों में बनी AI तकनीक का इस्तेमाल करता है और उसके जरिए सर्विसेज देकर कमाई करता है। यानी तकनीक बाहर से आती है, लेकिन उस तकनीक पर आधारित आईटी सर्विसेज, डेटा प्रोसेसिंग, सॉफ्टवेयर सपोर्ट या एनालिटिक्स जैसे काम किए जाते हैं।

आसान शब्दों में बताये तो AI को एक तरह से इंपोर्ट किया जाता है और उससे जुड़ी सेवाओं का निर्यात करके पैसा कमाया जाता है। इसी मॉडल को ‘रिवर्स AI ट्रेड’ कहते हैं।

भारतीय बाजारों से FIIs बिकवाली का कारण

वुड ने कहा कि भारत में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली के पीछे दो बड़े कारण थे। पहला, 2024 के आखिर में चीन का शेयर बाजार करीब सात गुना कमाई (अर्निंग्स) के स्तर पर निचले स्तर पर पहुंच गया। इससे विदेशी निवेशकों ने भारत में अपनी हिस्सेदारी कम की और पैसा चीन में लगाना शुरू किया।

दूसरा, बिकवाली की दूसरी लहर इसलिए आई क्योंकि कई निवेशकों ने ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में जरूरत से ज्यादा निवेश (ओवरवेट पोजीशन) कर रखा था। इसलिए उन्होंने अपने पोर्टफोलियो को संतुलित करने के लिए भारत से भी पैसा निकाला।

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First Published - February 24, 2026 | 11:22 AM IST

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