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सिर्फ जनसंख्या से नहीं बनेगा विकसित भारत, बीएस मंथन में बेरी ने बताया असली फॉर्मूला

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बीएस मंथन में नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने रखी नई सोच, कहा युवा आबादी का लाभ तभी मिलेगा जब बढ़ेगी श्रम उत्पादकता

Last Updated- February 24, 2026 | 1:26 PM IST
Suman Bery
बीएस मंथन में बोलते नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी, फोटो क्रेडिट: कमलेश

भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का सपना केवल बढ़ती आबादी के भरोसे पूरा नहीं होगा। इसके लिए सबसे जरूरी है कि देश अपनी श्रम उत्पादकता को कई गुना बढ़ाए। यह बात नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित बीएस मंथन कार्यक्रम में कही।

बेरी ने कहा कि आने वाले 25 सालों में भारत में काम करने की उम्र वाली आबादी सबसे अधिक बढ़ेगी। यह भारत के इतिहास का एक बड़ा अवसर है। लेकिन उन्होंने साफ किया कि सिर्फ आबादी बढ़ने से देश अमीर नहीं बनता। जरूरी यह है कि हर काम करने वाला व्यक्ति ज्यादा और बेहतर उत्पादन करे। अगर उत्पादकता नहीं बढ़ी तो जनसंख्या का लाभ अधूरा रह जाएगा।

विकसित भारत 2047 का गणित

बेरी ने कहा कि किसी देश में काम करने की क्षमता और लोगों की औसत आय के बीच सीधा रिश्ता होता है। जितना ज्यादा एक व्यक्ति काम से उत्पादन करेगा, उतनी ही उसकी आय बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि इस समय भारत में प्रति व्यक्ति उत्पादकता करीब 3000 डॉलर है। अगर 2047 तक प्रति व्यक्ति आय को 18000 डॉलर तक पहुंचाना है, तो काम करने की क्षमता को कई गुना बढ़ाना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की उत्पादकता कमजोर नहीं है, लेकिन यह चीन के मुकाबले काफी कम है। इसलिए भारत को लगातार और तेज सुधार करने की जरूरत है, ताकि वह आगे बढ़ सके।

महिलाओं में छिपा है सबसे बड़ा अवसर

बेरी के अनुसार इस समय लगभग 183 मिलियन महिलाएं काम कर रही हैं, जबकि करीब 264 मिलियन कामकाजी उम्र की महिलाएं श्रम बाजार से बाहर हैं। उन्होंने इस अंतर को देश के लिए एक विशाल अवसर बताया। हालांकि उन्होंने माना कि महिलाओं को काम में लाने के लिए सामाजिक सोच बदलनी होगी, बच्चों की देखभाल जैसी सुविधाएं बढ़ानी होंगी और कार्यस्थल को अधिक अनुकूल बनाना होगा। साथ ही यह भी ध्यान रखना होगा कि श्रम बल बढ़ने से प्रति व्यक्ति औसत उत्पादन कम न हो।

निवेश बढ़े बिना नहीं बढ़ेगी रफ्तार

तेज आर्थिक विकास के लिए ज्यादा निवेश करना जरूरी है। सुमन बेरी ने कहा कि अगर काम करने वाले लोगों की संख्या बढ़ती है, लेकिन उतनी ही तेजी से पैसा और मशीनें नहीं बढ़तीं, तो हर व्यक्ति के हिस्से में कम संसाधन आएंगे। उन्होंने अंदाजा लगाया कि देश को सकल घरेलू उत्पाद के मुकाबले निवेश में करीब 2 से 3 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। साफ शब्दों में कहें तो अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए ज्यादा पैसा लगाना होगा। ऊर्जा के नए साधनों पर खर्च, तेजी से बढ़ते शहरों का विकास और देश के उद्योगों को मजबूत करने के लिए बड़ी मात्रा में पूंजी की जरूरत पड़ेगी।

बेरी ने कहा कि जब देश की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है तो बाहर से सामान खरीदना, यानी आयात, भी बढ़ जाता है। ऐसे में जरूरी है कि भारत ज्यादा से ज्यादा सामान और सेवाएं विदेशों को बेचे, यानी निर्यात बढ़ाए, ताकि पैसा देश में आता रहे और संतुलन बना रहे।

उन्होंने कहा कि अगर दुनिया में व्यापार की रफ्तार धीमी रहती है तो भारत के लिए चुनौती और बढ़ जाएगी। ऐसी स्थिति में भारतीय कंपनियों को ज्यादा बेहतर, सस्ता और गुणवत्तापूर्ण सामान बनाना होगा, ताकि वे वैश्विक बाजार में टिक सकें और मुकाबला कर सकें।

क्या सिर्फ विनिर्माण ही रास्ता है?

रोजगार के मुद्दे पर सुमन बेरी ने कहा कि हमें पुरानी सोच बदलने की जरूरत है। अब यह मान लेना ठीक नहीं कि सिर्फ कारखाने और फैक्ट्रियां ही सबसे ज्यादा रोजगार देंगी। उनके अनुसार सेवा क्षेत्र भी बड़ी संख्या में नौकरियां पैदा कर सकता है, अगर उसे सही तरीके से बढ़ावा दिया जाए।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत प्रशिक्षुता यानी काम के साथ सीखने की व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। लोगों में जीवनभर नई चीजें सीखते रहने की आदत भी विकसित करनी होगी, ताकि वे बदलते समय के साथ खुद को ढाल सकें।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि केवल सरकारी नौकरी पाने के लिए पढ़ाई करने की सोच से बाहर निकलना होगा। शिक्षा का मकसद सिर्फ नौकरी पाना नहीं, बल्कि स्किल और क्षमता बढ़ाना होना चाहिए।

AI पर संतुलित नजर

AI के बारे में सुमन बेरी ने सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अभी यह पूरी तरह साफ नहीं है कि इसका अर्थव्यवस्था और रोजगार पर क्या असर पड़ेगा। इसलिए सरकार को किसी एक नई तकनीक पर बहुत बड़ा दांव लगाने से बचना चाहिए। उनकी राय में ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जो हर परिस्थिति में देश के काम आएं, चाहे भविष्य में तकनीक का असर जैसा भी हो।

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First Published - February 24, 2026 | 1:14 PM IST

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