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US Tariffs: ग्लोबल बाजारों में हलचल, ट्रंप की 10 प्रतिशत टैरिफ नीति प्रभावी

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Trump ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 10 प्रतिशत वैश्विक आयात शुल्क लागू कर अमेरिकी व्यापार नीति को नई दिशा दी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है।

Last Updated- February 24, 2026 | 2:58 PM IST
Donald Trump US Tariffs
US President Donald Trump

Trump US Tariffs: अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने वैश्विक व्यापार नीति को लेकर बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार से अमेरिका में सभी देशों से आने वाले आयात पर 10 प्रतिशत का नया वैश्विक शुल्क लागू हो गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा पहले लगाए गए व्यापक और कठोर टैरिफ को असंवैधानिक ठहरा दिया था। अदालत के फैसले के तुरंत बाद व्हाइट हाउस ने नई रणनीति के तहत यह कदम उठाया।

US Tariffs: 10 प्रतिशत टैरिफ लागू, 15 प्रतिशत की तैयारी

ट्रंप ने पिछले शुक्रवार एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लागू करने की अनुमति दी थी। हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से संकेत दिया था कि यह दर बढ़ाकर 15 प्रतिशत तक की जा सकती है, लेकिन मंगलवार सुबह वाशिंगटन समयानुसार 12 बजकर 1 मिनट तक आधिकारिक तौर पर इसे बढ़ाने का आदेश जारी नहीं किया गया। प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार 15 प्रतिशत की दर लागू करने की तैयारी चल रही है, पर इसकी समयसीमा अभी तय नहीं की गई है।

वैश्विक स्तर पर बढ़ी अनिश्चितता

वॉशिंगटन से स्पष्ट दिशा-निर्देश न मिलने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में असमंजस की स्थिति बन गई है। कई देश और बड़ी कंपनियां मौजूदा व्यापार समझौतों की शर्तों का अध्ययन कर रही हैं ताकि यह समझा जा सके कि नए टैरिफ का उन पर क्या प्रभाव पड़ेगा। यूरोपीय संघ और भारत जैसे प्रमुख व्यापारिक साझेदारों ने भी इस अनिश्चित माहौल के चलते चल रही व्यापार वार्ताओं को अस्थायी रूप से रोक दिया है।

किस कानूनी प्रावधान के तहत लगा टैरिफ

ट्रंप ने यह 10 प्रतिशत शुल्क 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत लगाया है। इस प्रावधान के अनुसार राष्ट्रपति 150 दिनों तक बिना कांग्रेस की मंजूरी के आयात शुल्क लगा सकते हैं। इससे पहले ट्रंप ने आपातकालीन शक्तियों का उपयोग कर तथाकथित ‘पारस्परिक टैरिफ’ लगाए थे, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने अवैध करार दिया था। उसी फैसले के बाद प्रशासन ने नया रास्ता अपनाया।

किन वस्तुओं को मिली राहत

नए आदेश में कुछ छूट भी बरकरार रखी गई है। अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको के बीच हुए उत्तर अमेरिकी व्यापार समझौते के तहत आने वाले नियमों का पालन करने वाले उत्पादों को इस टैरिफ से छूट दी गई है। इसके अलावा कुछ कृषि उत्पादों पर पहले से लागू राहत भी जारी रहेगी।

US Tariffs: अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर संभावित असर

ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के विश्लेषण के अनुसार, मौजूदा छूटों को ध्यान में रखते हुए अमेरिका की औसत प्रभावी टैरिफ दर लगभग 10.2 प्रतिशत पर स्थिर हो सकती है। यह दर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले 13.6 प्रतिशत के आसपास थी। यदि भविष्य में 15 प्रतिशत का वैश्विक टैरिफ लागू होता है, तो प्रभावी दर लगभग 12 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

ट्रंप की टीम ने स्पष्ट किया है कि उनकी व्यापार नीति में टैरिफ यानी आयात शुल्क आगे भी केंद्रीय भूमिका निभाते रहेंगे। हालिया अदालत के फैसले के बाद, जिसने उनके द्वारा इस्तेमाल की गई आपातकालीन शक्तियों को सीमित कर दिया है, ट्रंप प्रशासन नए कानूनी रास्तों के जरिए शुल्क व्यवस्था को दोबारा मजबूत करने की तैयारी में है।

नए जांच तंत्र के जरिए टैरिफ लागू करने की तैयारी

व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि वह कुछ विशेष कानूनी प्रावधानों के तहत तेज समयसीमा में जांच शुरू करने की योजना बना रहा है। इनमें सेक्शन 301 और सेक्शन 232 जैसे प्रावधान शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल पहले भी राष्ट्रीय हितों के आधार पर आयात पर शुल्क लगाने के लिए किया जाता रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ये प्रावधान उन आपातकालीन शक्तियों जितने लचीले नहीं हैं, जिनका उपयोग ट्रंप पहले अपने कार्यकाल में करते थे।

प्रशासन जिन उत्पादों की जांच की तैयारी कर रहा है, उनमें बैटरियां, कास्ट आयरन और लोहे के फिटिंग्स, बिजली ग्रिड और टेलीकॉम उपकरण, प्लास्टिक पाइपिंग तथा कुछ रसायन शामिल हैं। इन आयातों के राष्ट्रीय सुरक्षा पर संभावित प्रभाव का आकलन किया जाएगा। आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन माना जा रहा है कि ये जांच आगे चलकर नए टैरिफ लगाने का आधार बन सकती हैं। हालांकि पूरी प्रक्रिया में कई महीने लग सकते हैं।

सहयोगी देशों से समझौतों को निभाने की अपील

अदालत के फैसले के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने अपने व्यापारिक साझेदार देशों से अपील की है कि वे पिछले एक वर्ष में हुए समझौतों का सम्मान करें। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने कहा कि ये समझौते सभी पक्षों के लिए लाभकारी हैं और अमेरिका उनसे पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि अन्य देश भी अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करेंगे।

लेकिन इस आश्वासन के बावजूद कुछ बड़े अर्थतंत्र सतर्क रुख अपना रहे हैं। यूरोपीय संघ ने अमेरिका के साथ हुए समझौते की पुष्टि प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया है। उनका कहना है कि जब तक ट्रंप अपनी नई टैरिफ रणनीति को स्पष्ट नहीं करते, तब तक आगे बढ़ना जोखिम भरा होगा। इसी तरह नई दिल्ली में भी अधिकारियों ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते पर होने वाली वार्ता को टाल दिया है।

US Tariffs: सहयोगियों पर भी सख्त संदेश

ट्रंप ने चेतावनी दी है कि जो देश मौजूदा समझौतों के साथ खेल करेंगे, उनके लिए और भी ऊंचे टैरिफ लगाए जा सकते हैं। उन्होंने वैश्विक न्यूनतम टैरिफ दर को 15 प्रतिशत तक बढ़ाने की संभावना भी जताई है। इससे ब्रिटेन जैसे पारंपरिक सहयोगियों की चिंता बढ़ गई है, जिन्होंने पहले 10 प्रतिशत की दर पर समझौता किया था। यदि नई दर लागू होती है तो ब्रिटिश निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति कमजोर पड़ सकती है।

चीन के साथ समीकरण बदलने के संकेत

इस बीच, चीन जैसे प्रतिद्वंद्वी देशों की स्थिति कुछ हद तक मजबूत हो सकती है क्योंकि ट्रंप की आपातकालीन शक्तियां सीमित हो चुकी हैं। अगले महीने ट्रंप की बीजिंग यात्रा प्रस्तावित है, जहां उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होने की उम्मीद है। यह बैठक दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

घरेलू राजनीति पर भी असर

ये टैरिफ उस समय प्रभावी हुए हैं जब ट्रंप कांग्रेस को संबोधित करने वाले हैं। उनके भाषण में आर्थिक एजेंडा प्रमुख मुद्दा रहने की संभावना है। हालांकि, सर्वेक्षणों से संकेत मिल रहा है कि आम जनता में उनकी व्यापार नीति को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। एक हालिया सर्वे में बड़ी संख्या में अमेरिकियों ने माना कि टैरिफ से कीमतों में बढ़ोतरी हुई है और इससे महंगाई का दबाव बढ़ा है।

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First Published - February 24, 2026 | 2:58 PM IST

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