भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि नई श्रृंखला अपनाने के बाद केंद्रीय बैंक के लिए महंगाई को 4 प्रतिशत के दायरे में रखने के लक्ष्य में बदलाव नहीं भी हो सकता है। इससे अस्थिरता को कम करने और भारतीय घरों के उपभोग व्यय को बेहतर ढंग से दर्शाने में मदद मिलेगी।
इस वित्त वर्ष में लचीले महंगाई लक्ष्यीकरण (एफआईटी) ढांचे की दूसरी समीक्षा होनी है। रिजर्व बैंक ने मौजूदा ढांचे पर प्रतिक्रिया जानने के लिए चर्चा पत्र जारी किया था। सरकार को 6 से 8 अप्रैल, 2026 को निर्धारित मौद्रिक नीति की अगली समीक्षा से पहले नए ढांचे की घोषणा करने की आस है।
नई दिल्ली में केंद्रीय बैंक की बोर्ड बैठक के बाद मल्होत्रा ने वित्त मंत्री के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केंद्रीय बैंक के अगले महंगाई अनुमान अप्रैल की मौद्रिक नीति में जारी किए जाएंगे। इसमें उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पद्धति में किए गए परिवर्तनों को शामिल किए जाएंगे।
उन्होंने कहा ‘यदि मेथडॉलजी (कार्यपद्धति) बदलती है तो अनुमानों में संशोधन किया जाएगा। हमारे अगले अनुमान अप्रैल की नीति में जारी किए जाएंगे। इसमें उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की नई श्रृंखला में पेश किए गए परिवर्तन को शामिल होंगे। हम इन परिवर्तनों का स्वागत करते हैं। इसका कारण यह है कि भारतीय घरों के उपभोग व्यय के रुझान को बेहतर ढंग से दर्शाते हैं और उतार-चढ़ाव को कम करने में मदद करते हैं। संशोधित मेथडॉलजी (कार्यपद्धति) उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के महंगाई के अनुमान में भी सुधार करेगी।’
उन्होंने कहा कि महंगाई के दायरे का लक्ष्य बदलने की आवश्यकता है या नहीं, इस पर सरकार विचार कर रही है।
उन्होंने कहा, ‘हालांकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक श्रृंखला में एकमात्र परिवर्तन लक्ष्य के संशोधन को उचित नहीं ठहराता है। हालांकि कार्यपद्धति, कवरेज, प्रतिनिधित्व और अस्थिरता में परिवर्तन महत्त्वपूर्ण हैं, वे अपने आप में लक्ष्य को बदलने को सही ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।’
उधर मुंबई में एक अन्य कार्यक्रम में रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के सदस्य सौगात भट्टाचार्य ने कहा कि आधार वर्ष संशोधन के तत्काल सांख्यिकीय प्रभाव को दर्शाने के लिए वित्त वर्ष 27 की पहली दो तिमाहियों के लिए महंगाई का पूर्वानुमान 20 -30 आधार अंक ऊपर संशोधित होने की संभावना है।
उन्होंने यह संकेत भी दिया कि नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक श्रृंखला के महंगाई के दायरे पर व्यापक प्रभाव सीमित रहेगा। इसका मुख्य कारण भोजन के भारांश में कमी है।
घरेलू दर-निर्धारण पैनल ने अपनी नवीनतम बैठक में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के महंगाई अनुमानों को वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के लिए संशोधित कर चार प्रतिशत कर दिया जबकि यह पहले 3.9 प्रतिशत था। इसी क्रम में वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही के लिए इन अनुमानों को बदल कर 4.2 प्रतिशत कर दिया जबकि यह पहले 4 प्रतिशत थे।