वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि अमेरिकी टैरिफ में किए गए बदलावों के प्रभाव पर बात करना अभी जल्दबाजी होगी और कॉमर्स मंत्रालय इस स्थिति की समीक्षा कर रहा है। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की तरफ से व्यापार साझेदार देशों पर लगाए गए व्यापक इम्पोर्ट ड्यूटी के खिलाफ शुक्रवार को फैसला दिया था। इसके बाद ट्रंप ने 24 फरवरी से 150 दिन के लिए भारत समेत सभी देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की। बाद में शनिवार को इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर शुल्क में इन बदलावों के प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर सीतारमण ने कहा कि इस पर टिप्पणी करना अभी ‘जल्दबाजी’ होगी। उन्होंने कहा, ” समग्र भारतीय अर्थव्यवस्था से परे विशेष रूप से व्यापार के मुद्दे पर, कॉमर्स मंत्रालय स्थिति की समीक्षा कर रहा है। प्रतिनिधिमंडल को यह तय करना होगा कि आगे की वार्ताओं के लिए वे कब जाएंगे। इसलिए मेरे लिए अभी टिप्पणी करना थोड़ी जल्दबाजी होगी।”
सूत्रों के अनुसार, भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौते के मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए सोमवार से वॉशिंगटन में होने वाली मुख्य वार्ताकारों की प्रस्तावित बैठक को पुनर्निर्धारित करने का निर्णय लिया है।
कॉमर्स मंत्रालय में संयुक्त सचिव दर्पण जैन इस समझौते के लिए भारत के मुख्य वार्ताकार हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के केंद्रीय निदेशक मंडल को यहां संबोधित करने के बाद पत्रकारों के साथ बातचीत में सीतारमण ने कहा कि भारत व्यापार समझौतों के प्रति स्पष्ट रुख रखता है और वह ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, ओमान, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के साथ समझौते कर चुका है।
उन्होंने कहा, ”इसलिए देशों के साथ व्यापार समझौते करने का हमारा प्रयास जारी रहेगा।” मंत्री ने साथ ही कहा कि भारत चाहता है कि उसकी अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर व्यापार करने और वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने का लाभ मिले।
(पीटीआई के इनपुट के साथ)