FII Sell Off: भारतीय आईटी सेक्टर हाल में दबाव में आया है और आंकड़े साफ दिखाते हैं कि निवेशकों का नजरिया बदल रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने पिछले एक साल में अपनी हिस्सेदारी कम कर दी है।
बिजनेस स्टैंडर्ड के देखे गए शीर्ष भारतीय आईटी कंपनियों के शेयर होल्डिंग पैटर्न के अनुसार, एफआईआई ने अपनी हिस्सेदारी घटाई है। इसका मतलब है कि वे सावधान हो रहे हैं क्योंकि एआई के कारण ग्रोथ की गति धीमी हुई है और ट्रेडिशनल सॉफ्टवेयर कंपनियों को अपनी रणनीति फिर से देखनी पड़ रही है।
आईटी सेक्टर में बिकवाली की तीव्रता को इस बात से समझा जा सकता है कि एफपीआई ने जुलाई 2025 से आईटी स्टॉक्स बेच रहे हैं और अकेले फरवरी के पहले छमाही में उन्होंने आईटी कंपनियों से 10,965 करोड़ रुपये निकाल लिए। एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार यह सबसे बड़ी बिकवाली है।
जेफरीज के ग्लोबल इक्विटी स्ट्रेटेजी प्रमुख क्रिस्टोफर वुड (Chris Wood) ने मंगलवार को बीएसई मंथन समिट (BS Manthan) में कहा कि भारत में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली के पीछे दो बड़े कारण थे। पहला, 2024 के आखिर में चीन का शेयर बाजार करीब सात गुना अर्निंग्स के स्तर पर गिर गया। इससे विदेशी निवेशकों ने भारत में हिस्सेदारी कम की और पैसा चीन में लगाया।
दूसरा, बिकवाली की दूसरी लहर इसलिए आई क्योंकि कई निवेशकों ने ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में ज्यादा निवेश (ओवरवेट पोजीशन) कर रखा था। इसलिए उन्होंने अपने पोर्टफोलियो को संतुलित करने के लिए भारत से पैसा निकाला।
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क्रिस्टोफर वुड (Chris Wood) का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मामले चीन दुनिया में सबसे आगे है। उन्होने कहा कि एआई के लिए यूएस से बेहतर चीन है। ऐसा इसलिए क्योंकि उनका ओपन सोर्स मॉडल है।
उन्होंने भारतीय बाजारों को लेकर कहा कि जब तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बड़ी कंपनियों का खर्च (कैपेक्स) तेजी से बढ़ता रहेगा, तब तक भारत का बाजार बाकी देशों की तुलना में कमजोर प्रदर्शन कर सकता है।
वुड ने यह भी कहा कि इस साल अमेरिका के शेयर बाजार यह सवाल उठाना शुरू करेंगे कि बड़ी टेक कंपनियों (हाइपरस्केलर्स) को AI पर किए गए भारी निवेश से सच में मुनाफा मिल रहा है या नहीं।