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क्या फिर आएंगे तीनों कृषि कानून? मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘BS मंथन’ में बताया सरकार का इरादा

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कृषि मंत्री ने बिजनेस स्टैंडर्ड 'मंथन' में खेती-किसानी को लेकर सरकार के इरादों को लोगों के सामने रखा और भविष्य के रोडमैप पर विस्तार से चर्चा की

Last Updated- February 24, 2026 | 5:29 PM IST
shivraj singh chauhan
केंद्रीय कृषि व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान बिज़नेस स्टैंडर्ड मंथन में अपनी बात रखते हुए

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘बिज़नेस स्टैंडर्ड’ के प्रमुख कार्यक्रम ‘BS मंथन’ में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि क्षेत्र के भविष्य और सरकार की योजनाओं पर विस्तार से अपनी बात रखी। इस चर्चा का मुख्य विषय था ‘कृषि क्षेत्र की नई वास्तविकताएं’, जिसमें कृषि मंत्री ने साफ कर दिया कि सरकार का इरादा पुराने फैसलों को दोहराने का नहीं, बल्कि किसानों को नई तकनीक और बेहतर व्यवस्था से जोड़ने का है।

कृषि कानूनों की वापसी पर सरकार का रुख साफ

शिवराज सिंह चौहान ने कार्यक्रम के दौरान एक बड़े सवाल पर विराम लगाते हुए कहा कि फिलहाल उन कृषि कानूनों को वापस लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है, जिन्हें पहले रद्द कर दिया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार का पूरा ध्यान अब कृषि क्षेत्र में संरचनात्मक सुधारों और सही हस्तक्षेप के जरिए इसे मजबूत बनाने पर है।

मंत्री ने खेती को मुनाफे का सौदा बनाने के लिए एक छह सूत्री रोडमैप पेश किया। इसमें उत्पादन बढ़ाना, लागत कम करना, फसलों का सही दाम दिलाना, जरूरत पड़ने पर मुआवजा देना, कृषि विविधीकरण (खेती में विविधता) और मूल्य संवर्धन (Value Addition) को बढ़ावा देना शामिल है। इसके अलावा, उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए कृषि भूमि को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया।

Also Read: FMCG का भविष्य: संजीव पुरी ने BS मंथन में बताया कि कैसे AI और नए ब्रांड्स से इस सेक्टर में हो रहा बदलाव

डिजिटल खेती और रोजगार की गारंटी

तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल पर चर्चा करते हुए उन्होंने जानकारी दी कि सरकार ने अब तक लगभग 8 करोड़ किसानों के लिए ‘किसान ID’ तैयार कर ली है। इस डेटाबेस में जमीन का रिकॉर्ड, नक्शा, जोत का आकार, परिवार के सदस्यों की जानकारी और पशुओं जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हैं, ताकि योजनाओं का लाभ सीधे और सही व्यक्ति तक पहुंचाया जा सके।

रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने ‘विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम’ (VB-G RAM-G) का उल्लेख किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मनरेगा की तरह यह भी पूरी तरह से मांग पर आधारित योजना बनी रहेगी। बढ़ती आबादी और खाद्य सुरक्षा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि आबादी का बोझ खेती पर न पड़े और कृषि विकास इस तरह हो कि वह देश की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ टिकाऊ भी बना रहे।

बदलती अर्थव्यवस्था और कृषि का नया खाका

देश की बदलती आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए चौहान ने बताया कि पहले जहां भारत की लगभग 70 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर थी, अब वह घटकर लगभग 48 प्रतिशत रह गई है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव अर्थव्यवस्था की बदलती तस्वीर को दिखाता है, लेकिन साथ ही यह चुनौती भी पेश करता है कि जो लोग खेती से जुड़े हैं, उनके लिए इसे कैसे टिकाऊ बनाया जाए।

चौहान ने कहा कि सरकार अब ‘राष्ट्रीय कृषि रोडमैप’ पर काम कर रही है। खास बात यह है कि केंद्र के साथ-साथ हर राज्य का अपना एक अलग रोडमैप होगा, जो वहां की स्थानीय परिस्थितियों और जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जाएगा। इसके अलावा, अलग-अलग फसलों की चुनौतियों से निपटने के लिए ‘क्रॉप-वाइज रोडमैप’ भी बनाया जाएगा।

कृषि मंत्री ने माना कि कृषि राष्ट्रीय प्राथमिकता है, लेकिन इसकी सफलता राज्यों द्वारा जमीनी स्तर पर किए गए क्रियान्वयन और माइक्रो-मॉनिटरिंग पर निर्भर करती है।

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First Published - February 24, 2026 | 4:56 PM IST

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