प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने रेलवे मंत्रालय की तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिनकी कुल लागत लगभग 9,072 करोड़ रुपये है। इन तीन परियोजनाओं में गोंडिया-जबलपुर सेक्शन के लिए डबल लाइन और पुनारख-किउल तथा गम्हरिया-चांडिल सेक्शनों के बीच तीसरी और चौथी लाइन बिछाना शामिल है।
सरकार ने कहा कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड के आठ जिलों को कवर करने वाली इन परियोजनाओं से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 307 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी। एक आधिकारिक बयान में कहा गया, “प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट से लगभग 5,407 गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिनकी कुल आबादी करीब 98 लाख है।”
बयान में आगे कहा गया, “लाइन क्षमता बढ़ने से मोबिवटी में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिससे भारतीय रेलवे के ऑपरेशन की दक्षता और सेवा की विश्वसनीयता बेहतर होगी। ये मल्टी-ट्रैकिंग प्रस्ताव ऑपरेशन को आसान बनाने और भीड़भाड़ कम करने में सहायक होंगे।”
रेल मंत्रालय ने कहा कि ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नए भारत’ के विजन के अनुरूप हैं, जिनसे क्षेत्र के लोगों को समग्र विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाया जाएगा और रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
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बयान में लाभों का उल्लेख करते हुए कहा गया, “इन परियोजनाओं की योजना पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बनाई गई है, जिसका उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के जरिए मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ाना है। ये परियोजनाएं लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी।”
आगे कहा गया, “प्रस्तावित क्षमता विस्तार से देश के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिनमें कचनार शिव मंदिर (जबलपुर), कान्हा राष्ट्रीय उद्यान (बालाघाट), गंगुलपारा डैम और वॉटरफॉल, पेंच नेशनल पार्क, धुआंधार वॉटरफॉल, बरगी डैम, गोमजी-सोमजी मंदिर, चंदिल डैम, दलमा हिल टॉप, हेसाकोचा वॉटरफॉल, रायजामा घाटी, दलमा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी आदि शामिल हैं।”
(PTI इनपुट के साथ)