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महंगाई काबू में, अब ब्याज दर में कटौती की गुंजाइश: RBI MPC के सौगात भट्टाचार्य

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RBI की मौद्रिक नीति समिति के बाहरी सदस्य ने कहा— वैश्विक अनिश्चितता के बीच अब नीतिगत ढील का समय, नकदी बढ़ाने से ब्याज दरें कम करने में मदद मिलेगी

Last Updated- April 30, 2025 | 10:17 PM IST
Saugata Bhattacharya

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति के बाहरी सदस्य सौगात भट्टाचार्य ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच महंगाई दर मध्यम स्तर पर बने रहने की संभावना है और ऐसे में ब्याज दर में कटौती की नीतिगत गुंजाइश है। भट्टाचार्य ने कहा कि वे हर बैठक में आने वाले आंकड़ों के आधार पर नीतिगत ढील के पक्षधर हैं। मनोजित साहा के साथ फोन पर बातचीत के प्रमुख अंश…

अप्रैल में मौद्रिक नीति समिति ने रुख बदलकर नरम कर लिया है, जिसका मतलब है कि रीपो दर घट सकती है या यथावत रह सकती है। क्या आपको कटौती की गुंजाइश दिख रही है?

सबसे पहली बात यह मेरी निजी राय है। इस समय महंगाई को काबू में रखने के बजाय वृद्धि को सहारा देने पर जोर दिया जा रहा है। वित्त वर्ष 2026 के लिए रिजर्व बैंक ने 6.5 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया है। मैं बहुत अनिश्चितता के दौर में बोल रहा हूं कि अगर शुल्क संबंधी समस्या बनी रहती है और कुछ समय के लिए महंगाई बढ़ती है तो भी मध्यम अवधि में यह कम या मामूली ही बनी रहेगी।

मगर इसकी वजह से आपूर्ति श्रृंखला में अव्यवस्था के कारण वैश्विक व्यापार और वृद्धि में कमी आना लगभग तय है, जिसका असर भारत पर भी पड़ेगा। रिजर्व बैंक भी वृद्धि को समर्थन देने पर एकमत है और व्यवस्था में नकदी डालने सहित कई सक्रिय कदम उठाए हैं। वे मई के लिए भी नकदी डालने की योजना बना रहे हैं। रीपो दर में आगे और कटौती की संभावना तथा व्यवस्था में नकदी अधिशेष बनाए रखने से ब्याज दर पर नीतिगत सुगमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

क्या बड़ी मात्रा में नकदी डालने का मकसद इसका असर तेज करना है?

मौद्रिक नीति में ढील का अंतिम मकसद ब्याज दरों पर इसका असर डालना है, जिसमें उधारी दर और जमा दर शामिल है। मेरा मानना है कि इसका असर अब कम समय में दिख सकता है। इस समय 60 प्रतिशत से ज्यादा उधारी दरें बाहरी मानकों से जुड़ी हुई हैं।

आप उम्मीद कर रहे हैं कि इसका तेज असर जमा दर पर भी होगा?

हां, नकदी की मात्रा और नकदी डालने के वादे के कारण ऐसा होगा। साथ ही दो प्रकार के नकदी प्रवाह की विशेषताओं, बेची गई नकदी बनाम उधार दी गई नकदी के संकेत पर भी ध्यान देने की जरूरत है। ओपन मार्केट ऑपरेशन बॉन्ड खरीद के माध्यम से बेची गई नकदी स्थायी नकदी की तरह है। उधारी वाली नकदी वैरिएबल रेट रीपो नीलामी के माध्मय से डाली जा रही है।

एमपीसी की बैठक में सदस्यों ने क्या रुख पर मतदान किया, जैसा पिछले कुछ वर्षों में होता रहा है?

एमपीसी का ब्योरा बताता है कि अप्रैल की नीतिगत बैठक में रुख पर कोई मतदान नहीं हुआ। एमपीसी पर 2016 के रिजर्व बैंक अधिनियम संशोधन में रुख का उल्लेख नहीं किया गया है। जहां तक मुझे जानकारी है, रुख पर मतदान अक्टूबर 2018 में शुरू किया गया। रिजर्व बैंक के गवर्नर ने बैठक के बाद दिए गए अपने बयान में रुख पर अपनी सोच को संक्षेप में स्पष्ट किया है। रीपो दर में कटौती करने की जरूरत और मौद्रिक नीति में इसकी गुंजाइश दोनों ही मौजूद हैं, लेकिन मैं पहले से कुछ नहीं कहना चाहता।

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First Published - April 30, 2025 | 10:17 PM IST

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