facebookmetapixel
मजबूत फंडामेंटल के साथ शेयर बाजार में बढ़त की उम्मीद, BFSI क्षेत्र सबसे आगे: रमेश मंत्रीअमेरिकी प्रतिबंधों से वेनेजुएला की तेल अर्थव्यवस्था झुलसी, निर्यात पर गहरा असर; भारत का आयात भी घटाबांग्लादेश ने IPL के प्रसारण पर लगाया प्रतिबंध, एक्सपर्ट बोले: इस फैसले से कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगादिल्ली दंगा साजिश केस में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकारGrok विवाद में X को सरकार ने दी 72 घंटे की और मोहलत, महिलाओं व बच्चों की तस्वीरों पर केंद्र सख्तकेंद्रीय बजट से पहले IVCA की मांग: AIF ने प्राइवेट क्रेडिट फंड्स के लिए टैक्स में समानता की मांग कीSMC बिल पर एम. दामोदरन की चेतावनी: सेबी का निवेशकों की सुरक्षा पर फोकस कमजोरविश्व आर्थिक मंच की सलाना बैठक में दावोस जाएंगे भारतीय नेतागण, चौहान और वैष्णव करेंगे अगुआईभारत कोकिंग कोल का आईपीओ शुक्रवार को पेश होगा, ₹1,069 करोड़ जुटाने की तैयारीAI इम्पैक्ट समिट में ग्लोबल साउथ पर फोकस, खुद को AI सर्विस सप्लायर के रूप में पेश करेगा भारत

Lok Sabha elections 2024 result: इंदौर को मिले करीब 2 लाख Nota वोट, बन गया अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड

ADR ने सुझाव दिया है कि ऐसे मामलों में जब नोटा के लिए डाले गए वोट सभी चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों से अधिक हों तो किसी भी उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित नहीं किया जाना चाहिए

Last Updated- June 04, 2024 | 3:37 PM IST
Counting of votes

Lok Sabha elections 2024 result: मध्य प्रदेश के इंदौर लोकसभा सीट में मंगलवार को दोपहर 1 बजे की काउंटिंग ट्रेंड के मुताबिक सबसे ज्यादा नोटा वोट पड़ने का रिकॉर्ड बन गया है। चुनाव आयोग की वेबसाइट से मिली जानकारी के अनुसार अब तक 194,466 वोटों के साथ सबसे अधिक नोटा वोटों का नया रिकॉर्ड बन गया है।

नोटा या ‘इनमें से कोई नहीं’ वोटिंग मशीन पर उपलब्ध एक ऑप्शन है, जो बताता है कि मतदाताओं को उस निर्वाचन क्षेत्र में कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं है। इसे 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान पहली बार पेश किया गया था।

हालांकि, भारतीय जनता पार्टी इस सीट पर आगे चल रही है, उनके उम्मीदवार शंकर लालवानी अपने बहुजन समाज पार्टी के प्रतिद्वंद्वी संजय से 900,000 से ज्यादा वोटों से आगे हैं। गौरतलब है कि इंदौर से कांग्रेस के उम्मीदवार अक्षय कांति बांब ने नामांकन के दौरान अपना नाम वापस ले लिया था और बाद में भाजपा में शामिल हो गए थे।

गौर करने वाली बात है कि नोटा विकल्प का कोई चुनावी महत्व नहीं है। भले ही इसे सबसे ज्यादा वोट मिले हों। हालांकि, विजेता का चुनाव किस कैंडीडेट को ज्यादा वोट मिलेंगे इसके आधार पर किया जाता है।

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच (NEW) की एक रिपोर्ट के अनुसार, लोकसभा चुनाव में नोटा वोटों की सबसे अधिक संख्या बिहार के गोपालगंज (SC) निर्वाचन क्षेत्र में दोपहर 12 बजे तक 51,660 थी।

राज्य विधानसभा चुनावों की बात करें तो NOTA को सबसे ज्यादा वोट प्रतिशत 2020 में बिहार (7,06,252 वोट) और NCT दिल्ली (43,108 वोट) दो राज्यों के विधानसभा चुनावों में मिला, जो कुल 1.46% रहा।

अगस्त 2022 में पब्लिश की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले पांच सालों में राज्य और आम चुनावों में नोटा के लिए कुल 12.9 करोड़ वोट डाले गए हैं।

एडीआर ने सुझाव दिया है कि ऐसे मामलों में जब नोटा के लिए डाले गए वोट सभी चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों से अधिक हों तो किसी भी उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित नहीं किया जाना चाहिए और एक नया चुनाव कराया जाना चाहिए, जिसमें पहले के किसी भी उम्मीदवार को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

First Published - June 4, 2024 | 3:31 PM IST

संबंधित पोस्ट