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भारत को सबसे ज्यादा शुल्क लगाने वाला देश बताया: अमेरिकी राजदूत ने व्यापार को निष्पक्ष बनाने पर दिया जोर

भारत-अमेरिका व्यापार 120 अरब डॉलर के पार, शुल्क घटाने और निष्पक्ष व्यापार पर गहन चर्चा की जरूरत

Last Updated- December 19, 2024 | 11:23 PM IST
India and US

भारत में अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी ने गुरुवार को कहा कि भारत और अमेरिका को निष्पक्ष व समान व्यापार के लिए शुल्क घटाने पर मिलकर काम करने की जरूरत है। गार्सेटी ने यह भी कहा कि विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत सबसे ज्यादा कर लगाने वाला देश है। उन्होंने यूएस इंडिया बिजनेस काउंसिल (यूएसआईबीसी) द्वारा आयोजित एक उद्योग से जुड़े कार्यक्रम में कहा, ‘हमें मिलकर शुल्क घटाने की जरूरत है, न कि इसे बढ़ाने की। हमें मिलकर कारोबार बढ़ाने और इसे ज्यादा निष्पक्ष व समान बनाने की जरूरत है।

हमें साथ मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रशिक्षण व प्रतिभाएं उपलब्ध हों, जिससे कि भारत प्रशांत के दोनों पक्षों की कंपनियों की जरूरतें पूरी हो सकें।’ उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्षों की कठिनाइयों के बावजूद भारत-अमेरिका का द्विपक्षीय कारोबार 10 गुना बढ़ा है। उन्होंने कहा, ‘जैसा कि आपने सुना होगा, राष्ट्रपति चुने गए ट्रंप ने कल ही व्यापार के बारे में बात की। और शुल्क को निष्पक्ष कैसे किया जाना चाहिए, इस पर हमें ईमानदारी से बातचीत करनी चाहिए। मुझे लगता है कि साफ साफ बात करना हमारे लिए मददगार होगा। लेकिन हमें इसे एक शुरुआती बिंदु के रूप में उपयोग करना चाहिए ताकि हम जितना करते हैं उससे कहीं अधिक गहराई से बात कर सकें।’

इस सप्ताह की शुरुआत में अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए डॉनल्ड ट्रंप ने आलोचना करते हुए कहा था कि भारत बहुत ज्यादा शुल्क लेता है और उन्होंने चेतावनी दी थी कि जवाबी कर लगाया जाएगा। ट्रंप का ताजा बयान ऐसे समय में आया है, जब उन्होंने एक सप्ताह पहले मैक्सिको, कनाडा और चीन से आयात पर शुल्क बढ़ाने की बात कही थी। ट्रंप ने जो कहा, उसे आगे बढ़ाते हुए वाणिज्य मंत्री चुने गए हॉवर्ड लटनिक ने भी जवाबी कर की वकालत की, जो ट्रंप प्रशासन का प्रमुख मसला होगा।

भारत और अमेरिका के बीच कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय कारोबार करीब 120 अरब डॉलर हो गया है। अमेरिका, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार होने के साथ सबसे बड़ा निर्यात केंद्र है।

First Published - December 19, 2024 | 11:23 PM IST

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