facebookmetapixel
मजबूत फंडामेंटल के साथ शेयर बाजार में बढ़त की उम्मीद, BFSI क्षेत्र सबसे आगे: रमेश मंत्रीअमेरिकी प्रतिबंधों से वेनेजुएला की तेल अर्थव्यवस्था झुलसी, निर्यात पर गहरा असर; भारत का आयात भी घटाबांग्लादेश ने IPL के प्रसारण पर लगाया प्रतिबंध, एक्सपर्ट बोले: इस फैसले से कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगादिल्ली दंगा साजिश केस में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकारGrok विवाद में X को सरकार ने दी 72 घंटे की और मोहलत, महिलाओं व बच्चों की तस्वीरों पर केंद्र सख्तकेंद्रीय बजट से पहले IVCA की मांग: AIF ने प्राइवेट क्रेडिट फंड्स के लिए टैक्स में समानता की मांग कीSMC बिल पर एम. दामोदरन की चेतावनी: सेबी का निवेशकों की सुरक्षा पर फोकस कमजोरविश्व आर्थिक मंच की सलाना बैठक में दावोस जाएंगे भारतीय नेतागण, चौहान और वैष्णव करेंगे अगुआईभारत कोकिंग कोल का आईपीओ शुक्रवार को पेश होगा, ₹1,069 करोड़ जुटाने की तैयारीAI इम्पैक्ट समिट में ग्लोबल साउथ पर फोकस, खुद को AI सर्विस सप्लायर के रूप में पेश करेगा भारत

Bank borrowings : घटी नकदी तो बैंकों ने ली रिकॉर्ड उधारी

सितंबर 2022 में पहली बार बैंक उधारी 5 लाख करोड़ रुपये के पार

Last Updated- March 14, 2023 | 10:43 PM IST
PSBs Achieve ₹1.41 lakh crore net profit; GNPA drops to 3.12%
BS

तरलता की स्थिति में ढांचागत बदलाव होने से अधिशेष नकदी बहुत कम हो गई और उधारी तेजी से बढ़ने के कारण बैंक इस वित्त वर्ष में लघु अव​धि के ऋण पर ज्यादा निर्भर हो गए हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों से पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष में अब तक बैंकों ने औसतन 4.2 लाख करोड़ रुपये उधार लिए हैं, जबकि पिछले वित्त वर्ष में औसत उधारी केवल 2.6 लाख करोड़ रुपये थी। RBI के आंकड़े हर पखवाड़े बदलते हैं और ताजा आंकड़ों में 24 फरवरी को बैंकों की बकाया उधारी दिखाई गई है।

मार्च के दूसरे पखवाड़े में नकदी की स्थिति ज्यादा तंग होती दिख रही है, इसलिए वित्त वर्ष के बाकी दो पखवाड़ों में बैंक उधारी बढ़ने की संभावना है। कुल मिलाकर मौद्रिक ढिलाई खत्म करने के RBI के प्रयासों से अधिशेष नकदी में तेज कमी आई और सितंबर 2022 में पहली बार बैंक उधारी 5 लाख करोड़ रुपये के पार चली गई। अक्टूबर में भी उधारी उससे ऊपर ही रही।

RBI के आंकड़े बताते हैं कि बैंक उधारी में घरेलू उधारी के साथ बैंकिंग प्रणाली के बाहर की कुल उधारी भी शामिल है। इसमें भारतीय बैंकों द्वारा विदेश से लिया गया उधार भी शामिल है। RBI से ली गई उधारी को इससे बाहर रखा गया है।

विश्लेषकों ने कहा कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के लिए उधारी मद में दिए गए आंकड़े अल्पकालिक उधारी जैसे अंतरबैंक रीपो कार्रवाई और त्रिपक्षीय रीपो को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि उसमें अतिरिक्त टियर-1 बॉन्ड और इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड जारी करना भी शामिल है मगर जमा पत्र इसमें शामिल नहीं हैं।

इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च के निदेशक सौम्यजित नियोगी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘असल में उधारी का एक हिस्सा शुद्ध रूप से 50-60 हजार करोड़ रुपये के इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा अन्य ब़ॉन्ड के रूप में है।’ उन्होंने कहा, ‘ऋण वृद्धि जब मजबूत और टिकाऊ होती है तो बैंकों को अंततः अ​धिक जमा जैसे स्थिर समाधान तलाशने पड़ते हैं। वे कम मियाद की उधारी के दम पर ज्यादा कर्ज नहीं दे सकते।’

विश्लेषकों ने बैंक ऋण वृद्धि और जमा वृद्धि के बीच बड़ी खाई पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई नए कारण इसकी वजह हो सकते हैं। एचडीएफसी की प्रधान अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि ऋण वृद्धि घट नहीं रही और जमा में जिस बढ़ोतरी की आपको उम्मीद है, वह दरों में इजाफे के इस दौर में हो नहीं पाई है। हो सकता है कि लोग अब बचत के दूसरे रास्ते तलाश रहे हों।’

RBI के आंकड़ों से पता चलता है कि 24 फरवरी तक बैंकों की ऋण वृद्धि 15.5 फीसदी थी, जो 10.1 फीसदी की जमा वृद्धि के मुकाबले काफी अ​धिक है। बैंकिंग प्रणाली में मौजूद अधिशेष नकदी अप्रैल 2022 में 7.4 लाख करोड़ रुपये थी, जो दिसंबर-जनवरी में घटकर 1.6 लाख करोड़ रुपये रह गई।

First Published - March 14, 2023 | 10:43 PM IST

संबंधित पोस्ट