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देश के ‘घोस्ट मॉल्स’ से हो सकती है ₹357 करोड़ की कमाई, 8 मेट्रो शहरों में है सबसे बड़ा मौका

प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी कंपनी नाइट फ्रैंक इंडिया ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें उसने देश के 32 शहरों में 365 शॉपिंग सेंटरों में से 74 की पहचान 'घोस्ट मॉल' के रूप में की है

Last Updated- December 09, 2025 | 3:41 PM IST
ghost mall
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

सोचिए, आपके शहर का कोई पुराना, वीरान पड़ा बंद मॉल हो, जहां पहले कभी भीड़ उमड़ती थी, लोग शॉपिंग और खाने-पीने जाते थे और हर तरफ चहल-पहल रहती थी, पर अब वहां किसी के कदमों की आवाज तक नहीं आती। अब वहां दरवाजों पर ताले लगे हो, लिफ्टें जंग खा रही हैं, फूड कोर्ट की मेजें धूल में ढकी हैं और बड़े-बड़े शो-रूम खाली पड़े हैं। लेकिन हैरानी की बात ये है कि ऐसे ही ‘घोस्ट मॉल’ से हर साल करीब 357 करोड़ रुपये का किराया कमाया जा सकता है।

प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी कंपनी नाइट फ्रैंक इंडिया ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें उसने देश के 32 शहरों में 365 शॉपिंग सेंटरों में से 74 की पहचान ‘घोस्ट मॉल’ (वीरान/खाली मॉल) के रूप में की है। हालांकि, मैसूरु, विजयवाड़ा, तिरुवनंतपुरम, विशाखापत्तनम और वडोदरा ऐसे शहर हैं जहां के शॉपिंग सेंटर लगभग भरे हैं, जहां से अच्छा किराया मिल रहा है।

इस रिपोर्ट में क्या बताया गया है?

  • देश के 32 बड़े शहरों में कुल 365 शॉपिंग मॉल हैं।
  • इनमें से 74 मॉल पूरी तरह वीरान हालत में हैं, यानी इसे ‘घोस्ट मॉल’ कहा गया है।
  • इन 74 मॉलों में कुल 1.55 करोड़ वर्ग फुट जगह खाली पड़ी है।
  • इनमें से सिर्फ 15 चुनिंदा मॉलों को अगर जल्दी ठीक किया जाए (कुल 48 लाख वर्ग फुट) तो भी हर साल 357 करोड़ रुपये किराया आएगा।

बड़े शहरों में भी है बड़ी समस्या

लोग सोचते हैं कि घोस्ट मॉल सिर्फ छोटे शहरों में होंगे, लेकिन ऐसा नहीं है।

  • 8 बड़े मेट्रो शहर (टियर-1) में अगर इन बंद पड़े मॉल को किराए पर लगा दिया जाए तो 357 करोड़ रुपये में से 236 करोड़ रुपये वही से आ जाएंगे। 
  • बाकी टियर-2 शहर में बंद पड़े मॉल को किराए पर देने से 121 करोड़ रुपये आ जाएंगे।
  • टियर-1 शहरों में ही 1.19 करोड़ वर्ग फुट जगह खाली पड़ी है। मतलब बड़े शहरों के पुराने मॉल भी ग्राहकों की नई पसंद से पीछे छूट गए हैं।

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किस शहर में मॉल एकदम खचाखच है?

रिपोर्ट में कुछ शहरों की तारीफ की गई है, जहां मॉल लगभग पूरी तरह भरे हुए हैं:

  • मैसूरु: सिर्फ 2% जगह खाली
  • विजयवाड़ा: 4%
  • वडोदरा: 5%
  • तिरुवनंतपुरम और विशाखापत्तनम: 6-6%

इन शहरों में नया मॉल बहुत सोच-समझकर बनाया गया, इसलिए ग्राहक भी यहां जमकर आ रहे हैं। 

सबसे खराब हालत वाले शहर

दूसरी तरफ कुछ शहरों में आधे से ज्यादा मॉल खाली पड़े हैं:

  • नागपुर: 49% जगह खाली
  • अमृतसर: 41%
  • जालंधर: 34%

यहां बहुत सारे मॉल एक साथ बना दिए गए, लेकिन ब्रांड्स और ग्राहक की संख्या नहीं बढ़ पाई।

अच्छे मॉल vs खराब मॉल

  • ग्रेड-A मॉल (जो नए और अच्छे हैं) में सिर्फ 5-6% जगह खाली है।
  • ग्रेड-C मॉल (पुराने और खराब डिजाइन वाले) में 36% तक जगह खाली पड़ी है।
    पूरे 32 शहरों में औसतन 15.4% जगह खाली है।

आगे क्या हो सकता है?

नाइट फ्रैंक के चेयरमैन शिशिर बैजल ने कहा, “भारत का रिटेल सेक्टर बहुत तेजी से बढ़ रहा है। लोग अब अच्छे मॉल में ही जाना पसंद करते हैं। पुराने मॉलों को अगर नया लुक दिया जाए और अच्छे ब्रांड्स को लाया जाए, तो बात बन सकती है। साथ ही को-वर्किंग स्पेस या कम्युनिटी सेंटर बढ़ाने पर भी इसमें दोबारा चमक देखी जा सकती है। सिर्फ 15 मॉल ठीक करने से ही 357 करोड़ रुपये सालाना किराया आ सकता है। ये डेवलपर्स और निवेशकों के लिए बड़ा मौका है।”

First Published - December 9, 2025 | 3:36 PM IST

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