facebookmetapixel
Advertisement
संप्रभुता, व्यावहारिकता और विकल्प: भारत के लिए जोखिम और समझदारी के बीच का संतुलनEditorial: ट्रंप के टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का ‘हथौड़ा’ और आगे की राहसुरक्षा के नाम पर अव्यवस्था और ‘चीनी’ रोबोडॉग का स्वदेशी दावा, AI इम्पैक्ट समिट पर उठे गंभीर सवालGDP Rebasing: नए आधार वर्ष से GDP की नई सीरीज तैयार, पर WPI को लेकर अर्थशास्त्रियों में मतभेदEnergy Growth: सरकारी तेल कंपनियों ने खोला खजाना, बीते 10 महीनों में खर्च किए ₹1.07 लाख करोड़US-India Trade: ट्रंप के पास हैं कई व्यापारिक हथियार, धारा 301 और 232 से बढ़ सकती है भारत की टेंशनIDFC First Bank में 590 करोड़ रुपये की बड़ी धोखाधड़ी, सरकारी खातों में हेरफेर से मचा हड़कंपMutual Funds: ‘मेगा फंड्स’ का बढ़ा दबदबा, ₹1 लाख करोड़ के क्लब में शामिल हुई तीन और बड़ी योजनाएंSME Growth: अब छोटी कंपनियां भी बना रहीं कर्मचारियों को करोड़पति, ईसॉप्स का बढ़ रहा है क्रेजMarket Alert: क्या सोना-चांदी बनेंगे निवेशकों के लिए सुरक्षित ढाल? ट्रंप के फैसले से मची हलचल

भारतीय रिफाइनरियों में निवेश की सोच रही सऊदी अरामको

Advertisement

दुनिया की अग्रणी तेल निर्यातक विश्व में सबसे तेजी से बढ़ते उभरते बाजार में अपने कच्चे तेल के लिए एक स्थिर आउटलेट की तलाश कर रही है।

Last Updated- March 27, 2025 | 10:53 PM IST
petrol companies

सऊदी अरामको भारत की दो नियोजित रिफाइनरियों में निवेश के लिए बातचीत कर रही है। दुनिया की अग्रणी तेल निर्यातक विश्व में सबसे तेजी से बढ़ते उभरते बाजार में अपने कच्चे तेल के लिए एक स्थिर आउटलेट की तलाश कर रही है। इसके जानकार कई भारतीय सूत्रों ने यह बात बताई।

विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता और आयातक देश भारत वैश्विक रिफाइनिंग का केंद्र बनना चाहता है क्योंकि पश्चिमी कंपनियां स्वच्छ ईंधन का रुख कर रही हैं और कच्चे तेल की प्रसंस्करण क्षमता में कमी कर रही हैं। इस बीच, भारत के तेल आयात में सऊदी अरब की हिस्सेदारी में कमी आई है क्योंकि रिफाइनरी कंपनियों ने अपने संयंत्रों को उन्नत बनाने के लिए अरबों डॉलर का निवेश किया है और इस तरह रूस जैसे सस्ते विकल्पों का उपयोग करने के लिए कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता शामिल की है।

इस बारे में अरामको, बीपीसीएल और ओएनजीसी ने कोई टिप्पणी नहीं की। दोनों भारतीय कंपनियां सरकार के स्वामित्व वाली हैं। ओएनजीसी की गुजरात रिफाइनरी योजना अभी शुरुआती अवस्था में है। बीपीसीएल के चेयरमैन ने दिसंबर में कहा था कि उनका लक्ष्य आंध्र प्रदेश रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल परियोजना में 11 अरब डॉलर निवेश करने का है।

दो रिफाइनरी सूत्रों ने कहा कि परियोजनाएं योजना के मुताबिक आगे बढ़ेंगी चाहे अरामको निवेश करे या न करे। उन्होंने कहा, सारी चीजें अरामको के प्रस्ताव पर निर्भर करेंगी। सूत्रों ने बताया कि सरकारी नियंत्रण वाली अरामको का परियोजना में अपनी हिस्सेदारी के तीन गुना के बराबर तेल की आपूर्ति करने का प्रस्ताव है और वह उत्पादन का अपना हिस्सा या तो भारत में या निर्यात के माध्यम से बेचना चाहती है।

दूसरे रिफाइनरी सूत्र ने कहा, हम कच्चे तेल की खरीद में लचीलापन चाहते हैं। अगर हम उन्हें 30 फीसदी हिस्सेदारी देते हैं तो वे 90 फीसदी क्षमता के बराबर कच्चे तेल की आपूर्ति करना चाहेंगे, जो संभव नहीं है।

Advertisement
First Published - March 27, 2025 | 10:44 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement