facebookmetapixel
Advertisement
‘हेडलाइन्स’ से कहीं आप भी तो नहीं हो रहे गुमराह? SIP पर जारी रखें ये स्ट्रैटेजीAM/NS India में बड़ा बदलाव: दिलीप ओम्मन होंगे रिटायर, अमित हरलका बनेंगे नए सीईओभारत में पेट्रोल, डीजल या LPG की कोई कमी नहीं, 60 दिन का स्टॉक मौजूद: सरकारभारत की तेल जरूरतें क्यों पूरी नहीं कर पा रहा ईरानी क्रूड ऑयल? चीन की ओर मुड़े जहाजलाइन लगाने की जरूरत नहीं, घर पहुंचेगा गैस सिलेंडर: सीएम योगी आदित्यनाथऑल टाइम हाई के करीब Oil Stock पर ब्रोकरेज सुपर बुलिश, कहा- खरीद लें, 65% और चढ़ने का रखता है दमBharat PET IPO: ₹760 करोड़ जुटाने की तैयारी, सेबी में DRHP फाइल; जुटाई रकम का क्या करेगी कंपनीतेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेतवैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावना

ONGC के साथ भारत में तेल खोज को तैयार वैश्विक दिग्गज कंपनियां

Advertisement

भारत सरकार ओएनजीसी और वैश्विक तेल कंपनियों के साथ गहरे समुद्री ब्लॉकों में अन्वेषण को बढ़ावा देने की योजना बना रही है।

Last Updated- July 06, 2025 | 10:10 PM IST
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत की अब तक की सबसे बड़ी हाइड्रोकार्बन अन्वेषण की बोली के दसवें दौर में ओपन एकरेज लाइसेंसिंग नीति (ओएएलपी) के तहत 1,91,986.31 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की पेशकश की जा रही है। इस दौर की बोली में देश के अन्वेषण एवं उत्पादन (ईऐंडपी) सेक्टर में वैश्विक तेल व गैस दिग्गजों की रुचि देखने को मिल सकती है।

इस मामले से जुड़े कई सूत्रों ने कहा कि सरकारी कंपनी तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) संयुक्त रूप से बोली लगाने के लिए पहले से ही घरेलू दिग्गज रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल)  के अलावा ब्राजील की पेट्रोब्रास और लंदन मुख्यालय वाली बीपी पीएलसी के साथ बातचीत कर रही है।  हाइड्रोकार्बन नियामक हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय के मुताबिक बोली दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई है। सूत्रों ने संकेत दिए कि भारत के घरेलू कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस उत्पादन में 70 प्रतिशत हिस्सेदारी वाली ओएनजीसी ने इस दौर के सभी 25 ब्लॉकों में रुचि दिखाई है। इसके अलावा साझेदारों को डीप और अट्रा-डीप एकरेज में अन्वेषण के लिए शामिल किया जा सकता है।

इस सिलसिले में आरआईएल, ओएनजीसी, बीपी  और पेट्रोब्रास को भेजे गए ई-मेल का कोई उचित जवाब नहीं मिला है।  

इस मामले से जुड़े एक सूत्र ने कहा, ‘ओएएलपी के दसवें दौर के तहत पेशकश में शामिल सभी 25 ब्लॉकों में ओएनजीसी दिलचस्पी  ले रही है। कुछ में वह खुद और कुछ में साझेदारों के साथ रुचि दिखा रही है। इसके लिए  साझेदार लाए जाएंगे क्योंकि कुछ इलाके कठिन हैं और इसके लिए भारी निवेश की जरूरत है। हम पेट्रोब्रास, बीपी और आरआईएल सहित करीब हर कंपनी के साथ बातचीत में लगे हैं।’

इस साल की शुरुआत में ओएएलपी के नवें दौर में 28 हाइड्रोकार्बन ब्लॉकों की पेशकश की गई थी। इसमें से ओएनजीसी को 15 ब्लॉक मिले, जिसमें 4 ब्लॉक अन्य कंपनियों के साथ पार्टनरशिप में हैं, जबकि 11 स्वतंत्र रूप से मिले हैं।

इनमें से सौराष्ट्र बेसिन में जीएस-ओएसएचपी-2022/2 के लिए ओएनजीसी (40 प्रतिशत पार्टिसिपेटिंग इंटरेस्ट), आरआईएल (30 प्रतिशत) और बीपी पीएलसी (30 प्रतिशत) ने संयुक्त रूप से बोली लगाई थी। यह एकमात्र ऐसा समय था जब तीनों प्रमुख कंपनियों ने सहयोग किया था।

ओएनजीसी की पहले पेट्रोलियो ब्रासीलीरो एसए या पेट्रोब्रास के साथ भी सहभागिता रही है।

दिलचस्प है कि पेट्रोब्रास के पास ओएनजीसी द्वारा संचालित केजी-डीएन-98/2 में 15 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, लेकिन ब्राजील की इस प्रमुख कंपनी ने 2010 के आरंभ में इसे छोड़ दिया था, ताकि वह अपने देश में तेल और गैस अन्वेषण पर ध्यान केंद्रित कर सके।

 इस साल अप्रैल में ब्राजील की सरकारी तेल फर्म के ईऐंडपी के प्रमुख सिल्विया अंजोस ने पुष्टि की कि आगामी दौर के लिए भारत में डीप और अल्ट्रा डीप अपतटीय इलाकों में संभावनाओं के आकलन के लिए आंकड़े एकत्र किए हैं।  

भारत में संभावित साझेदारी के लिए पेट्रोब्रास ने ओएनजीसी और ऑयल इंडिया दोनों के साथ ही सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें अपस्ट्रीम, मार्केटिंग, डीकार्बनाइडेशन और लो कॉर्बन सॉल्यूशंस शामिल हैं।

पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अधिकारी ने ओएनजीसी का हवाला देते हुए कहा, ‘कंपनी ने पहले भी एक अंतरराष्ट्रीय साझेदार और एक निजी क्षेत्र की इकाई के साथ मिलकर काम किया है। इसमें कोई समस्या नहीं है। हम भारत में ईऐंडपी क्षेत्र में आने वाली विदेशी संस्थाओं की सराहना करते हैं।’

सरकार पिछले कुछ  वर्षों से ईऐंडपी क्षेत्र में विदेशी इकाइयों को लाने में रुचि दिखाती रही है। बहरहाल, एक अधिकारी ने कहा कि वैश्विक तेल आपूर्ति की अधिकता और प्रमुख बाजारों में कमजोर औद्योगिक मांग के कारण अन्वेषण संबंधी उत्साह कम हुआ है।

उन्होंने कहा, ‘यह भी कोई रहस्य नहीं है कि विदेशी कंपनियां अक्सर भारतीय बाजार में आगे बढ़ने के लिए स्थानीय साझेदारों को चुनती हैं। ओएनजीसी के साथ गठजोड़ इसका उदाहरण है।’

Advertisement
First Published - July 6, 2025 | 10:10 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement