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अमेरिका के वीजा फीस बढ़ोतरी के फैसले से IT सेक्टर पर असर, भारत में GCC केंद्रों का विस्तार होगा तेज

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भारत में पहले से ही फल-फूल रहे वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) को बढ़ावा मिलेगा क्योंकि कंपनियां ज्यादा महत्त्वपूर्ण कार्य को विदेश में स्थानांतरित कर रही हैं

Last Updated- September 21, 2025 | 10:40 PM IST
IT Company
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

एच-1बी वीजा के सभी नए आवेदनों के लिए 1,00,000 डॉलर वसूलने का अमेरिका का फैसला आईटी सेवा उद्योग के लिए झटका है। उद्योग को वीजा पर अपनी निर्भरता और कम करनी होगी। लेकिन इससे भारत में पहले से ही फल-फूल रहे वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) को बढ़ावा मिलेगा क्योंकि कंपनियां ज्यादा महत्त्वपूर्ण कार्य को विदेश में स्थानांतरित कर रही हैं। विशेषज्ञों ने यह जानकारी दी है।

कई विशेषज्ञ इस मनमाने कदम को अमेरिका का नुकसान और भारत का लाभ बता रहे हैं। उन्हें लगता है कि इससे रिवर्स ब्रेन ड्रेन (प्रतिभा की देश में वापसी) होगा और ज्यादा लोग अमेरिका से वापस आकर बेंगलूरु, हैदराबाद, पुणे और गुरुग्राम में फैले हजारों जीसीसी में नौकरी करेंगे।

थोलोन्स के चेयरमैन और मुख्य कार्य अधिकारी अविनाश वशिष्ठ ने लिंक्डइन पर लिखा, ‘एच-1बी वीजा का प्रमुख रूप से लाभ उठाने वाली एमेजॉन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी कंपनियां भारत में अपने जीसीसी और अनुसंधान एवं विकास केंद्रों पर और ज्यादा जोर देंगी। अमेरिका में ‘प्रतिभा के लिए जंग’ और भी ज्यादा रणनीतिक होने वाली है क्योंकि सर्वाधिक नवाचार वाली प्रतिभाएं अब वहीं होंगी जहां किफायती लागत और प्रतिभा मिलेगी, जैसे भारत में।’

नैसकॉम के आंकड़ों के अनुसार भारत में लगभग 1,760 जीसीसी हैं। इनकी संख्या अगले साल के अंत तक 2,000 पार होने की उम्मीद है। इनमें से कई ऐसे केंद्र हैं, जिन्हें मुख्यालय के विस्तार के तौर पर देखा जाता है। ऐसे केंद्र खुदरा, वाहन, स्वास्थ्य सेवा और बैंकिंग क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीकी कार्यों पर काम करते हैं तथा उत्पाद अनुसंधान एवं विकास, विश्लेषण और डिजाइन पर पहले से कहीं अधिक नियंत्रण होता है। कई वैश्विक अधिकारी भी इन केंद्रों के बाहर रहते हैं और लोग वैश्विक स्तर पर उन्हें रिपोर्ट करते हैं।

हालांकि भारत में कई वर्षों से कार्यरत होने के बावजूद कई जीसीसी उस स्तर की परिपक्वता हासिल नहीं कर पाए हैं और उन्हें अब भी मूल्य सृजन केंद्रों के बजाय वितरण केंद्रों के रूप में देखा जाता है। यह बात आने वाले दिनों में बड़ी चुनौती पेश कर सकती है, क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप के आसपास के लोगों का मूड खास तौर पर एच-1बी वीजा और आम तौर पर आउटसोर्सिंग दोनों के ही प्रति द्वेषपूर्ण होता जा रहा है।

केपीएमजी इंडिया में जीसीसी की पार्टनर और इंडिया लीडर शालिनी पिल्लै ने कहा कि मौजूदा हालात ऐसे केंद्रों के लिए चेतावनी है कि वे और अधिक मूल्य वर्धित कार्य करें तथा खुद को वैश्विक संगठन के अनिवार्य भाग के तौर पर बना लें।

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First Published - September 21, 2025 | 10:40 PM IST

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