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FY24 में CSR पर टॉप बिजनेस हाउस का दबदबा – टाटा, अंबानी, अदाणी, बिड़ला ने दिया 20% फंड!

'इंडिया फिलेंथ्रपी रिपोर्ट 2025' के अनुसार, भारत में टॉप 2% कारोबारी घराने कर रहे हैं 50% से ज्यादा CSR निवेश, लेकिन धनाढ्य व्यक्तियों का योगदान घटा

Last Updated- February 26, 2025 | 11:34 PM IST
Mukesh Ambani and Gautam Adani

वित्त वर्ष 2024 में परिवार के स्वामित्व वाली अथवा परिवार द्वारा संचालित कंपनियों द्वारा कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) मद में किए गए कुल खर्च में देश के शीर्ष चार परिवारों- टाटा, अंबानी, अदाणी और बिड़ला- का योगदान करीब 20 फीसदी रहा। दासरा के साथ बेन ऐंड कंपनी द्वारा तैयार ‘इंडिया फिलेंथ्रपी रिपोर्ट 2025’ के अनुसार, इन कंपनियों ने सीएसआर मद में प्रति समूह औसतन 800 करोड़ रुपये से 1,000 करोड़ रुपये का योगदान किया। यह रिपोर्ट आज जारी की गई है।

रिपोर्ट में शीर्ष 2 फीसदी उन कारोबारी घरानों की व्यापक भूमिका पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है जो करीब 350 कंपनियों का संचालन करते हैं। कारोबारी घरानों के स्वामित्व अथवा उनके द्वारा संचालित कंपनियों के कुल सीएसआर खर्च में शीर्ष 2 फीसदी कारोबारी घरानों का योगदान 50 से 55 फीसदी दर्ज किया गया।

इस श्रेणी में कई अन्य बड़े नाम भी शामिल हैं जिनमें हीरो मोटोकॉर्प के मुंजाल, पीरामल परिवार द्वारा संचालित पीरामल एंटरप्राइजेज और अपोलो टायर्स के कंवर परिवार शामिल हैं। इनमें से हर परिवार ने औसतन 20 से 25 करोड़ रुपये का निवेश किया है। शेष 98 फीसदी कारोबारी घराने 16,500 से अधिक कंपनियों का संचालन करते हैं। सीएसआर मद में उनका योगदान औसतन 1 करोड़ रुपये रहा जो न्यूनतम 50 लाख रुपये से लेकर अधिकतम 7 करोड़ रुपये तक है। इनमें अधिकतर एसएमई, मझोले आकार के उद्यम और एमएसएमई शामिल हैं।

रिपोर्ट में कारोबारी घरानों के धर्मादा कार्यों के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए दासरा के 350 परिवारों के नेटवर्क का भी फायदा उठाया गया है। आंकड़ों के अनुसार इन परिवारों ने दिसंबर 2024 तक कुल मिलाकर 1,600 करोड़ रुपये का योगदान किया और 20 रणनीतिक साझेदारियां की।

कारोबारी घरानों द्वारा संचालित कंपनियों का सीएसआर मद में पर्याप्त योगदान होने के बावजूद धनाढ्य एवं अतिधनाढ्य व्यक्तियों और संपन्न लोगों का सीएसआर मद में योगदान वित्त वर्ष 2024 में घट गया। उनका योगदान धर्मादा कार्यों में निजी क्षेत्र के कुल खर्च का 26 फीसदी रह गया। वित्त वर्ष 2023 में यह आंकड़ा 27 फीसदी रहा था।

इसकी मुख्य वजह अतिधनाढ्य व्यक्तियों के सीएसआर खर्च में महज 2 फीसदी की मामूली वृद्धि रही। इस दौरान निजी क्षेत्र का योगदान वित्त वर्ष 2024 में 7 फीसदी प्रति वर्ष बढ़कर 131,000 करोड़ रुपये हो गया।
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि निकट भविष्य में धनाढ्य एवं अतिधनाढ्य व्यक्तियों की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि दिखेगी। उम्मीद जताई गई है कि वित्त वर्ष 2029 तक उनकी हिस्सेदारी धर्मादा कार्यों में निजी क्षेत्र के कुल योगदान का 32 से 36 फीसदी हो जाएगी।

यह रिपोर्ट कुछ दिलचस्प रुझानों पर भी प्रकाश डालती है। रिपोर्ट से पता चलता है कि कारोबारी घराने उन क्षेत्रों में सीएसआर खर्च बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं जिन्हें पहले नजरअंदाज किया गया था। उदाहरण के लिए, 40 फीसदी कारोबारी घराने अब लिंग, समानता, विविधता और समावेशन जैसे मुद्दों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं, 29 फीसदी की नजर जलवायु संबंधी कार्यों पर, 8 फीसदी का जोर पशु कल्याण पर और 39 फीसदी की नजर भविष्य के अनुकूल परिवेश तैयार करने पर है।

इसके अलावा, करीब 55 फीसदी कारोबारी घरानों में धर्मादा कार्यों का नेतृत्व महिलाओं के हाथों में है। इसी प्रकार 33 फीसदी कारोबारी घरानों में नई पीढ़ी अपने धर्मादा कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं। करीब 65 फीसदी कारोबारी घरानों के पास अपने धर्मादा कार्यों की देखरेख के लिए समर्पित कर्मचारी मौजूद हैं। रिपोर्ट से पता चलता है कि 41 फीसदी कारोबारी घराने अपने बुनियादी दृष्टिकोण के अनुरूप दान देना पसंद करते हैं।

First Published - February 26, 2025 | 11:27 PM IST

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