प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने गुरुवार को कहा कि देश में उत्सर्जन तीव्रता को लगातार कम करने और कोयला गैसीकरण जैसे विकल्प अपनाए जाने के बावजूद फिलहाल देश की ऊर्जा जरूरत को पूरा करने में कोयला मुख्य भूमिका निभाता रहेगा। नई दिल्ली में ‘सतत ऊर्जा संक्रमण-वैश्विक परिप्रेक्ष्य’ पर कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मिश्रा ने कहा कि जलवायु वित्त और प्रौद्योगिकी तक पहुंच विकासशील देशों के लिए प्रमुख बाधाएं हैं। उन्होंने कहा, ‘भारत ने लगातार इस बात पर जोर दिया है कि जलवायु कार्रवाई समानता और न्याय पर आधारित होनी चाहिए। साथ ही भारत का यह भी मानना है कि जलवायु कार्रवाई में पर्याप्त तथा समय पर आवश्यकतानुसार धन की उपलब्धता बहुत जरूरी है।’
उभरती नई प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि जैसे-जैसे नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ेगा, प्रणालीगत विश्वसनीयता और ग्रिड स्थिरता अधिक जटिल होती जाएगी। मिश्रा ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा अब कोई क्षेत्रीय एजेंडा नहीं है। यह विकास, प्रतिस्पर्धा, सामाजिक समावेश और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण हो गया है। भारत ने 2005 और 2020 के बीच अपने सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता को लगभग 36 प्रतिशत तक कम कर दिया है, जिससे 2030 की समय सीमा से नौ साल पहले अपनी पेरिस समझौते की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने वाला पहला वह जी20 देश बन गया है।
परमाणु ऊर्जा के बारे में मिश्रा ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाकर 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता में काफी वृद्धि होने की उम्मीद है। इससे दृढ़ एवं शून्य-कार्बन बेसलोड बिजली प्रदान करने में भी मदद मिलेगी। स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सरकारी नीतियों के बारे में टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार में सामाजिक भागीदारी की महत्ता को ध्यान में रखते हुए भारत ने लगभग हर क्षेत्र में घरेलू विद्युतीकरण लक्ष्य हासिल कर लिया है। मिश्रा ने यह भी कहा कि सौर पीवी मॉड्यूल के लिए मौजूदा उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के आधार पर भारत की सौर विनिर्माण क्षमता 2022 से 120 गीगावाट तक बढ़ चुकी है।
इंटरनैशनल सोलर एलायंस (आईएसए) की सफलता पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की नीतियों ने उसे जलवायु मुद्दे पर वैश्विक स्तर पर अग्रणी रहने की उसकी भूमिका को मजबूत किया है। आईएसए के संस्थापक सदस्यों में से एक के रूप में भारत सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए 112 राष्ट्रों को एक साथ लाया है। इनमें ज्यादातर विकासशील अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं।