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भारत के छह प्रमुख उद्योगों का विनिर्माण GVA में आधे से अधिक योगदान, महाराष्ट्र और गुजरात शीर्ष पर

NSO के सर्वे में बुनियादी धातुओं, रसायनों और वाहन उद्योगों का मुख्य योगदान, पांच राज्यों का विनिर्माण जीवीए में 54.7% हिस्सा

Last Updated- November 01, 2024 | 9:29 PM IST
Manufacturing

भारत के 29 प्रमुख उद्योगों में से छह का वर्ष 2022-23 में देश के औपचारिक विनिर्माण क्षेत्र के सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में योगदान आधे से अधिक है। यह जानकारी राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के बुधवार को जारी अतिरिक्त उद्योगों के सालाना सर्वे (एएसआई) में दी गई है। यह सर्वे विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादकता की कुछ प्रकृति को उजागर करती है। दरअसल ज्यादातर औद्योगिक समूह अंतिम तैयार वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य में कुछ ही इजाफा करते हैं जिससे उनका कुल जीवीए में योगदान कम रहता है।

आंकड़ों के अनुसार ‘बुनियादी धातुओं’, ‘रसायन व रसायन के उत्पादों’, ‘परिष्कृत पेट्रोलियम’, ‘मोटर वाहन’, ‘औषधि’ और ‘खाद्य उत्पादों’ का वित्त वर्ष 23 में योगदान 52.6 प्रतिशत था। इसमें ‘बुनियादी धातुओं’ और ‘रसायन व रसायन उत्पादों’ का अकेले योगदान 22 प्रतिशत था और शेष चार उद्योगों का योगदान था।

हालांकि वर्ष 2022-23 की तुलना में बीते वित्तीय वर्ष में इन छह उद्योगों का योगदान 55.78 प्रतिशत था। हालांकि भारत के कुल औपचारिक विनिर्माण में बीते साल की तुलना में बुनियादी धातु उद्योग (11.6 प्रतिशत), रसायन एवं रसायन उत्पाद उद्योग (9.8 प्रतिशत) और औषधि उद्योग (7.3 प्रतिशत) के योगदान में गिरावट आई जबकि वाहन उद्योग (8.07 प्रतिशत), खाद्य उत्पाद उद्योग (7.14 प्रतिशत), और परिष्कृत पेट्रोलियम उद्योग (8.7 प्रतिशत) के योगदान में सुधार आया।

आंकड़ों से यह भी पता चला कि केवल पांच राज्यों का भारत के विनिर्माण जीवीए में योगदान करीब आधा है। इस क्रम में महाराष्ट्र (16.3 प्रतिशत), गुजरात (14.8 प्रतिशत), तमिलनाडु (10.3 प्रतिशत), कर्नाटक (7.04 प्रतिशत) और उत्तर प्रदेश (6.1 प्रतिशत) का योगदान कुछ बढ़कर 54.7 प्रतिशत हो गया था जबकि यह वित्त वर्ष 22 में 53.3 प्रतिशत था। इनमें वित्त वर्ष 22 की तुलना में वित्त वर्ष 23 में कर्नाटक (7.04 प्रतिशत) को छोड़कर अन्य चार राज्यों के योगदान में वृद्धि हुई। वर्ष 2022-233 में बीते साल की तुलना में विनिर्माण जीवीए 7.3 प्रतिशत बढ़कर 21.97 लाख करोड़ (हालिया मूल्य) बढ़ा था।

First Published - November 1, 2024 | 9:29 PM IST

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