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EV Adoption: मर्सिडीज ने ई-कारों के प्रति केंद्र सरकार के रुख को सराहा

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मर्सिडीज-बेंज इंडिया ने इलेक्ट्रिक वाहनों पर 5% जीएसटी नीति की सराहना की, मेबैक EQS 680 SUV को 2.25 करोड़ रुपये में लॉन्च किया।

Last Updated- September 05, 2024 | 10:13 PM IST
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मर्सिडीज-बेंज इंडिया तेल-गैस इंजन वाली कारों से इलेक्ट्रिक कारों की दिशा में बढ़ने के प्रति केंद्र सरकार के ‘स्पष्ट रुख और ध्यान’ की सराहना करती है। मर्सिडीज-बेंज इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्य अधिकारी संतोष अय्यर ने आज बिजनेस स्टैंडर्ड को यह जानकारी दी। वह दो दिन पहले भारत के जी20 शेरपा अमिताभ कांत के बयान के बारे में बात कर रहे थे, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया था कि देश ‘लंबे समय तक’ इलेक्ट्रिक कारों पर पांच प्रतिशत और हाइब्रिड कारों पर 48 प्रतिशत कर जारी रखेगा।

अय्यर ने कहा, ‘मुझे लगता है कि यह बहुत ही स्वागत योग्य बयान है। हम इलेक्ट्रिक कारों पर सरकार के रुख और इलेक्ट्रिक कारों की दिशा में बढ़ने के मामले में काफी स्पष्ट प्रयास की सराहना करते हैं क्योंकि इलेक्ट्रिक कार की तकनीक महंगी है। आपको शुरुआत में इन्हें अपनाने वालों के लिए समर्थन की जरूरत होती है। कई साल की अवधि के दौरान जब तकनीक की लागत कम होगी, तो इसके साथ (अन्य कारों के साथ-साथ) समान बर्ताव किया जा सकता है।’

मर्सिडीज-बेंज ने गुरुवार को अपने काफी महंगी कार मेबैक ईक्यूएस 680 स्पोर्ट यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) को 2.25 करोड़ रुपये (एक्स-शोरूम) की शुरुआती कीमत पर पेश किया। यह भारत में पेश की जाने वाली पहली इलेक्ट्रिक मेबैक कार है। मेबैक इस जर्मन कंपनी का टॉप एंड लग्जरी कार मॉडल है।

उन्होंने कहा ‘मुझे लगता है कि सरकार सभी सही काम कर रही है। केंद्र सरकार के स्तर पर उनके पास इलेक्ट्रिक कारों, जिन पर पांच प्रतिशत जीएसटी है और अन्य प्रकार की कारों के बीच स्पष्ट अंतर है। राज्य सरकारों के स्तर पर उनमें से ज्यादातर इलेक्ट्रिक कारों पर शून्य सड़क कर की पेशकश कर रही हैं। इससे ईवी की कीमतें कम हो जाती हैं। इससे निश्चित रूप से ईवी अपनाने में मदद मिलती है।’

चूंकि भारत का लक्ष्य साल 2070 तक कार्बन न्यूट्रल बनना है, इसलिए देश में वाहन विनिर्माता भविष्य की सर्वोत्तम राह को लेकर बंटे हुए हैं। मारुति सुजूकी, टोयोटा और होंडा जैसी जापान की दिग्गज कंपनियां हाइब्रिड कारों पर कर कटौती के लिए जोर दे रही हैं।

उनका तर्क है कि अकेले ईवी ही उत्सर्जन कम करने का पूरा बोझ नहीं उठा सकते हैं। अलबत्ता टाटा मोटर्स, ह्युंडै, किया और महिंद्रा ऐंड महिंद्रा जैसी कार विनिर्माता कंपनियां इस बात पर जोर दे रही हैं कि ईवी के प्रति पूरी पक्के वादे से ही भारत की सड़कों को सही मायने में कार्बन मुक्त किया जा सकता है।

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First Published - September 5, 2024 | 10:13 PM IST

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