पिछले सप्ताह इंडिगो द्वारा लगभग 4,500 उड़ानों को असाधारण रूप से रद्द किए जाने के कारण हुए राजस्व नुकसान का आकलन कर रहे निजी हवाई अड्डा संचालक विमानन कंपनी से मुआवजा मांगने पर आंतरिक रूप से विचार-विमर्श कर रहे हैं।
नाम न छापने की शर्त पर बड़ी निजी हवाई अड्डा संचालक के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हां, हम कारोबार में हुए नुकसान के लिए मुआवजे पर विचार करने के संबंध में वरिष्ठ प्रबंधन के बीच चर्चा कर रहे हैं। हमारा आपसी संबंध है और यह संवेदनशील मामला है। संकट को खत्म होने दें और उड़ान संचालन स्थिर हो जाए, उसके बाद हम अंतिम फैसला लेंगे। हमें पूरी तस्वीर तभी मिलेगी, जब सभी उड़ानें वापस आ जाएंगी, जिसमें कुछ दिन लग सकते हैं।’
हवाई अड्डों के विमानन संबंधी राजस्व का बड़ा हिस्सा विमानों के उड़ने से आता है, भले ही गैर-विमानन राजस्व (खुदरा आय, ड्यूटी फ्री, लाउंज सेवाएं आदि) बढ़ने के साथ इसकी हिस्सेदारी कम हो रही है। इनमें लैंडिंग और पार्किंग शुल्क शामिल हैं, जिनका बिल सीधे विमानन कंपनियों को देना होता है। लेकिन ज्यादातर मामलों में विमानन कंपनियों द्वारा इसका बोझ आंशिक या पूर्ण रूप से यात्रियों पर डाल दिया जाता है और इसे टिकट की कीमतों में शामिल किया जाता है क्योंकि वे विमानन कंपनियों की परिचालन लागत का हिस्सा बन जाते हैं।
हवाई अड्डे यात्रियों से सीधे यात्री सेवा शुल्क भी लेते हैं, जिसका उपयोग हवाई अड्डे की सुरक्षा, सुविधा और अन्य सेवाओं के लिए किया जाता है। कुछ हवाई अड्डों पर यात्रियों से उपयोगकर्ता विकास शुल्क भी लिया जाता है, जिसका उपयोग हवाई अड्डे के आधुनिकीकरण और विस्तार के लिए किया जाता है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलूरु और हैदराबाद जैसे देश के प्रमुख हवाई अड्डे बड़े स्तर पर उड़ानों के रद्द होने के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।