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Housing projects: देश के 42 शहरों में 2000 हाउसिंग प्रोजेक्ट्स रुके, 5.08 लाख फ्लैट प्रभावित

रुके हुए फ्लैट्स की संख्या 2018 के 4,65,555 से बढ़कर 5,08,202 हो गई है।

Last Updated- August 15, 2024 | 3:22 PM IST
housing finance stocks

देश के 42 शहरों में लगभग 2000 हाउसिंग प्रोजेक्ट्स रुके हुए हैं, जिनमें कुल 5.08 लाख फ्लैट शामिल हैं। एक डेटा एनालिटिक्स कंपनी प्रॉपइक्विटी के मुताबिक, ये प्रोजेक्ट्स मुख्य रूप से डेवलपर्स के पैसे के गलत इस्तेमाल और काम पूरा करने की उनकी क्षमता की कमी की वजह से रुके हुए हैं।

प्रॉपइक्विटी के डेटा के अनुसार, कुल 1,981 रेसिडेंशियल प्रोजेक्ट्स रुके हुए हैं जिनमें 5.08 लाख फ्लैट हैं। इनमें से 1,636 प्रोजेक्ट्स यानी 4,31,946 फ्लैट 14 बड़े शहरों में हैं, जबकि 345 प्रोजेक्ट्स यानी 76,256 फ्लैट 28 छोटे शहरों में हैं।

इसके अलावा, बताया गया है कि रुके हुए फ्लैट्स की संख्या 2018 के 4,65,555 से बढ़कर 5,08,202 हो गई है।

प्रॉपइक्विटी के फाउंडर और सीईओ समीर जसूजा ने कहा कि कई बिल्डिंग प्रोजेक्ट्स अधूरे रह जाते हैं क्योंकि बिल्डरों में काम पूरा करने की काबिलियत नहीं है, वे पैसे का सही इस्तेमाल नहीं करते और नए प्लॉट खरीदने या पुराने कर्ज चुकाने के लिए पैसे का गलत इस्तेमाल करते हैं।”

उन्होंने कहा कि घर खरीदने वालों को यह तय करने में मदद करने के लिए कि डेवलपर प्रोजेक्ट समय पर पूरा कर पाएगा या नहीं, एक स्वतंत्र थर्ड पार्टी ऑडिट सर्विस की जरूरत है। रुके हुए प्रोजेक्ट्स की समस्या को सुलझाने के लिए सरकार ने नवंबर 2019 में स्पेशल विंडो फॉर अफोर्डेबल एंड मिड-इनकम हाउसिंग (SWAMIH) फंड शुरू किया था।

प्रॉपइक्विटी के मुताबिक, पिछले पांच सालों में लगभग 32,000 घर पूरे किए गए हैं और SWAMIH फंड का लक्ष्य अगले तीन सालों में हर साल 20,000 घर बनाने का है। प्रॉपइक्विटी के डेटा के मुताबिक, सबसे ज्यादा रुके हुए फ्लैट्स बड़े शहरों में नोएडा के ग्रेटर नोएडा में 74,645 और छोटे शहरों में भिवाड़ी में 13,393 हैं।

गुरुग्राम में 158 प्रोजेक्ट्स रुके हुए हैं, जिनमें 52,509 फ्लैट हैं। नोएडा में 103 प्रोजेक्ट्स में 41,438 फ्लैट, गाजियाबाद में 50 प्रोजेक्ट्स में 15,278 फ्लैट और फरीदाबाद में 16 प्रोजेक्ट्स में 7,060 फ्लैट अधूरे पड़े हैं। दिल्ली में तो सिर्फ एक प्रोजेक्ट रुका है, जिसमें 900 फ्लैट हैं।

मुंबई में 234 प्रोजेक्ट्स रुके हुए हैं, जिनमें 37,883 फ्लैट हैं। नवी मुंबई में 125 प्रोजेक्ट्स रुके हैं, जिनमें 28,466 फ्लैट हैं। ठाणे में 186 प्रोजेक्ट्स रुके हैं, जिनमें 57,520 फ्लैट हैं। पुणे में भी हालात ठीक नहीं हैं, यहां 172 प्रोजेक्ट्स रुके हुए हैं, जिनमें 24,129 फ्लैट शामिल हैं। बेंगलुरु में 225 प्रोजेक्ट्स रुके हैं और 39,908 फ्लैट अधूरे हैं। कोलकाता में 82, चेन्नई में 92 और हैदराबाद में 25 प्रोजेक्ट्स रुके हैं।

जसूजा ने कहा, अलग-अलग अदालतों में रियल एस्टेट से जुड़े विवाद बढ़ रहे हैं। इसके अलावा, रुके हुए प्रोजेक्ट्स की संख्या बढ़ने और नए प्रोजेक्ट्स शुरू होने से घर खरीदने वालों पर दबाव बढ़ गया है कि वे घर खरीदने से पहले किसी जानकार व्यक्ति की मदद लें।

छोटे शहरों में भी हालात अच्छे नहीं हैं। भिवाड़ी में 33 प्रोजेक्ट्स रुके हुए हैं, जिनमें 13,393 फ्लैट हैं। लखनऊ में 48 प्रोजेक्ट्स में 13,024 फ्लैट, जयपुर में 37 प्रोजेक्ट्स में 9,862 फ्लैट और भोपाल में 27 प्रोजेक्ट्स में 7,500 फ्लैट अधूरे हैं।

प्रॉपइक्विटी नाम की कंपनी जो रियल एस्टेट से जुड़े आंकड़े इकट्ठा करती है। इस कंपनी ने देश के 44 शहरों, जिनमें 14 बड़े और 30 छोटे शहर शामिल हैं, में रियल एस्टेट से जुड़े सभी प्रोजेक्ट्स का डेटा जुटाया है। (PTI के इनपुट के साथ)

First Published - August 15, 2024 | 3:21 PM IST

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