डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव बना हुआ है। रुपया लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में आज लुढ़ककर 90.80 प्रति डॉलर के स्तर को छू गया। डीलरों ने कहा कि अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता से रुपये पर दबाव दिख रहा है। देश का व्यापार घाटा नवंबर में गिरकर 5 महीने के निचले स्तर 24.53 अरब डॉलर रहने से कारोबार के आखिरी घंटे में रुपये ने नुकसान की थोड़ी भरपाई की। कारोबार की समाप्ति पर रुपया 90.73 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। शुक्रवार को रुपया 90.42 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
इस साल एशियाई मुद्राओं में रुपये का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है, जो डॉलर के मुकाबले 5.64 फीसदी लुढ़का है। दिसंबर में अभी तक रुपये में 1.41 फीसदी की नरमी आ चुकी है। सकारात्मक व्यापार आंकड़ों के बावजूद जोखिम से बचने की प्रवृत्ति के कारण रुपये पर दबाव बना रह सकता है।
एक निजी बैंक के एक डीलर ने कहा, ‘सकारात्मक व्यापार आंकड़े से रुपये को क्षणिक राहत मिली है। अमेरिका-भारत व्यापार समझौते के अभाव में यह (रुपया) धीरे-धीरे नरम होता रहेगा। भारतीय रिजर्व बैंक भी बाजार में दखल नहीं दे रहा है।’
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, ‘हम लगातार विदेशी फंडों की निकासी का सामना कर रहे हैं।’
परमार ने कहा, ’91 के स्तर को छूने से पहले बीमा क्षेत्र में एफडीआई, डॉलर-रुपया स्वैप और आगामी आईपीओ के कारण रुपये में कुछ मजबूती दिखी, लेकिन हम अभी तक खतरे से बाहर नहीं हैं। निकट भविष्य में हाजिर डॉलर-रुपया पेयर के लिए तकनीकी रुझान तेजी का बना हुआ है जिसे 90.95 पर प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है और 90.50 से 90.30 पर समर्थन मिल सकता है।’
आईएफए ग्लोबल के संस्थापक और सीईओ अभिषेक गोयनका ने कहा, ‘भारतीय रिजर्व बैंक ने अस्थिरता को कम करने के लिए समय-समय पर मुद्रा बाजार में दखल दिया है मगर इसने व्यापक रुझान को बाजार पर छोड़ दिया है।’
डीलरों ने कहा कि प्रीमियम अधिक थे क्योंकि आयातकों द्वारा खरीदारी किए जाने के कारण नकदी कम थी और आरबीआई ने अपनी फॉरवर्ड पोजीशन को आगे नहीं बढ़ाया, जिससे प्रीमियम को समर्थन मिला।